में मकान रहता हूँ पिताजी वो 127 दादाजी ख


सवाल

में जिस मकान में रहता हूँ पिताजी के साथ वो 1927 में दादाजी ने खरीदा था उस दादा जी के एक भाई और था साथ ही रहते थे दादाजी का इंतकाल 1943 में हो गया हमारे पुश्तैनी गाव में दादाजी के भाई ने मेरी दादी और पिताजी को उस वक्त हालात के हिसाब से मेरी दादी के पीहर भेज दिया मेरे पिताजी उस समय 6 साल के थे दादाजी ने जो मकान लिया था वो दादाजी के ससुराल में ही था लेकिन उसके कागजात मेरे दादाजी के पास ही थे लेकिन अब सब चले गए सिर्फ दादाजी के भाई के पोते है मेरे पिताजी भी है उनकी उम्र 84 साल हो गई मकान के कागजात मेरे दादाजी के पोतो के पास है वो मेरे पिताजी के मरने का इंतजार कर रहे है बाद में हिस्सा लेंगे मुझे क्या करना चाहिए जबकि पापा ने 1951 के बाद से नगर परिषद में मकान अपने नाम लिखवा रखा है

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आपको डिक्लेरेशन ऑफ टाइटल का केस जूरिडिक्शन वाले कोर्ट में करना होगा एक बार आप का टाइटल डिक्लेअर हो जाएगा डिक्री के हिसाब से दाखिल खारिज करा के प्रॉपर्टी अपने नाम करा सकते हैं पूरी प्रक्रिया के बारे में मैं आपको डिटेल मैं ऑफिस में बता पाऊंगा


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