बिना बंटवारे के हिस्सेदार ने अपने हिस्से से ज्यादा जमीन बेच दी क्या बची हुई जमीन में उसे हिस्सा मिलेगा


सवाल

पहले पुराना नक्शा में एक ही नक्शा और खतियान था सर्वे के बाद वह जमीन का दो नक्शा बन गया उस जमीन का कोई बटवारा पेपर नहीं है उस में से दूसरा आदमी एक खतियान से जितना हिस्सा हो रहा था उस से अधिक बेच लिया क्या मौखिक कर के और निज दर्शा दिया क्या उस आदमी का दूसरा खतियान में हिस्सा होगा

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आपके प्रश्न का सीधा उत्तर यह है कि केवल मौखिक बातचीत और निजी तौर पर दिखाने मात्र से उस आदमी का दूसरे खतियान में कोई कानूनी हिस्सा नहीं बन जाता। जमीन से संबंधित किसी भी प्रकार का लेन-देन पूर्णतः दस्तावेजी और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड पर आधारित होता है। आपके मामले में दो नक्शे और खतियान हैं, जो सर्वे के बाद बने हैं, लेकिन उन दोनों के बीच कोई आधिकारिक बंटवारा पेपर (जैसे आपसी सहमति या न्यायालय का बंटवारा डिक्री) मौजूद नहीं है। कानून की दृष्टि से, जब तक औपचारिक बंटवारा दर्ज नहीं होता, तब तक दोनों खतियानों में प्रत्येक सह-मालिक का समान अधिकार या मूल अधिकार बना रहता है।

यदि दूसरा आदमी अपने मूल खतियान में जितना हिस्सा उसे वाजिब तौर पर मिलता है, उससे अधिक जमीन बेच देता है, तो उसका यह कार्य पूर्णतः अवैध और अमान्य होगा। कोई भी व्यक्ति अपने स्वामित्व से अधिक की जमीन का हस्तांतरण नहीं कर सकता। मौखिक बयान या निजी तौर पर जमीन दिखाना, रजिस्ट्रेशन अधिनियम के तहत अचल संपत्ति के हस्तांतरण के लिए वैध साक्ष्य नहीं माना जाता। जमीन का विक्रय तभी कानूनी रूप से मान्य होता है, जब उसका पंजीकरण उचित रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री विल के माध्यम से होता है और उसमें बेची गई जमीन का नक्शा व खसरा स्पष्ट रूप से उल्लिखित होता है। चूंकि बंटवारा पेपर मौजूद नहीं है, इसलिए प्रत्येक खतियान के खसरा नंबरों को कुल भूमि के रूप में देखा जाएगा। ऐसी स्थिति में, यदि खरीददार सिर्फ दिखाई गई जमीन पर भरोसा करके रजिस्ट्री कर लेता है, और बाद में पता चलता है कि उसका क्षेत्रफल विक्रेता के उचित हिस्से से अधिक है, तो वह रजिस्ट्री अधिकतम उचित हिस्से तक ही मान्य होगी, बाकी बेची गई जमीन का अधिकार अमान्य हो जाएगा। खरीददार केवल उसी हद तक स्वामित्व प्राप्त कर सकेगा, जितना भूमि विक्रेता को वास्तव में अधिकार था। शेष बचा हुआ अधिकार अन्य सह-मालिकों का ही रहेगा। इसलिए, बिना लिखित बंटवारे के, बिना नक्शे की सीमा स्पष्ट किए, केवल मौखिक दिखावे पर बेचना कानूनी रूप से बहुत जोखिमपूर्ण है और उसका कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं होता। अतः उस आदमी का उस अतिरिक्त भूमि पर कोई कानूनी हिस्सा स्थापित नहीं होता।


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