मेरे नानाजी बड़े भाई मोतीलालजी लाओलाद


सवाल

मेरे नानाजी के बड़े भाई मोतीलालजी जो कि लाओलाद थे. उन्होंने अपने जीते जी रजिस्टर्ड वसीयत द्वारा मुझे अपना वारिस लिखा था . २००१ उनकी मृत्यु के बाद मैं नाबालिग़ होने के कारण वसीयत लागु नहीं करवा पाया .२००१ में उनकी समस्त कृषि भूमि उनकी पत्नी धापू बाई के नाम हो गयी . अब उनकी पत्नी कि मृत्यु हो चुकी है. धापू बाई के अन्य देवर एवं ननद कृषि भूमि को अपने नाम करवाना चाहते हे. क्या वह भूमि मेरे नाम हो सकती है.

उत्तर (2)


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यदि वसीयत रजिस्टर्ड है और विधिवत बनी है, तो आप वसीयत के आधार पर उत्तराधिकार का दावा कर सकते हैं।
2. चूंकि आप नाबालिग थे, उस समय आपकी ओर से अभिभावक वसीयत लागू नहीं करवा पाए, लेकिन अब वसीयत की वैधता खत्म नहीं होती, आप अब भी डिक्लेरेटरी सूट या म्यूटेशन अपील दायर कर सकते हैं।
3. आपको राजस्व रिकॉर्ड और नामांतरण आदेश की प्रतियां (2004 की) लेकर देखना होगा कि भूमि कैसे और किस आधार पर पत्नी के नाम हुई।
4. यदि यह ट्रांसफर “उत्तराधिकार” के आधार पर हुआ है और वसीयत कोर्ट में कभी चुनौती नहीं दी गई, तो आपके पास सिविल कोर्ट में दावा करने का अधिकार है।
5. आप संबंधित तहसील या सिविल न्यायालय में वसीयत के प्रवर्तन और नामांतरण सुधार हेतु वाद दायर करें।


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