मेरे परदादा पत्नी 6 एकड़ जमीन दी पत्नी म


सवाल

मेरे परदादा में उनकी पत्नी को 6 एकड़ जमीन दी गयी और उनकी पत्नी की मृत्यु के बाद वो ज़मीन उनके एकमात्र पुत्र की पत्नी अर्थात अपनी बहू के नाम अपने पुत्र की लिखित सहमति के आधार पर उक्त भूमि राजस्व रिकार्ड में दर्ज करवा दी गयी । एवं मालिकाना हक प्राप्त था और कब्ज़ा भी था । आठ उक्त भूमि के हस्तान्तरण को 35 वर्षों का समय हो चुका है परंतु पति द्वारा 35 वर्षों बाद अपनी पत्नी से ज़मीन वापस मांगने के लिए कोर्ट में कैसे इस आधार पर दायर किया गया कि उक्त हस्तान्तरण की मुझे कोई जानकारी नही थी और मेरे दस्तखत नकली हैं और उस जमीन पर मेरा ही कब्ज़ा है और इस हेतु परिसीमा अधिनियम धारा 5 का झोटी ओर मनगढंत बातें कर सहारा गया ।इस हेतु प्रतिवादी को क्या उपचार मिल सकते है क्या ज़मीन वापस होगी ।

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भू राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण होने से कोई अधिकार प्राप्त नहीं होते लेकिन अब भूमि का हस्तांतरण किसी रजिस्टर्ड कागज के जरिए किया गया है तो वह कोर्ट के सामने आसानी से चैलेंज नहीं किया जा सकता वाद की कॉपी देखे बिना बताना मुश्किल है की उनके द्वारा किस आधार पर इसे पेश किया गया है लेकिन इतने बड़े समय अवधि निकल जाने के बाद केस चलाना बहुत मुश्किल है


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