बेटे की मौत के बाद बहू ने अनुकंपा नियुक्ति और सारे फंड ले लिए न्याय कैसे पाएं


सवाल

दिवंगत शासकीय कर्मचारी के प्रकरण में बिना माता (प्रथम श्रेणी उत्तराधिकारी) की सहमति/अनापत्ति के एकतरफा अनुकंपा नियुक्ति एवं समस्त फंड/देयकों के अवैध हस्तांतरण -इस प्रकरण में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और प्रशासनिक नियमों का घोर उल्लंघन हुआ है, जिसका विवरण निम्नलिखित है: 1. घर छोड़कर जाना: मेरे पुत्र के निधन के मात्र एक महीने के भीतर ही मेरी बहू अपने मायके में रहने लगीं और तब से वहीं निवास कर रही हैं, जबकि परिवार की वरिष्ठ और कानूनी उत्तराधिकारी होने के नाते मेरी सहमति या देखरेख का पूर्ण अभाव रहा है। 2-बिना सहमति (NOC) के एकतरफा अनुकंपा नियुक्ति: मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति में परिवार के सभी आश्रितों/कानूनी उत्तराधिकारियों की सहमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) अनिवार्य होता है। परंतु विभाग द्वारा मेरी (माता की) किसी भी प्रकार की सहमति या हस्ताक्षर के बिना, नियमों को ताक पर रखकर एकतरफा रूप से अनुकंपा नियुक्ति दे दी गई है। सभी फंड देयक भी मेरी वैध कानूनी उत्तराधिकारिता बिना एकतरफा तौर पर स्थानांतरित कर दिए गए हैं

उत्तर (2)


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आपके द्वारा साझा किए गए प्रश्न में दिवंगत सरकारी कर्मचारी के मामले में एक गंभीर प्रशासनिक और कानूनी अनियमितता को उजागर किया गया है। आप, जो कि दिवंगत पुत्र की माता और प्रथम श्रेणी की कानूनी उत्तराधिकारी हैं, ने विभाग द्वारा बिना आपकी सहमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र के एकतरफा अनुकंपा नियुक्ति देने की बात कही है, जो कि मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के स्पष्ट नियमों का उल्लंघन है। यह नियम अनिवार्य रूप से यह सुनिश्चित करते हैं कि परिवार के सभी आश्रितों और कानूनी उत्तराधिकारियों की सहमति ली जाए। आपके द्वारा बताई गई स्थिति में, आपकी बहू ने पुत्र के निधन के एक माह के भीतर ही घर छोड़ दिया और अपने मायके में जाकर रहने लगी। परिवार की वरिष्ठ और प्रथम कानूनी उत्तराधिकारी होने के नाते, आपकी सहमति अत्यंत महत्वपूर्ण थी, लेकिन विभाग ने आपको दरकिनार करते हुए पूरी प्रक्रिया को ताक पर रख दिया।

इसके अलावा, सभी फंड और देयकों को भी आपकी वैध कानूनी उत्तराधिकारिता को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा रूप से स्थानांतरित कर दिया गया है। यह विभाग की घोर लापरवाही और कानूनी प्रक्रिया का मजाक है। आप इस मामले में अपने अधिकारों की रक्षा के लिए तुरंत कानूनी कदम उठा सकती हैं। सबसे पहले, आपको विभाग के प्रमुख या संबंधित अधिकारी को एक स्पष्ट आपत्ति पत्र लिखना चाहिए, जिसमें नियमों का जिक्र करते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना की गई इस नियुक्ति को अवैध और शून्य घोषित करने की मांग की जाए। साथ ही, आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी देयकों को आपके नाम पर ही स्थानांतरित किया जाए, क्योंकि बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के और आपकी सहमति के बिना बहू का कानूनी रूप से आपके समकक्ष उत्तराधिकारी होना संदिग्ध है।

यदि विभाग आपकी बात को नजरअंदाज करता है, तो आप मध्य प्रदेश लोक सेवा प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर कर सकती हैं या सिविल न्यायालय में प्रशासनिक अधिकारों के हनन के लिए याचिका दायर कर सकती हैं। आपके पास यह साबित करने का पूरा अधिकार है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शिता और न्यायिक मानदंडों के खिलाफ है।


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