2 भाइयों और 5 बहनों में पिता की जमीन का बंटवारा कैसे होगा


सवाल

हम 2 भाई और 5 बहनें हैं और हम मुस्लिम हैं। यूपी के गांव में पिता की जमीन है, जिसमें सरकारी कागजों (खतौनी) में हम दो भाइयों का नाम 'खातेदार' के रूप में दर्ज है। पिता का इंतकाल 1999 में हुआ था और उन्होंने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी। क्या इस जमीन पर सिर्फ भाइयों का हक है या बहनों का भी हिस्सा होगा? अगर है, तो कितना? और क्या जमीन बेचने के लिए बहनों की मंजूरी चाहिए होगी?

उत्तर (3)


361 votes

मुस्लिम कानून के मुताबिक, पिता की संपत्ति पर बेटे और बेटियों दोनों का अधिकार होता है। आपकी स्थिति में कानूनी स्थिति इस प्रकार है:

  • बहनों का अधिकार: मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत, पिता के इंतकाल के बाद उनकी संपत्ति में उनकी सभी संतानों का हिस्सा होता है। भले ही सरकारी रिकॉर्ड (खतौनी) में सिर्फ भाइयों के नाम दर्ज हों, लेकिन कानूनी तौर पर बहनें भी उस संपत्ति में हिस्सेदार हैं। भाइयों का नाम दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि वे अकेले मालिक बन गए; वे केवल परिवार के प्रतिनिधि के रूप में वहां दर्ज हो सकते हैं।

  • हिस्से का प्रतिशत: मुस्लिम कानून में "बेटे का हिस्सा बेटी से दोगुना" होता है। आपके मामले में (2 भाई और 5 बहनें), जमीन को कुल 9 हिस्सों में बांटा जाएगा।

    • दोनों भाइयों को 2-2 हिस्से मिलेंगे।

    • पांचों बहनों को 1-1 हिस्सा मिलेगा।

    • यानी भाइयों को बहनों के मुकाबले डबल हिस्सा मिलेगा, पर बहनों का हिस्सा खत्म नहीं होगा।

  • जमीन बेचना और सहमति: चूंकि बहनें भी कानूनी वारिस हैं, इसलिए जमीन बेचने के लिए उनकी सहमति (NOC) या उनके दस्तखत जरूरी होंगे। अगर आप उनकी मर्जी के बिना जमीन बेचते हैं, तो बहनें बाद में कोर्ट में केस करके उस बिक्री को रद्द करवा सकती हैं और अपना हिस्सा मांग सकती हैं।

  • यूपी का विशेष नियम: उत्तर प्रदेश में कृषि भूमि (खेती की जमीन) के लिए पहले 'ज़मींदारी उन्मूलन अधिनियम' (UPZA & LR) लागू होता था, जिसमें कई बार बेटियों को हिस्सा नहीं मिलता था। लेकिन अब नए नियमों और कोर्ट के फैसलों के बाद, बेटियों को भी बराबरी का उत्तराधिकारी माना जाने लगा है।

झगड़े से बचने के लिए बेहतर होगा कि आप अपनी बहनों से बात करें। अगर वे अपना हिस्सा छोड़ना चाहती हैं, तो उनसे एक 'रिलिनक्विशमेंट डीड' (Haq-tyag) बनवा लें ताकि भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए।

330 votes

संपत्ति में सिर्फ दोनों भाइयों का अधिकार होगा। बहनों का कोई अधिकार नहीं होगा। उक्त संपत्ति को दोनों भाई जिसे बेचना चाहें, भेज सकते हैं। बहनों को कोई प्रतिशत नहीं मिलेगा और उन्हें कोई हिस्सा नहीं मिलेगा। इसलिए वहां सहमति की भी आवश्यकता नहीं है।

110 votes

मुस्लिम कानून में पिता संपत्ति का संरक्षक होता है। पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति 2: 1 के अनुपात में पुत्रों और पुत्रियों को विरासत में मिलती है, अर्थात सभी पुत्रों को मिलाकर दो तिहाई हिस्सा मिलता है और सभी पुत्रियों को शेष एक तिहाई हिस्सा आपस में समान रूप से विभाजित किया जाता है। तो आप में से दो के पास एक-तिहाई हिस्सा होगा, शेष बहनों द्वारा साझा किया जाएगा। हां 8च आपकी बहनें हैं, उनका अधिकार है और संपत्ति को बेचने या विभाजित करने के लिए सहमति जरूरी है।


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