मुस्लिम कानून के तहत अविवाहित पुरुष की संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है


सवाल

यदि एक मुस्लिम पुरुष की मृत्यु अविवाहित और निर्वसीयत (Intestate) स्थिति में हो जाती है, तो मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत उसकी संपत्ति के वितरण का सटीक क्रम क्या होगा? विशेष रूप से, 'शारद' (Sharers) और 'अवशिष्ट' (Residuaries) की श्रेणी के तहत उसके माता-पिता और भाई-बहनों के बीच संपत्ति का हिस्सा किस अनुपात में विभाजित किया जाएगा, और क्या सगे भाई-बहनों की उपस्थिति में सौतेले भाई-बहनों का संपत्ति पर कोई अधिकार रह जाता है?

उत्तर (2)


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मुस्लिम उत्तराधिकार कानून में वारिसों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है: हिस्सेदार (Sharers) और अवशेषी (Residuaries)। हिस्सेदार वे होते हैं जिनका हिस्सा कुरान में निश्चित किया गया है, जबकि अवशेषी वे होते हैं जिन्हें हिस्सेदारों का भाग देने के बाद बची हुई संपत्ति मिलती है।

अविवाहित पुरुष के मामले में उत्तराधिकार का क्रम कुछ इस प्रकार होगा:

१. माता-पिता का अधिकार: यदि मृतक के माता-पिता जीवित हैं, तो पिता और माता दोनों हिस्सेदार (Sharers) होते हैं। आमतौर पर, माता को कुल संपत्ति का १/३ (एक-तिहाई) हिस्सा मिलता है और पिता को अवशेषी (Residuary) के रूप में बाकी संपत्ति मिलती है। यदि मृतक के भाई-बहन भी जीवित हैं, तो माता का हिस्सा घटकर १/६ (एक-छठा) हो सकता है।

२. भाई और बहन का हिस्सा: यदि माता-पिता जीवित नहीं हैं, तो संपत्ति भाई और बहनों के बीच बांटी जाती है। मुस्लिम कानून का एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि पैतृक संपत्ति में भाई को बहन की तुलना में दोगुना हिस्सा (Double Share) मिलता है। यानी अगर एक भाई और एक बहन हैं, तो संपत्ति के तीन हिस्से होंगे जिसमें से दो भाई को और एक बहन को मिलेगा।

३. दूर के रिश्तेदार: यदि माता-पिता, भाई-बहन या उनके बच्चे (भतीजे/भांजी) भी जीवित नहीं हैं, तो संपत्ति दादा-दादी या फिर चचेरे भाई-बहनों (Distant Kindred) की ओर जाती है। मुस्लिम कानून यह सुनिश्चित करता है कि संपत्ति रक्त संबंधों के भीतर ही रहे।

४. वसीयत की सीमा: याद रखें कि एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी कुल संपत्ति का केवल १/३ (एक-तिहाई) हिस्सा ही वसीयत के माध्यम से किसी ऐसे व्यक्ति को दे सकता है जो उसका कानूनी वारिस नहीं है। बाकी २/३ हिस्सा अनिवार्य रूप से ऊपर बताए गए कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच ही बंटता है।

मेरी सलाह है कि संपत्ति के सटीक बंटवारे के लिए आप एक स्थानीय वक्फ बोर्ड या मुस्लिम कानून के विशेषज्ञ वकील से संपर्क करें, क्योंकि परिवार के सदस्यों की संख्या के आधार पर हिस्सों का गणित (Calculation) बदल सकता है।

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मुस्लिम कानून दो प्रकार के उत्तराधिकारियों, हिस्सेदारों और अवशेषों को मान्यता देता है। हिस्सेदार वे व्यक्ति होते हैं जो मृतक की संपत्ति में कुछ शेयरों के हकदार होते हैं और अवशेष संपत्ति में हिस्सा लेते हैं जो कि हिस्सेदारों द्वारा अपना हिस्सा लेने के बाद बच जाता है। हिस्सेदारों की संख्या 12 होती है और वे इस प्रकार हैं: (1) पति, (2) पत्नी, (3) पुत्री, (4) पुत्र की पुत्री (या पुत्र का पुत्र या पुत्र का पुत्र इत्यादि), (5) पिता, (6) दादा, (7) माता, (8) पुरुष वंश की दादी, (9) सगी बहन (10) सगोत्र बहन (11) गर्भाशय बहन, और (12) गर्भाशय भाई। प्रत्येक हिस्सेदार द्वारा लिया गया हिस्सा कुछ स्थितियों में अलग-अलग होगा। उदाहरण के लिए, एक पत्नी एक ऐसे मामले में 1/4 हिस्सा लेती है जहां युगल बिना वंश के वंशज हैं, और एक-आठवां हिस्सा अन्यथा। एक पति (पत्नी की संपत्ति के उत्तराधिकार के मामले में) एक ऐसे मामले में आधा हिस्सा लेता है जहां युगल बिना वंश के वंशज हैं, और एक चौथाई हिस्सा अन्यथा। एक अकेली बेटी आधा हिस्सा लेती है। जहां मृतक अपने पीछे एक से अधिक पुत्रियां छोड़ गया हो, वहां सभी पुत्रियां संयुक्त रूप से दो-तिहाई लेती हैं। यदि मृतक अपने पीछे बेटे और बेटियों को छोड़ गया है, तो बेटियां हिस्सेदार नहीं रह जाती हैं और इसके बजाय अवशेष बन जाती हैं, साथ ही अवशेषों को इस तरह वितरित किया जाता है कि प्रत्येक बेटे को प्रत्येक बेटी को जो मिलता है उसका दोगुना मिलता है। आपके मामले में क्रम संख्या 1 से 4 लागू नहीं है।


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