मेरी शादी मेरे ससुराल वालों मेरी पत्न


सवाल

मेरी शादी के बाद मेरे ससुराल वालों ने मेरी पत्नी को 6 माह तक रो कर रखा , फिर जब हम लेने गए तो मेरी पत्नी उसी दिन किसी और लड़के के साथ भागकर शादी कर ली , मेरे ससुराल वालों ने मेरी पत्नी की गुमशुदगी दर्ज कराई , और बाद में पुलिस ने उन दोनो को ढूंढ भी लिया । और गवाही में लड़की ने प्रेमी के पक्ष में गवाही भी दे दी। 1= मेरा प्रश्न यह है कि जब मेरी पत्नी को उसका प्रेमी पसंद था तो उसने मुझसे शादी कर मेरी इज्जत और शादी में ख़र्च के लिए क्या लड़की या उसके प्रेमी पर केस कर सकता हूं।

उत्तर (2)


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क्या है दूसरे विवाह पर कानून

एक पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरा विवाह करना भारतीय दंड संहिता 1860 का 45 के अंतर्गत धारा 494 दूसरे विवाह के संबंध में उल्लेख करती है। दंड सहिंता की यह धारा दूसरे विवाह को दंडनीय अपराध बनाती है। इस धारा के अंतर्गत दूसरा विवाह करने पर 7 वर्ष तक के कारावास की अवधि का दंड दिया जा सकता है।

भारत में विवाह दो प्रकार से होते हैं। एक विवाह पर्सनल लॉ के अंतर्गत होता है और दूसरा विवाह विशेष विवाह अधिनियम, 1956 के अंतर्गत होता है। इन दोनों ही कानूनों में दूसरे विवाह को दंडनीय बनाया गया है। जैसे कि हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 17 दूसरे विवाह के संबंध में दंड का उल्लेख करती है। यह धारा स्पष्ट करती है कि जब भी कोई व्यक्ति जिसका पति या पत्नी जीवित है उसके जीवन काल में कोई दूसरा विवाह कर लेता है तब उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 494 के अंतर्गत दंडनीय अपराध का दोषी माना जाएगा।

इसी प्रकार विशेष विवाह अधिनियम की धारा 44 दूसरे विवाह को दंड के रूप में उल्लेखित करती है। अगर किन्ही व्यक्ति ने विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत शादी की है और ऐसी शादी के बाद कोई दूसरा विवाह कर लेता है तब उसे धारा 494 के अंतर्गत दंडित किया जाएगा।

यहां यह ध्यान देना चाहिए कि दूसरे विवाह के मामले में दंड का प्रावधान कुछ रूढ़ि और प्रथा के अंतर्गत है।अगर किसी समुदाय या धर्म में दूसरे विवाह को मान्यता है तब यह धारा लागू नहीं होती। जैसे मुसलमान समाज में दूसरे विवाह को विधि मान्य विवाह माना गया है इसलिए मुसलमानों के संबंध में यह धारा लागू नहीं होती है।

यहां पर यह ध्यान देना चाहिए कि दूसरे विवाह को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने क्रूरता जरूर माना है, पति द्वारा दूसरा विवाह किया जाता है तब उसकी पत्नी के प्रति ऐसा दूसरा विवाह क्रूरता होगा और ऐसी क्रूरता के लिए उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 498(ए) के अंतर्गत दंडित किया जा सकता है। इस धारा के अंतर्गत भी 7 वर्ष तक के कारावास के दंड का प्रावधान है इसलिए दूसरे विवाह के दंड से मुसलमान धर्म के लोग भी नहीं बच सकते।
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प लाला लाला छले दिनों पूर्व आर्मी चीफ के खिलाफ पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल ने अदालत में एक अर्जी दाखिल की और आरोप लगाया कि पूर्व आर्मी चीफ ने उनकी मानहानि की है। इस मामले में शिकायती ने अपना बयान दर्ज कराया और अदालत ने वी. के. सिंह के नाम समन जारी किया है। इस तरह के कई मामले आए दिन देखने को मिलते हैं, जिसमें मानहानि का आरोप लगाया जाता है। इस संबंध में क्या हैं कानूनी प्रावधान, बता रहे हैं राजेश चौधरी:क्या है मानहानि- जब भी किसी शख्स के मान-सम्मान को आरोप लगाकर या सरेआम उसका अपमान कर ठेस पहुंचाई जाती है तो ऐसे मामले में मानहानि का मामला बन सकता है। शर्त यह है कि ऐसी घटना सार्वजनिक तौर पर हुई हो।- कानूनी जानकार डी. बी. गोस्वामी बताते हैं कि जब भी कोई शख्स ऐसी टिप्पणी करे, जिससे किसी के मान-सम्मान को ठेस पहुंचे तो यह टिप्पणी मानहानि के दायरे में आ सकती है। इसके लिए जरूरी है कि टिप्पणी या तो मौखिक हो या फिर लिखित।- अगर मौखिक तौर पर किसी के खिलाफ टिप्पणी हुई है तो यह टिप्पणी किसी के सामने होनी चाहिए। लेकिन किसी शख्स के खिलाफ ऐसी टिप्पणी किसी अखबार के जरिए प्रकाशित की जाती है या फिर मीडिया के दूसरे माध्यम से उसे सार्वजनिक किया जाता है तो उस सूरत में भी वह मानहानि का मामला बन सकता है।केस के रास्ते- ऐसे मामले में जिसकी मानहानि हुई है, उसके पास दो विकल्प हैं। पहला यह कि वह क्रिमिनल या सिविल केस में से कोई एक केस कर सकता है। दूसरा यह कि वह क्रिमिनल और सिविल दोनों ही केस कर सकता है।- आपराधिक मानहानि का मामला आईपीसी की धारा-499 व 500 के तहत दर्ज कराया जाता है। इसके लिए शिकायती सीआरपीसी की धारा-200 के तहत अदालत में अर्जी दाखिल करता है और वह आरोपी के खिलाफ तमाम सबूत पेश करते हुए आरोपी के खिलाफ केस दर्ज करने की गुहार लगाता है। शिकायती के सबूत व बयान से अगर अदालत संतुष्ट हो जाए तो वह आरोपी के खिलाफ मानहानि के मामले में समन जारी करता है और फिर केस चलता है।- हाई कोर्ट में सरकारी वकील नवीन शर्मा के मुताबिक क्रिमिनल डिफेमेशन एक समझौतावादी अपराध का मामला है। यह जमानती अपराध की कैटिगरी में आता है। इस मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद ज्यादा-से-ज्यादा दो साल कैद की सजा का प्रावधान है।- शिकायती क्रिमिनल केस के साथ-साथ सिविल डिफेमेशन का मुकदमा भी कर सकता है। इसके लिए सिविल कोर्ट में अर्जी दाखिल किए जाने का प्रावधान है। और इस प्रावधान के तहत वादी मुआवजे की मांग कर सकता है। मुआवजे के लिए उसके दावे पर प्रतिवादी को नोटिस जारी होता है और फिर केस चलता है। इस मामले में भी वादी को अपने दावे के पक्ष में सबूत पेश करने होते हैं।- क्रिमिनल डिफेमेशन और सिविल डिफेमेशन दोनों केस अलग-अलग चलते हैं।


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