ज़मीन के बँटवारे के लिए धारा 116 की कानूनी कार्रवाई को कैसे रोकें


सवाल

हमारी सड़क के किनारे ज़मीन है जिस पर हम बाउंड्री करवा रहे हैं। इस ज़मीन पर दूसरे पक्ष का भी कब्ज़ा है। इस बीच, दूसरे पक्ष ने ज़मीन के बँटवारे से संबंधित धारा 116 की कार्रवाई लगा दी है। कृपया बताएं कि क्या इस ज़मीन का बँटवारा हो सकता है और हम इस धारा 116 की कार्रवाई को रोकने के लिए क्या कदम उठाएँ?

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हाँ, ज़मीन का बँटवारा (Partition) ज़रूर हो सकता है, खासकर जब ज़मीन पर दो पक्षों का कब्ज़ा हो। लेकिन आपको दूसरे पक्ष द्वारा शुरू की गई धारा 116 की कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से सामना करना होगा।

1. बँटवारा (Partition) हो सकता है

अगर यह ज़मीन आपकी और दूसरे पक्ष की संयुक्त संपत्ति (Joint Property) है, यानी आप दोनों इस ज़मीन के मालिक हैं, तो कानून आपको बँटवारा करवाने का पूरा अधिकार देता है। सड़क किनारे वाली ज़मीन बहुत कीमती होती है। बँटवारे के दौरान यह ध्यान रखा जाता है कि दोनों हिस्सेदारों को उसका उचित हिस्सा मिले। इसके लिए आपको दीवानी अदालत (Civil Court) या राजस्व कार्यालय (Revenue Office) में बँटवारे का मुकदमा (Partition Suit) दायर करना होगा।

2. धारा 116 को रोकने या सामना करने के लिए क्या करें

धारा 116 आमतौर पर भूमि राजस्व संहिता (Land Revenue Code) से जुड़ी होती है। इसका इस्तेमाल ज़मीन के रिकॉर्ड या सीमा विवाद से जुड़े मामलों में होता है।

  • जवाब दाखिल करें: धारा 116 की कार्रवाई को रोकने का सबसे पहला और ज़रूरी काम यह है कि आप उस अधिकारी के सामने अपना लिखित जवाब (File a Reply) दाखिल करें जिसने आपको नोटिस भेजा है।

  • कागज़ात पेश करें: अपने जवाब के साथ ज़मीन से संबंधित सभी ज़रूरी कानूनी दस्तावेज़ (Documents) तुरंत लगाएँ। इसमें खसरा-खतौनी, ज़मीन की रजिस्ट्री के पुराने कागज़ात और इस बात का सबूत शामिल करें कि ज़मीन पर आपका भी वैध कब्ज़ा (Legal Possession) और अधिकार है।

  • बाउंड्री का दावा: आप अपनी बाउंड्री बनवाने का ज़िक्र करें और यह साबित करें कि सड़क किनारे की ज़मीन पर आपका कितना हिस्सा है।

  • सिविल कोर्ट का रास्ता: अगर राजस्व कार्यालय में आपकी बात नहीं सुनी जा रही है या वहाँ की कार्रवाई आपके पक्ष में नहीं है, तो आप तुरंत दीवानी अदालत (Civil Court) में जाकर बँटवारे का मुकदमा दायर कर सकते हैं। दीवानी अदालत का निर्णय राजस्व अदालत के निर्णय से ऊपर माना जाता है। अक्सर, दीवानी कोर्ट में मामला जाने पर, राजस्व कोर्ट की धारा 116 वाली कार्रवाई रुक जाती है।

सबसे बेहतर यही होगा कि आप अपने ज़मीन के सारे कागज़ात लेकर एक ऐसे वकील से सलाह लें जो राजस्व और संपत्ति के मामलों में विशेषज्ञ हो। वे आपको सही रास्ता दिखाएँगे।

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बटवारा तो हो सकता है पर उसके लिए आप के दस्तावेज देखना जरूरी है कि आप किन शर्तों पर बंटवारा चाह रहे हैं जमीन आपकी आधिपत्य की है यह सिर्फ आपका अजय सैनी उस जमीन के ऊपर है अनु आपकी पैतृक संपत्ति है आपकी स्व अर्जित संपत्ति है


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