हम जमीन 2014 खरीदी माँ नाम रजिस्ट्रेशन क


सवाल

हम ने जमीन 2014 में खरीदी थी जो अपनी माँ के नाम रजिस्ट्रेशन करवाया था अब माँ की मृत्यु हो चुकी है हम कुल पांच भाई बहन है हमारी दोनों बहनों की शादी 2002 में हो चुकी थी अब दोनों बहन उस जमीन में हिस्सा माँग रही है क्या करें ?

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आपकी स्थिति में दोनों बहनों का भूमि में हिस्सा माँगना कानूनी रूप से पूर्णतः उचित है, क्योंकि हिंदू उत्तराधिकार कानून के अनुसार, मृत्यु के बाद माता-पिता की संपत्ति पर सभी संतानों का समान अधिकार होता है, चाहे उनका विवाह हो चुका हो या नहीं। चूँकि आपने यह भूमि अपनी माँ के नाम पर पंजीकृत कराई थी, इसलिए कानूनी दृष्टि से वह भूमि आपकी माँ की निजी संपत्ति थी। माँ के निधन के बाद, कुल पाँच भाई-बहनों में से प्रत्येक का इस संपत्ति में बराबर का अधिकार बन जाता है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य है कि बहनों का विवाह सन दो हजार दो में हो चुका था, जो भूमि खरीदने के समय से बहुत पहले की बात है, लेकिन हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के अंतर्गत विवाहित बेटियाँ भी अपनी माता की संपत्ति की पूर्ण उत्तराधिकारी होती हैं। इसलिए, उनका हिस्सा माँगना बिल्कुल उनका वैधानिक अधिकार है, और आप इससे इनकार नहीं कर सकते।

अब आपके सामने प्रश्न यह है कि आगे क्या करना चाहिए। सबसे उचित और कानूनसम्मत कदम यह होगा कि आप अपने तीनों भाइयों और दोनों बहनों के साथ मिलकर पारिवारिक स्तर पर इस मामले को सुलझाने का प्रयास करें। आप आपसी सहमति से भूमि का बंटवारा कर सकते हैं। यदि भौतिक रूप से भूमि का बंटवारा संभव हो, तो खसरा-खतौनी में पाँचों भाई-बहनों के नाम अलग-अलग पैंती कराकर उनका पृथक अधिकार दर्ज करा दें। यदि भूमि छोटी है या बंटवारा संभव नहीं है, तो सभी पाँचों भाई-बहन आपसी सहमति से उस भूमि को बेचकर प्राप्त राशि को आपस में बराबर-बराबर बाँट सकते हैं, या फिर तीन भाई संयुक्त रूप से दोनों बहनों को उनके हिस्से के बराबर नकद राशि या कोई अन्य संपत्ति देकर उनका अधिकार खरीद सकते हैं।

यदि परिवार में आपसी सहमति नहीं बन पाती, तो आपको कानूनी रास्ता अपनाना होगा। इसके लिए तहसील में बंटवारे का आवेदन देना होता है, जहाँ राजस्व अधिकारी सभी पक्षों को बुलाकर बंटवारा करते हैं। यदि बहनें अदालत का सहारा लें, तो उन्हें अपना हिस्सा मिलेगा ही, साथ ही मुकदमे की लंबी अवधि और खर्च आप सभी भाइयों को उठाना पड़ेगा। इसलिए, कानूनी लड़ाई से बचना ही आपके हित में है। आप सभी मिलकर एक स्थानीय पंचायत या सम्मानित व्यक्ति को मध्यस्थ बनाकर रिश्तों को बचाते हुए मामले को सुलझा सकते हैं। यह याद रखें, बहनों का हिस्सा उनका अधिकार है, उसे देने से इनकार करना कानून की दृष्टि में अपराध होगा, इसलिए पारिवारिक सौहार्द बनाए रखते हुए उचित बंटवारा करना ही सर्वोत्तम विकल्प है।


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