शादी का झूठा झांसा देकर संबंध बनाने का फर्जी केस लगने के बाद खुद को कैसे बचाएं
सवाल
उत्तर (1)
सुप्रीम कोर्ट के कई बड़े फैसलों में यह साफ कहा गया है कि अगर संबंध लंबे समय तक आपसी सहमति से बने हों और दोनों को पता हो कि शादी होना मुश्किल है, तो उसे 'शादी का झांसा' नहीं माना जा सकता।
चूंकि आपके मामले में पुलिस चार्जशीट पेश कर चुकी है, इसलिए अब आपको कोर्ट में मजबूती से अपना बचाव करना होगा:
डिस्चार्ज की अर्जी: चार्जशीट मिलने के बाद कोर्ट में अगला कदम 'आरोप तय करना' (Charge Framing) होता है। आपको इसी स्तर पर अपने वकील के जरिए कोर्ट में खुद को केस से बाहर निकालने की अर्जी लगानी चाहिए। जज साहब के सामने यह बात मजबूती से रखें कि संबंध पूरी तरह सहमति से थे और जाति अलग होने के कारण शादी का वादा करने का कोई सवाल ही नहीं उठता था।
सबूतों का इस्तेमाल: लड़की का झूठ साबित करने के लिए आपको यह दिखाना होगा कि उसने केस आपकी नौकरी लगने के ठीक बाद किया है। इसके अलावा, अगर आपके पास कोई कॉल रिकॉर्डिंग या चैट है जिसमें जाति के अंतर या नौकरी की बात हो रही हो, तो वह सबूत कोर्ट में आपके बहुत काम आएगा और केस को तुरंत कमजोर कर देगा।
हाई कोर्ट से केस रद्द कराना: अगर किसी कारण से निचली अदालत आपकी डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर देती है, तो आप उस फर्जी चार्जशीट को पूरी तरह रद्द कराने के लिए सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। हाई कोर्ट अक्सर ऐसे मामलों में, जहां एफआईआर सिर्फ बदला लेने या पैसे ऐंठने के लिए लिखवाई गई हो, केस को तुरंत खत्म कर देता है।
आप बिल्कुल भी न घबराएं, क्योंकि पुलिस के चार्जशीट पेश कर देने का मतलब यह नहीं है कि आप दोषी साबित हो गए हैं। कानूनी कदम उठाने और किसी भी तरह की क़ानूनी सलाह के लिए आप हमसे अभी बात कर सकते है।
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