क्या झूठे गवाह को कानून के तहत दंडित किया जा सकता है
सवाल
उत्तर (5)
हाँ, अगर कोई व्यक्ति किसी आधिकारिक कार्यवाही या स्थानीय आयुक्त (Local Commissioner) के सामने झूठी गवाही देता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी मामला चलाया जा सकता है। कानून के सामने झूठ बोलना एक गंभीर अपराध है और इसके लिए जेल की सजा का प्रावधान है।
जब कोई व्यक्ति शपथ लेकर बयान देता है और बाद में उससे मुकर जाता है या जानबूझकर गलत जानकारी देता है, तो इसे झूठी गवाही देना (Perjury) कहा जाता है। भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की धाराओं के तहत, न्यायिक कार्यवाही के दौरान झूठे सबूत देने या गवाही देने पर व्यक्ति को जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
यदि वह व्यक्ति स्थानीय आयुक्त के सामने दिए गए अपने बयान को बाद में अदालत में बदल देता है, तो आप उसके खिलाफ कार्यवाही करने के लिए अदालत में एक आवेदन दे सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको यह साबित करना होगा कि उस व्यक्ति ने जानबूझकर झूठ बोला है और उसके पास अपनी बात बदलने का कोई वैध कारण नहीं है।
अदालत ऐसे मामलों में कड़ा रुख अपनाती है क्योंकि झूठी गवाही से न्याय की प्रक्रिया में बाधा आती है। यदि दोष साबित हो जाता है, तो झूठे गवाह को सजा मिलना तय है। आपको अपने वकील के जरिए उस व्यक्ति के पिछले बयानों की नकल निकलवानी चाहिए ताकि आप अदालत में उसका झूठ पकड़ सकें।
पूर्ण विवरण प्रदान नहीं किया गया है, तथापि: कृपया ध्यान दें: प्रकट नहीं होना / बयान को वापस बुलाना "झूठे सबूत" के बराबर नहीं है कृपया भारतीय दंड संहिता की धारा 191 देखें: भारतीय दंड संहिता 191 की धारा 191। झूठे साक्ष्य देना।—जो कोई भी, कानूनी रूप से सत्य कथन करने के लिए शपथ या कानून के एक स्पष्ट प्रावधान द्वारा बाध्य, या किसी विषय पर घोषणा करने के लिए कानून द्वारा बाध्य होने पर, कोई भी बयान जो झूठा है, और जिसे वह जानता है या विश्वास करता है कि झूठा है या विश्वास नहीं करता है सत्य होना, झूठा साक्ष्य देना कहा जाता है। स्पष्टीकरण 1—कोई कथन इस धारा के अर्थ के अंतर्गत है, चाहे वह मौखिक रूप से दिया गया हो या अन्यथा। स्पष्टीकरण 2.—अनुप्रमाणित करने वाले व्यक्ति के विश्वास के बारे में एक झूठा बयान इस खंड के अर्थ के भीतर है, और एक व्यक्ति यह कहकर झूठा साक्ष्य देने का दोषी हो सकता है कि वह किसी ऐसी चीज पर विश्वास करता है जिस पर वह विश्वास नहीं करता, साथ ही साथ यह कहते हुए कि वह एक ऐसी चीज जानता है जिसे वह नहीं जानता है।
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