वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप) क्या होता है - कानून, सजा और शिकायत



वैवाहिक दुष्कर्म (Marital Rape) तब होता है जब कोई पति अपनी पत्नी की सहमति के बिना जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाता है। यह घरेलू हिंसा और यौन शोषण का एक गंभीर रूप है, हालांकि भारत में इसे अभी तक अपराध के रूप में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।

मैरिटल रेप पर समाज और अदालतों में लगातार बहस जारी है कि क्या शादी के बाद पत्नी के साथ जबरदस्ती सेक्स को भी अन्य यौन अपराधों की तरह सजा दी जानी चाहिए। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि वैवाहिक दुष्कर्म क्या होता है, भारत में इसके कानूनी प्रावधान क्या हैं, और शादी के बाद पत्नी के साथ बलात्कार के मामलों में सजा या कार्रवाई कैसे की जाती है।

यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर हमें खुलकर बात करनी चाहिए और पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलना चाहिए। इस अपराध के बारे में जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह एक ऐसा गंभीर मुद्दा है जो महिलाओं के मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करता है। समाज में इस मुद्दे को लेकर बहुत सारे विवाद व सवाल उठते रहते है जिसके बारे में आज विस्तार से बात करेंगे।


विषयसूची

  1. वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप) का अर्थ क्या है?
  2. भारत में वैवाहिक दुष्कर्म पर कानूनी प्रावधान क्या है?
  3. वैवाहिक बलात्कार की शिकायत कैसे करें?
  4. पुराने कानून की आईपीसी धारा 375 के तहत वैवाहिक मैरिटल रेप
  5. नए कानून की बीएनएस धारा 63 (2) के तहत शादी के बाद रेप
  6. क्या वैवाहिक बलात्कार के मामले में पति को सजा मिल सकती है?
  7. वैवाहिक दुष्कर्म के पीड़ितों को आने वाली चुनौतियाँ
  8. वैवाहिक दुष्कर्म के मामलों में सुप्रीम कोर्ट
  9. वैवाहिक बलात्कार को रोकने के उपाय
  10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Property Dispute



वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप) का अर्थ क्या है?

वैवाहिक बलात्कार का मतलब है, जब एक पति अपनी पत्नी के साथ उसकी सहमति के बिना शारीरिक संबंध बनाता है। इसका अर्थ यह है कि यदि पत्नी ने शारीरिक संबंध बनाने के लिए मना किया है या सहमति नहीं दी है, लेकिन फिर भी पति जबरदस्ती करता है, तो इसे वैवाहिक बलात्कार माना जाता है।

लेकिन भारत में अब तक वैवाहिक बलात्कार को अपराध नहीं माना जाता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अनुसार जब किसी महिला के साथ किसी अन्य व्यक्ति द्वारा बलात्कार किया जाता है, तो इसे अपराध माना जाता है। लेकिन अगर वही महिला अपने पति पर बलात्कार का आरोप लगाती है, तो उसे अपराध नहीं माना जाता।



भारत में वैवाहिक दुष्कर्म पर कानूनी प्रावधान क्या है?



पुराने कानून की आईपीसी धारा 375 के तहत वैवाहिक मैरिटल रेप

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाता है, तो उसे तब तक बलात्कार नहीं माना जाता, जब तक पत्नी की उम्र 15 वर्ष से कम न हो।

इसका मतलब यह है कि अगर कोई पति अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाता है और उसकी पत्नी 15 वर्ष से ऊपर की है, तो इसे बलात्कार नहीं माना जाता था, भले ही पत्नी ने सहमति नहीं दी हो। इसका सीधा मतलब है कि इस स्थिति में पति को बलात्कार के आरोप से बचाया गया है।



नए कानून की बीएनएस धारा 63 (2) के तहत शादी के बाद रेप

भारतीय न्याय संहिता की धारा 63(2) में अपवाद के अनुसार वैवाहिक बलात्कार का अपराध तब तक नहीं माना जाता जब तक पत्नी की उम्र 18 वर्ष से अधिक हो। इसका मतलब यह है कि अगर पति अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाता है और पत्नी 18 वर्ष या उससे अधिक की है, तो इसे बलात्कार के रूप में नहीं देखा जाएगा।
यह अपवाद भारतीय दंड संहिता की धारा 63(2) के तहत है, जो खासकर वैवाहिक संबंधों को लेकर लागू होता है।

हालांकि यह अपवाद महिलाओं के अधिकारों और समानता पर सवाल उठाता है, और इसे लेकर कानूनी चुनौतियाँ भी चल रही हैं। कई लोग इस अपवाद को असंवैधानिक मानते हुए इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यह महिलाओं के मौलिक अधिकारों और सम्मान का उल्लंघन  करता है।
 



क्या वैवाहिक बलात्कार के मामले में पति को सजा मिल सकती है?

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी महिला का बलात्कार करने का अपराध करता है, तो उसे गंभीर सजा दी जाती है। इसके अंतर्गत सजा की अवधि दस वर्ष से कम नहीं हो सकती, और इसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही जुर्माना  भी लगाया जा सकता है।

हालांकि एक महत्वपूर्ण अपवाद इस धारा में है जो वैवाहिक बलात्कार के मामले में लागू होता है। यह अपवाद कहता है कि अगर पति अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध बनाता है, तो यह बलात्कार नहीं माना जाएगा। यानी यदि पत्नी की उम्र 18 वर्ष से ज्यादा है, तो इस अपवाद के तहत पति को बलात्कार का दोषी नहीं माना जाएगा।

जाने - पति द्वारा क्रूरता करने पर कौन सी धारा लगती है?



वैवाहिक दुष्कर्म के पीड़ितों को आने वाली चुनौतियाँ

वैवाहिक दुष्कर्म के कारण पीड़ित महिलाओं को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ये चुनौतियाँ न केवल व्यक्तिगत होती हैं बल्कि सामाजिक और कानूनी भी होती हैं।

  • ऐसे मामलों में पीड़ित महिलाओं को अक्सर अपने परिवार से ही अपमान और दबाव का सामना करना पड़ता है। परिवार के लोग ऐसी बातों को शर्मनाक मानते हैं और महिलाओं को समाज में बदनाम होने का डर दिखाते हैं।
  • समाज में वैवाहिक दुष्कर्म को लेकर अभी भी बहुत कम जागरूकता है। पीड़ित महिलाओं को समाज से बहिष्कार किया जा सकता है और उन्हें अपराधी की तरह देखा जा सकता है।
  • कई बार पति और ससुराल वाले पीड़ित महिलाओं  को और अधिक परेशान करते हैं। उन्हें धमकाया जाता है और उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर किया जाता है।
  • वैवाहिक दुष्कर्म के कारण पीड़ित महिलाओं को लगातार डर और चिंता का सामना करना पड़ता है। उन्हें अपने पति और परिवार से डर लगता है और वे सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं।
  • वैवाहिक दुष्कर्म के बाद पीड़ित महिलाओं को लोगों पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है।
  • वैवाहिक बलात्कार के कारण कई महिलाएं गंभीर मानसिक बीमारियों जैसे कि डिप्रेशन और चिंता का शिकार हो जाती हैं। कुछ महिलाएं आत्महत्या करने के बारे में भी सोचती हैं।
  • वैवाहिक दुष्कर्म के कारण महिलाओं को यौन संक्रमित रोग होने का खतरा रहता है।
  • कई महिलाएं वैवाहिक दुष्कर्म के कारण गर्भवती हो जाती हैं।
 

वैवाहिक दुष्कर्म के मामलों में सुप्रीम कोर्ट

2024 तक भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 63 के तहत वैवाहिक बलात्कार के लिए बनाए गए अपवाद पर कोई निश्चित निर्णय नहीं दिया है।

  • वैवाहिक बलात्कार के अपवाद को चुनौती देने वाली एक याचिका अब भी सर्वोच्च न्यायालय में चल रही है। इसमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या यह अपवाद महिलाओं के अधिकारों और समानता के उल्लंघन के रूप में काम करता है। इस पर अभी निर्णय होना बाकी है।
  • भारतीय सरकार ने इस अपवाद को हटाने का विरोध किया है। सरकार का कहना है कि यदि इस अपवाद को खत्म कर दिया जाता है, तो यह विवाह को अस्थिर कर सकता है और समाज में गंभीर प्रभाव डाल सकता है। सरकार की यह स्थिति इस मुद्दे को और मुश्किल बना देती है।
  • समाज में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है, और लोग यह चाहते हैं कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित (Crime Declared) किया जाए।
  • कई अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भारत से अपील की है कि वह वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की दिशा में कदम उठाए।
  • इन संगठनों का कहना है कि इससे महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता की रक्षा होगी, और यह भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को भी सुधार सकता है।


वैवाहिक बलात्कार की शिकायत कैसे करें?

वैवाहिक बलात्कार को भारत में अभी अपराध नहीं माना जाता है लेकिन अगर किसी महिला के साथ कोई अन्य व्यक्ति दुष्कर्म करता है तो इस प्रकार से शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।

  • अगर कोई महिला बलात्कार की शिकार होती है, तो सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
  • देश के हर राज्यों में महिला हेल्पलाइन नंबर होते हैं, जहां आप  फोन पर भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती है।
  • इसके अलावा राष्ट्रीय महिला आयोग या महिला सेल में भी आप अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
  • कई राज्यों में पुलिस या आयोग की वेबसाइट पर जाकर शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
  • जब आप पुलिस में शिकायत दर्ज कराती हैं, तो एक मेडिकल रिपोर्ट बनवाने की सलाह दी जाती है।
  • पुलिस से सुरक्षा की मांग करें ताकि आरोपी से आपकी रक्षा हो सके।
  • किसी महिला संगठन या NGO से भी मदद ले सकती हैं, जो आपको कानूनी और मानसिक सहायता प्रदान करेंगे।
  • ऐसे मामलों में वकील से सलाह लेकर सही कानूनी सहायता लेना बहुत जरुरी होता है इसलिए एक अच्छे वकील से सहायता ले।  


वैवाहिक बलात्कार को रोकने के उपाय

  • वैवाहिक दुष्कर्म के बारे में समाज में जागरूकता फैलाना आवश्यक है। लोगों को यह समझाना होगा कि यह एक अपराध है और पीड़ित महिलाओं को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।
  • स्कूली बच्चों और कॉलेज के छात्रों को लैंगिक समानता और सम्मान के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। उन्हें यह समझाना होगा कि सहमति (Consent) क्या होती है और बिना सहमति के शारीरिक संबंध बनाना एक अपराध है।
  • मीडिया को इस वैवाहिक दुष्कर्म के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाले कार्यक्रम और अभियान चलाने चाहिए।
  • वैवाहिक दुष्कर्म के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाना चाहिए। पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाना चाहिए।
  • पीड़ित महिलाओं को मानसिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए ताकि वे इस दर्दनाक अनुभव से बाहर निकल सकें।
 

अगर आपके या किसी जानने वाले के साथ शादी के बाद ज़बरदस्ती या यौन हिंसा हुई है, तो चुप मत रहें। अपने अधिकार जानने और कानूनी कार्रवाई के लिए अभी भारत के अनुभवी वकीलों से बात करे।



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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


क्या भारत में वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध माना गया है?

आज के समय भारत में पति द्वारा पत्नी से ज़बरदस्ती यौन संबंध बनाना सीधा "बलात्कार" (Rape) की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन अगर पत्नी की उम्र 15 साल से कम है, तो वो मामला बलात्कार के अंतर्गत माना जाता है।



वैवाहिक दुष्कर्म क्या होता है?

जब पति अपनी पत्नी की इच्छा के बिना, ज़बरदस्ती यौन संबंध बनाता है, तो उसे वैवाहिक दुष्कर्म (Marital Rape) कहा जाता है।



अगर पति पत्नी की सहमति के बिना वीडियो या फोटो लेता है तो क्या ये अपराध है?

हाँ, बिल्कुल। अगर पति बिना पत्नी की अनुमति के अश्लील वीडियो या फोटो बनाता है या उन्हें शेयर करने की धमकी देता है, तो उस पर आईटी एक्ट की धारा 66E और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है।



क्या पति पत्नी की मर्ज़ी के बिना यौन संबंध बना सकता है?

नहीं, शादी का रिश्ता भरोसे और इज़्ज़त पर आधारित होता है, न कि जबरदस्ती पर। इसलिए पत्नी की सहमति हर बार ज़रूरी है। अगर महिला “ना” कहती है, तो पति द्वारा ज़बरदस्ती सेक्स करना यौन हिंसा है और ये मानसिक उत्पीड़न के साथ घरेलू हिंसा के दायरे में भी आता है।



अगर पति ज़बरदस्ती करे तो पत्नी क्या कर सकती है?

पत्नी पति के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत कर सकती है, पुलिस में रिपोर्ट कर सकती है और कोर्ट से सुरक्षा, रहने का अधिकार और खर्च की मांग कर सकती है।



क्या वैवाहिक दुष्कर्म में सजा हो सकती है?

ऐसे मामलो में सीधे “रेप” की तरह सजा नहीं होती, लेकिन अगर मारपीट, धमकी या जबरदस्ती साबित हो जाए, तो अन्य धाराओं के तहत जेल और जुर्माना हो सकता है। यह सजा केस की गंभीरता और सबूतों पर निर्भर करती है।