डिफॉल्ट से खारिज हुए सिविल मुकदमे को दोबारा दायर कर सकते हैं या नहीं?


सवाल

मेरा सिविल केस जिसमें मैंने स्थायी और अनिवार्य निषेधाज्ञा (Permanent & Mandatory Injunction) मांगी थी, कोर्ट ने डिफॉल्ट के चलते खारिज कर दिया था। बाद में मैंने O9R9 के तहत केस को बहाल करने की अर्जी डाली, लेकिन वह भी ADJ और दिल्ली हाईकोर्ट से गैर-अभियोजन (non-prosecution) के कारण खारिज हो गई। बचाव पक्ष ने लिखित बयान (WS) दायर नहीं किया था। क्या मैं अब नया सिविल मुकदमा दायर कर सकता हूँ? मुझे सलाह दें।"

उत्तर (3)


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हां, कुछ शर्तों के साथ आप फिर से नया केस दायर कर सकते हैं।

अगर आपका पिछला मुकदमा केवल डिफॉल्ट या गैर-अभियोजन (non-prosecution) के आधार पर खारिज हुआ है और कोर्ट ने उस मामले में विवाद की मैरिट पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया था, तो भारतीय सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के तहत एक नया केस दायर करना संभव है।

दोबारा केस दर्ज करने के लिए आपको ये बातें ध्यान में रखनी चाहिए:

मुद्दा वही होना चाहिए जो पहले वाले मुकदमे में था (जैसे जमीन पर कब्जा रोकने की मांग)।

आपको पिछली गलती का ठोस कारण बताना होगा, कि पिछली बार कोर्ट में पेश क्यों नहीं हो पाए।

नया मुकदमा दायर करते समय यह ज़रूरी है कि पहले केस का उल्लेख करें, ताकि कोर्ट को पूरा संदर्भ मालूम हो।

143 votes

नया मुकदमा रिस जुडिकाटा के सिद्धांत द्वारा रोक दिया जाएगा, आपको सलाह दी जाती है कि आप सिविल जज के समक्ष पिछले मुकदमे को पुनर्जीवित करने के लिए आवेदन दायर करें, देरी की माफी महत्वपूर्ण कारक होगी। देरी माफ होगी या नहीं।


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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


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