क्या दादा के मरने के बाद पोते को दादा की नौकरी मिल सकती है


सवाल

मेरे दादाजी पुलिस विभाग में कार्यरत थे और उनकी मृत्यु हो गई है। मैं जानना चाहता हूं कि क्या उनके पोते को पुलिस में अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल सकती है, खासकर तब जब परिवार में कोई और सदस्य इसके लिए योग्य न हो। क्या इसके लिए मुझे कोर्ट में केस करना चाहिए?

उत्तर (2)


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यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल है, लेकिन इसका जवाब पूरी तरह से उस राज्य के 'सेवा नियमों' (Service Rules) पर निर्भर करता है जहां आपके दादाजी नौकरी करते थे। आमतौर पर, सरकारी नौकरी में 'अनुकंपा नियुक्ति' (Compassionate Appointment) का नियम सिर्फ मृतक कर्मचारी के सीधे आश्रितों के लिए होता है।

ज्यादातर राज्यों और केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, आश्रितों की परिभाषा में पत्नी, बेटा या बेटी (अविवाहित और कुछ मामलों में विवाहित) आते हैं। सामान्य परिस्थितियों में 'पोता' (Grandson) सीधे तौर पर आश्रित की श्रेणी में नहीं आता है। इसलिए, अगर आपके पिता जीवित हैं, तो आपको दादाजी की जगह नौकरी मिलने की संभावना न के बराबर है, क्योंकि कानून मानता है कि जिम्मेदारी आपके पिता की है।

हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में अपवाद हो सकते हैं। अगर आपके पिता (जो दादाजी के बेटे थे) की मृत्यु दादाजी से पहले ही हो चुकी थी और आप पूरी तरह से अपने दादाजी पर ही निर्भर थे, तो कुछ राज्यों के पुलिस विभाग नियमों में छूट दे सकते हैं। लेकिन यह हर राज्य में लागू नहीं होता। आपको अपने दादाजी के विभाग से उनकी 'भर्ती नियमावली' (Recruitment Policy) की जानकारी लेनी होगी।

जहां तक कोर्ट केस करने की बात है, तो आपको जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं है, बल्कि संकट में फंसे परिवार को तत्काल मदद देने की एक योजना है। अदालतें अपनी मर्जी से नियम नहीं बदल सकतीं। अगर विभाग के नियमों में पोते को नौकरी देने का प्रावधान नहीं है, तो कोर्ट केस करने से भी आपको नौकरी नहीं मिलेगी और आपका पैसा और समय ही बर्बाद होगा।

इसलिए, सबसे पहले आप विभाग में एक लिखित आवेदन (Application) दें। अगर विभाग लिखित में मना कर देता है और आपको लगता है कि नियमों में पोते के लिए जगह है, तभी किसी वकील से सलाह लेकर कोर्ट जाने के बारे में सोचें।

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सबसे पहले यह किसी राज्य विशेष के सेवा नियमों पर निर्भर करता है, आपने अपने प्रश्न में राज्य का नाम, और अपने दादाजी की मृत्यु से पहले पुलिस में रैंक का उल्लेख नहीं किया है, सामान्य रूप से पहले पुत्र इस लाभ को पाने के लिए पात्र है, कोर्ट जाने से पहले सर्विस रूल्स चेक कर लें...


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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


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