मेरे पास संपत्ति का कब्जा है। लेकिन मेरे नाम पर नहीं। मुझे क्या करना चाहिए


सवाल

संपत्ति मेरे पास है लेकिन वह मेरे नाम पर दर्ज नहीं है। यह करोल बाग की एक व्यावसायिक फ्रीहोल्ड संपत्ति है जिसे 1990 में खरीदा गया था। मेरे पास संपत्ति का कब्जा है और बिजली का मीटर तथा टेलीफोन बिल भी मेरे नाम पर हैं, लेकिन रजिस्ट्री अभी भी पुराने विक्रेता के नाम पर ही है। विक्रेता इसे मेरे नाम करने का भरोसा तो देता है, लेकिन मुझे डर है कि वह अंत में मुकर सकता है। मेरे पास संपत्ति के सभी दस्तावेज भी मौजूद नहीं हैं। ऐसी स्थिति में मुझे अपना मालिकाना हक पाने के लिए क्या करना चाहिए?

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आपकी स्थिति में सबसे पहला कदम यह है कि आप घबराएं नहीं, क्योंकि संपत्ति का भौतिक कब्जा (Physical Possession) आपके पास है और आप लंबे समय से वहां रह रहे हैं। कानून में ऐसे प्रावधान हैं जिनका उपयोग करके आप कागजी तौर पर भी मालिक बन सकते हैं। इसके लिए आप अदालत के माध्यम से दो मुख्य कानूनी रास्तों का उपयोग कर सकते हैं।

पहला विकल्प यह है कि आप विक्रेता के खिलाफ विशिष्ट प्रदर्शन का मुकदमा (Suit for Specific Performance) दायर करें। चूंकि आपके और विक्रेता के बीच सौदा हुआ था और आपने अपनी ओर से जिम्मेदारी पूरी की है, इसलिए आप अदालत से मांग कर सकते हैं कि वह विक्रेता को बिक्री विलेख (Sale Deed) निष्पादित करने का आदेश दे। भले ही आपके पास लिखित समझौता न हो, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों के अनुसार मौखिक समझौता भी मान्य है। आपको बस यह साबित करना होगा कि आपके बीच लेन-देन तय हुआ था और कब्जा इसी आधार पर आपको मिला था।

दूसरा विकल्प प्रतिकूल कब्जा (Adverse Possession) के आधार पर मालिकाना हक का दावा करना है। भारतीय कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति पर 12 वर्षों से अधिक समय से बिना किसी रोक-टोक और खुले तौर पर कब्जा जमाए बैठा है, तो वह अदालत से मालिकाना हक की घोषणा (Declaration of Title) की मांग कर सकता है। आपके पास 1990 से कब्जा है, जो कि कानून द्वारा निर्धारित 12 वर्ष की अवधि से कहीं अधिक है।

अदालत में अपना पक्ष मजबूत करने के लिए आपको यह दिखाना होगा कि आप किस तारीख से वहां रह रहे हैं, आपके कब्जे की प्रकृति क्या थी और क्या असली मालिक को इसकी जानकारी थी। आपके नाम पर मौजूद बिजली के बिल और टेलीफोन बिल इस मामले में बहुत मजबूत सबूत के रूप में काम करेंगे। जैसे ही अदालत आपके पक्ष में डिक्री (Decree) पारित कर देगी, आप उस संपत्ति के कानूनी रूप से पंजीकृत मालिक बन जाएंगे।


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