मेरे परिवार चाचा ताऊ मिलकर जबरदस्ती 2008


सवाल

मेरे परिवार में चाचा और ताऊ ने मिलकर जबरदस्ती 2008 में एक वाहमी बटवारे के 10 रूपए के स्टाम्प पर लिखा पढ़ी करवाकर मेरे पिताजी से भी दस्तखत करवा लिया था और नोटरी करवाया साथ ही साथ हिस्से अलग कर दिए परन्तु हमारे पिताजी को जितना हिस्पसा होता है उससे बहुत कम दिया था| मेरे पिताजी ने एक मुकदमा बटवारे का 2007 में दाखिल किया था जो की बीच में अदम पैरवी में ख़ारिज हो गया था परन्तु अभी दुबारा रीस्टोर हो गया है जिसमे वो लोग कभी हाजिर ही नहीं होते हैं| तो क्या इस मुक़दमे के आधार पर हम इस केस को लड़ सकते है ऐसा तो नहीं की उस वहमी बटवारे को कोर्ट आधार माने| समुचित रे दे अगर हो सके तो कोई नजीर के आदेश को साथ में दे|

उत्तर (2)


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यदि आपके पिताजी और उनके भाइयों के बीच बंटवारे का मुकदमा चल रहा है और वह दोनों की अदम पैरवी में खारिज हो चुका है तो उसमें रेस्टोरेशन प्रार्थना पत्र स्वीकार हो जाने पर फिर से चल पड़ेगा और यदि उसमें विपक्षी पार्टी न्यायालय में हाजिर नहीं होती है और उन पर न्यायालय द्वारा तमिला पर्याप्त मान ली जाती है तो उनके विरुद्ध एकपक्षीय रूप से मुकदमे की कार्यवाही अग्रसारित हो जाएगी और रही बात नोटरी द्वारा ₹10 के स्टांप पर आपसी बंटवारे की तो न्यायालय उस पर कतई विचार नहीं करेगा


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