क्या कमीशन की कार्रवाई को रोकने के बाद भी अदालत से स्टे मिल सकता है


सवाल

मेरी आबादी की जमीन है जिसमें मैं अपने पूर्वजों के समय से रह रहा हूँ। कोर्ट ने आदेश 39 नियम 7 के तहत अमीन को मौके की स्थिति देखने के लिए भेजा था। जब अमीन साहब आए, तो विपक्षी पार्टी के लोग भी हमारे घर के अंदर आने लगे, जिसे हमने मना कर दिया और वे चले गए। अमीन साहब ने कोर्ट में लिख दिया है कि हमने विपक्षी को अंदर नहीं आने दिया और कमीशन पूरा नहीं हो सका। क्या इस स्थिति में भी हमें अदालत से स्टे मिल सकता है?

उत्तर (2)


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मौके पर कमीशन (Court Commission) की कार्रवाई को रोकना आपके कानूनी मामले और स्टे (Stay Order) की मांग को कमजोर कर सकता है।

आदेश 39 नियम 7 के तहत जब अदालत अमीन या कमिश्नर को भेजती है, तो उनका मुख्य काम मौके की सही स्थिति की रिपोर्ट कोर्ट को देना होता है। कानून के अनुसार, कमीशन की कार्रवाई वादी और प्रतिवादी (दोनों पक्षों) की मौजूदगी में ही होनी चाहिए। विपक्षी पार्टी का अमीन के साथ आना उनका कानूनी अधिकार है ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि रिपोर्ट निष्पक्ष है।

अदालत को जब तक अमीन की रिपोर्ट के जरिए यह पता नहीं चलेगा कि जमीन पर मौजूदा कब्जा किसका है और वहां क्या स्थिति है, तब तक स्टे मिलना बहुत मुश्किल होता है। अमीन की यह रिपोर्ट कि आपने कार्रवाई में बाधा डाली है, अदालत की नजर में आपके पक्ष को संदिग्ध बना सकती है। स्टे लेने के लिए मौके की स्थिति स्पष्ट होना सबसे पहली शर्त है।

आपको अब निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

1. दोबारा कमीशन की मांग: आप अपने वकील के जरिए अदालत में प्रार्थना पत्र दें कि उस दिन गलतफहमी की वजह से कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई और आप दोबारा कमीशन कराने के लिए तैयार हैं।

2. सहयोग करें: अगली बार जब अमीन आएं, तो विपक्षी को अपनी मौजूदगी में आने दें। इससे यह साबित नहीं होता कि वे जमीन के मालिक हैं, बल्कि यह केवल कोर्ट की एक कानूनी प्रक्रिया है।

3. सबूत पेश करें: आबादी की जमीन पर अपना पुराना कब्जा साबित करने के लिए पुराने बिजली बिल, पंचायत रिकॉर्ड या गवाहों के बयान तैयार रखें।

जब तक कोर्ट के सामने अमीन की रिपोर्ट नहीं जाएगी, तब तक स्टे की अर्जी पर बहस होना और फैसला आना कठिन है। इसलिए प्राथमिकता से कमीशन की कार्रवाई पूरी करवाएं।

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आपके द्वारा अमीन साहब को मौके का निरीक्षण होने देना चाहिए था अदालत का आदेश होता है के अमीन साहब बादी द प्रतिवादी गढ़ की उपस्थिति में कमीशन का निष्पादन करें जिससे मौके की स्थिति न्यायालय के सामने आ सके इसमें प्रतिवादी गढ़ का अमीन के साथ विवादित जगह में आना उनका कानूनी अधिकार था इससे यह साबित नहीं हो जाता है कि प्रति वादी गण ही उपरोक्त जमीन के मालिक हैं बिना कमीशन की रिपोर्ट के स्टे नहीं हो सकता अदालत के सामने मौके की स्थिति आना परम आवश्यक है सबसे पहले आप पक्षकार कमीशन करवाएं उसके बाद ही अदालत आपका स्टेट एप्लीकेशन पर बहस सुनेगी और ज्यादा जानकारी के लिए आप मुझे कॉल कर सकते हैं धन्यवाद


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