भूमि अधिग्रहण होने पर मुआवज़ा कितना मिलता है?


सवाल

हमारी जमीन 2011 में नहर के लिए चुनी गई थी। दूसरों को पैसा मिल गया, लेकिन हमें 2013 और फिर 2016 में नोटिस मिला। मुआवजे की रकम 2011 के पुराने रेट पर ही तय की गई है, जबकि आज जमीन की कीमत बहुत ज्यादा है। क्या हमें 2016 के रेट पर मुआवजा मिल सकता है? इसके लिए कानून क्या कहता है?

उत्तर (4)


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भूमि अधिग्रहण में मुआवजे का मामला अब नए कानून 'भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013' (LARR Act 2013) के तहत तय होता है। आपके सवालों के जवाब नीचे दिए गए हैं:

  • मुआवजे का नियम (नगर पालिका क्षेत्र): नए कानून के अनुसार, शहरी या नगर पालिका क्षेत्रों में बाजार मूल्य (Market Value) का कम से कम दोगुना (2 गुना) मुआवजा मिलता है। इसमें जमीन की कीमत के साथ-साथ 'सोलेटियम' (Solatium - यानी आपकी मर्जी के बिना जमीन लेने का हर्जाना) भी जुड़ता है, जो जमीन की कीमत का 100% होता है।

  • पुराने रेट पर मुआवजा क्यों? सरकार अक्सर उस तारीख के रेट लगाती है जब पहली बार अधिग्रहण का नोटिफिकेशन (Section 4) जारी हुआ था। लेकिन अगर अधिग्रहण की प्रक्रिया में बहुत ज्यादा देरी हुई है, तो आप बढ़ी हुई दरों की मांग कर सकते हैं।

  • क्या हाई कोर्ट से मदद मिलेगी? हाँ, यदि आप मुआवजे की रकम से खुश नहीं हैं, तो आप कोर्ट जा सकते हैं। कोर्ट यह देखेगा कि क्या 2011 से 2016 के बीच देरी सरकार की गलती से हुई है। अगर आप साबित कर दें कि उस इलाके में रजिस्ट्री रेट (Circle Rate) 36,000 है और आपको कम मिल रहा है, तो कोर्ट मुआवजे की राशि बढ़ाने का आदेश दे सकता है।

  • ब्याज का अधिकार: चूंकि आपको पैसा मिलने में देरी हुई है, इसलिए आप अधिसूचना की तारीख से लेकर पैसा मिलने तक की अवधि पर 12% से 15% सालाना ब्याज की मांग भी कर सकते हैं।

आपको क्या करना चाहिए?

  1. मुआवजा "विरोध के साथ" लें (Accept under Protest): जब आप पैसा लें, तो वहां कागजों पर लिख दें कि "मैं यह पैसा विरोध के साथ ले रहा हूँ और मैं इस रकम से संतुष्ट नहीं हूँ।" इससे आपका कोर्ट जाने का रास्ता खुला रहेगा।

  2. कलेक्टर को आवेदन: मुआवजे के खिलाफ सबसे पहले जिला कलेक्टर या भूमि अधिग्रहण अधिकारी (LAC) को आपत्ति दर्ज कराएं और मामला 'अथॉरिटी' (Land Acquisition Rehabilitation and Resettlement Authority) को भेजने की मांग करें।

  3. हाई कोर्ट में याचिका: यदि अधिकारी आपकी बात न सुनें, तो आप हाई कोर्ट में 'रिट याचिका' (Writ Petition) दायर कर सकते हैं।

184 votes

सबसे पहले मैं आपको बताना चाहूंगा कि सरकार का मूल्यांकन अलग होता है और बाजार मूल्य अलग होता है। बाजार मूल्य हमेशा सरकारी मूल्य से अधिक होता है। जब भूमि अधिग्रहण की बात आती है तो सरकार सरकार के मूल्यांकन के अनुसार कीमत देगी।

236 votes

कानून यह है कि आप उस भूमि के वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार क्षतिपूर्ति करेंगे जिस दिन राज्य सरकार द्वारा भूमि का अधिग्रहण किया जाता है। मुआवजे और ब्याज की राशि को संशोधित करने के लिए आपको माननीय उच्च न्यायालय से संपर्क करने की आवश्यकता है

144 votes

यदि आपने विरोध पर राशि प्राप्त की है तो आप वर्तमान मूल्य के अनुसार वृद्धि के लिए एक रिट याचिका दायर कर सकते हैं। लेकिन अगर आपने एलए अधिकारी से आपत्ति नहीं की है तो मुआवजे के लिए आपकी चुनौती कायम रह सकती है यदि आप कुछ दस्तावेज दिखा सकते हैं जो दूसरों को अधिक मिले हैं।


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