यदि व्यक्ति परिसीमा अधिनियम धारा 5 दुर


सवाल

यदि कोई व्यक्ति परिसीमा अधिनियम की धारा 5 का दुरुपयोग करे तो क्या किया जा सकता है ?? ओर ऐंसे मामलों में सीधे हाइकोर्ट की शरण ली जासकती है क्या ? ओर ऐसे मामलों यदि उत्तरवादी की जीत होती है तो वह किसी भी प्रकार की नुकसानी पाने का अधिकारी होगा क्या??

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जब कोई भी व्यक्ति परिसीमा अधिनियम की धारा 5 का अनुचित लाभ उठाता है एवं कपट पूर्ण तरीके से न्यायालय के समक्ष पेश करता है तब सर्वप्रथम उस समय उसी न्यायालय जिसके समक्ष धारा 5 का आवेदन प्रस्तुत किया गया है, में या जिस न्यायालय में लंबित है, आपको उसका विरोध करना चाहिए एवम सही तथ्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए जिसमें आप स्वयं को हुई क्षतिपूर्ति की भी मांग कर सकते हैं बावजूद उसके यदि न्यायालय जिसके समक्ष यह विरोध जाहिर किया गया है आपकी बात पर ध्यान नहीं देता है एवं आदेश पारित करता है, ऐसी स्थिति में आपको उस निचली अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए रिट याचिका के माध्यम से किसी भी प्रकार के संवैधानिक अधिकार के उल्लंघन के परिपेक्ष में, लीगल एरर होने पर, अल्ट्रा वायरस होने पर,प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के पालन न होने पर,आवेदन को बिना क्षेत्राधिकार सुने जाने पर सीधे ही अनुतोष प्राप्त करने हेतु याचिका दाखिल करनी चाहिए जिसमें आप स्वयं को हुई क्षतिपूर्ति की भी मांग कर सकते हैं जो कि एक शक्तिशाली एवं अर्थ पूर्ण विकल्प है।

आकाश शर्मा एडवोकेट
उच्च न्यायालय इलाहाबाद


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