मेरे वकील को कैसे बदलना है
सवाल
उत्तर (2)
किसी भी केस में अपना वकील बदलना आपका कानूनी अधिकार है। अगर आपको लगता है कि आपका वकील आपको सही सलाह नहीं दे रहा है या केस की जानकारी नहीं दे रहा, तो आप नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करके नया वकील रख सकते हैं।
1. अनापत्ति प्रमाण पत्र (No Objection Certificate - NOC)
वकील बदलने का सबसे ज़रूरी हिस्सा है NOC लेना।
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आपको अपने पुराने वकील से कहना होगा कि वे आपके 'वकालतनामा' पर 'No Objection' लिख कर हस्ताक्षर (Sign) कर दें।
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इसका मतलब यह होता है कि पुराने वकील को आपके द्वारा नया वकील रखने पर कोई आपत्ति नहीं है और उनकी फीस का हिसाब पूरा हो चुका है।
2. नया वकालतनामा
एक बार जब आपको पुराने वकील से NOC मिल जाती है, तो आपका नया वकील कोर्ट में एक नया 'वकालतनामा' जमा करेगा। इस नए वकालतनामा के साथ पुराने वकील की NOC भी लगाई जाती है। इसके बाद कोर्ट के रिकॉर्ड में पुराने वकील का नाम हटकर नए वकील का नाम जुड़ जाता है।
3. अगर पुराना वकील NOC न दे तो?
कई बार वकील फीस के विवाद या अन्य कारणों से NOC देने में आनाकानी करते हैं। ऐसी स्थिति में आप ये कदम उठा सकते हैं:
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कोर्ट से अनुमति: आप कोर्ट में एक आवेदन (Application) दे सकते हैं कि आप अपना वकील बदलना चाहते हैं और पुराना वकील NOC नहीं दे रहा है। जज साहब स्थिति को देखकर नए वकील को केस लड़ने की अनुमति दे सकते हैं।
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नोटिस भेजना: आप पुराने वकील को एक पत्र या ईमेल भेजकर उन्हें 'डिस्चार्ज' (Discharge) कर सकते हैं और अपनी फाइल वापस मांग सकते हैं।
4. महत्वपूर्ण दस्तावेज
वकील बदलते समय अपनी फाइल के सभी असली कागज, कोर्ट के आदेश की कॉपियाँ और अब तक हुई कार्यवाही के दस्तावेज पुराने वकील से ज़रूर वापस ले लें।
हाई कोर्ट हो या कोई भी छोटी अदालत, क्लाइंट को केस की जानकारी देना और सलाह देना वकील की ज़िम्मेदारी होती है। यह कहना कि "यहाँ ऐसा कुछ नहीं होता" पूरी तरह गलत है।
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
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- मेरे पिताजी पाँच भाई थे। उनमें से एक बड़े चाचा की कोई संतान नहीं थी। परिवार में सभी भाइयों के बीच संपत्ति का बँटवारा हो चुका था। वर्ष 2006 में मेरे चाचा का निधन हो गया। अपने निधन से पहले उन्होंने अपनी संपत्ति और अपनी पत्नी, यानी मेरी बड़ी चाची की जिम्मेदारी मेरे पिताजी को सौंप दी थी। चाचा के निधन के बाद मेरी चाची ने अपनी पूरी जमीन मेरी माँ के नाम कर दी थी, लेकिन मकान अपने नाम पर ही रखा था। उन्होंने कोर्ट के माध्यम से एक वसीयत भी बनवाई थी, जिसमें लिखा था कि उनकी मृत्यु के बाद यह मकान मेरे पिताजी का हो जाएगा। लेकिन मेरे पिताजी का निधन वर्ष 2012 में ही हो गया, जबकि मेरी चाची का निधन वर्ष 2021 में हुआ। पिताजी के निधन के बाद मैंने अपनी माँ और चाची, दोनों को अपने पास रखा और लगभग 10–12 वर्षों तक शहर में किराए के मकान में उनके रहने, खाने-पीने, इलाज और अन्य सभी जरूरतों का ध्यान रखा। मैंने और मेरी पत्नी ने मिलकर चाची की पूरी सेवा की। हमारा पैतृक मकान हमारे गाँव में है। फिलहाल उस मकान में हम रहते हैं और बिजली का बिल भी मेरी माँ के नाम पर आता है। मेरी माँ अभी जीवित हैं। हम तीन भाई हैं और मैं स
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- Sir ji Mera case act ka hai jismein mera bhai fasaya gaya hai usko Saja ho gai hai 25 sal ki usmein criminal appeal karni hai ki jankari chahie Thi iske liye help chahie Thi aapki main bahut Garib aadami hun mujhe aapki help chahie