पति की मौत के बाद बेटे खर्चा नहीं दे रहे उन्हें बेदखल कैसे करूं
सवाल
उत्तर (2)
मीरा जी, आपके बेटों का यह बर्ताव बहुत ही गलत है। लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, कानून पूरी तरह से आपके साथ है। आप इन कानूनी तरीकों से अपनी परेशानी हल कर सकती हैं:
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बैंक के पैसों के लिए (सक्सेशन सर्टिफिकेट): अगर बेटे बैंक के कागजों पर साइन नहीं कर रहे हैं, तो आप सीधे कोर्ट में 'सक्सेशन सर्टिफिकेट' (उत्तराधिकार प्रमाण पत्र) की अर्जी लगा सकती हैं। कोर्ट का ऑर्डर मिलते ही बैंक बिना बेटों के साइन के आपको पैसा दे देगा।
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खर्चे के लिए एसडीएम को शिकायत: अगर आपकी उम्र 60 साल या उससे ज्यादा है, तो 'सीनियर सिटीजन एक्ट' के तहत आप एसडीएम को शिकायत कर सकती हैं। एसडीएम आपके बेटों को आपको हर महीने पक्का खर्चा देने का ऑर्डर देगा।
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बेदखल कैसे करें: बेटों को बेदखल करने के लिए सबसे पहले एक वकील के जरिए अखबार में नोटिस छपवाएं कि आपका उन बेटों से और उनके किसी भी लेन-देन से कोई मतलब नहीं है।
बेटों की मनमानी बिल्कुल नहीं चलेगी। आप सबसे पहले बैंक का पैसा निकालने के लिए कोर्ट में अर्जी लगाएं और एसडीएम के पास खर्चे की शिकायत दर्ज कराएं। इसमें आप हमारी कानूनी मदद ले सकती हैं।
आपकी पीड़ा अत्यंत स्पष्ट और मार्मिक है। तीन वर्ष पूर्व पति का असामयिक निधन, उस पर पुत्रियों के विवाह का दबाव, और पुत्रों का उपेक्षापूर्ण व्यवहार—यह सब मिलकर किसी भी माता के लिए असहनीय होता है। पति की मृत्यु के समय छोटी पुत्री का विवाह निकट था, फिर भी दोनों पुत्रों ने न तो आर्थिक सहायता दी और न ही संवेदना प्रकट की। पति की तेरहवीं में बड़ा पुत्र कर्मकांड के लिए उपस्थित नहीं हुआ और न ही धन दिया, जो परंपरा और कर्तव्य दोनों के विपरीत है। बड़े पुत्र के स्वयं के विवाह के बाद उन्होंने आपको जीवन-यापन के लिए कोई धन नहीं दिया। सबसे कठिन बात यह है कि पति के बैंक खाते में धन होने के बावजूद आप स्वयं उसे निकाल नहीं पा रहीं क्योंकि पुत्र सह-हस्ताक्षरकर्ता होने के कारण सहयोग नहीं कर रहा है। ऐसे में पुत्रों को बेदखल करने का आपका मन बनना स्वाभाविक है। परंतु विधि-विज्ञान की दृष्टि से देखें तो पुत्रों को घर से निकालना उतना सरल नहीं है। यदि घर आपके नाम पर है और आप स्वयं मालिकाना अधिकार रखती हैं, तो आप कानूनी तरीके से उन्हें बाहर जाने का नोटिस दे सकती हैं, परंतु उसके लिए बहुत समय और कानूनी प्रक्रिया चाहिए होती है। पति की संपत्ति में आपका उत्तराधिकार है, परंतु बैंक खाते से धन निकालने के लिए आपको नोटरीकृत शपथ-पत्र और उत्तराधिकार प्रमाणपत्र की आवश्यकता होगी। यदि पुत्र मार्ग में बाधक बन रहा है, तो आप वकील की सहायता से बैंक को अधिसूचित कर सकती हैं। विवाह के लिए उधार की बात करें तो मुख्यतः धन की आवश्यकता है, परंतु पुत्रों को बेदखल करने से उस उधार की समस्या हल नहीं होगी, बल्कि कानूनी झंझट और अधिक बढ़ेगी। आपको पुत्रों के साथ किसी परिवार परामर्शदाता या गणमान्य व्यक्ति के माध्यम से संवाद करना चाहिए। उन्हें समझाएँ कि आपकी यह भावनात्मक और वित्तीय आवश्यकता उनके कर्तव्य से जुड़ी है। यदि वे नहीं समझते, तो पहले बैंक खाते के लिए कानूनी रास्ता अपनाएँ और फिर उत्तराधिकार अधिकारों के अनुसार आपके हिस्से का धन प्राप्त करें। क्रोध में आकर बेदखली की नोटिस भेजने से संबंध तो टूटेंगे ही, पर उधार चुकाने का रास्ता सुलभ नहीं होगा। पहले मध्यस्थता करें, फिर कानूनी कदम उठाएँ, क्योंकि आपका लक्ष्य उधार चुकाना है, पुत्रों को दंड देना नहीं। आपके पति की स्मृति और आपकी ममता का सम्मान होना चाहिए, और उसके लिए धैर्यपूर्वक कानून की मर्यादा में रहना आवश्यक है।
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