क्या दादा वसीयत के माध्यम से चाचा को संपत्ति हस्तांतरित कर सकते हैं


सवाल

क्या दादाजी अपनी खुद की खरीदी हुई संपत्ति सिर्फ एक बेटे (मेरे चाचा) के नाम वसीयत में कर सकते हैं? क्या बाकी बच्चों या पोतों को कोई हक़ नहीं होगा?

मेरे दादाजी के पास एक मकान है जो उन्होंने 1980 के दशक में खुद खरीदा था। उनके कुल 5 बच्चे हैं – 2 बेटे और 3 बेटियां। एक बेटी (मेरी मौसी) की मृत्यु हो चुकी है, उनके दो बेटे हैं। बाकी दो बेटियां ज़िंदा हैं और उनके भी बच्चे हैं। मेरे चाचा की कोई संतान नहीं है, जबकि मेरे पिता के हम दो बच्चे हैं – मैं और मेरी बहन।

अब दादाजी ने एक वसीयत बनाकर वो पूरी संपत्ति सिर्फ मेरे चाचा को दे दी है, और अब चाचा उस प्रॉपर्टी को किसी और को देने की कोशिश कर रहे हैं। क्या हम इस पर कोई कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं? क्या पोतों या बेटियों को कोई हिस्सा नहीं मिलेगा?

उत्तर (4)


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आपके दादाजी की जो प्रॉपर्टी है, वो पैतृक संपत्ति नहीं बल्कि स्वतः अर्जित (self-acquired) संपत्ति है, यानी उन्होंने उसे खुद के पैसों से खरीदा था। भारतीय कानून के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति अपनी खुद की अर्जित संपत्ति का मालिक होता है और उसे यह पूरा अधिकार होता है कि वह उस संपत्ति को अपनी मर्ज़ी से किसी को भी वसीयत के ज़रिए दे सकता है – चाहे वह बेटा हो, बेटी हो, नाती-पोता या कोई बाहरी व्यक्ति भी।

इसलिए अगर आपके दादाजी ने अपनी मर्जी से वसीयत बनाकर पूरी संपत्ति आपके चाचा को दे दी है, तो कानूनन यह वसीयत वैध मानी जाएगी, जब तक वह सही प्रक्रिया से बनाई गई हो और उस पर किसी प्रकार का दबाव, धोखा या मानसिक कमजोरी का कोई आधार न हो।

अब सवाल आता है कि क्या बाकी बच्चों या पोतों को हिस्सा मिल सकता है? तो जवाब है – नहीं, अगर यह वसीयत वैध तरीके से बनी है और उसमें संपत्ति का पूरा ज़िक्र और वितरण साफ लिखा गया है, तो बाकी बच्चों या पोतों को कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता।

हाँ, एक विकल्प तब हो सकता है जब वसीयत को कोर्ट में चैलेंज किया जाए – जैसे अगर कोई साबित कर दे कि वसीयत धोखे से लिखवाई गई, या दादाजी मानसिक रूप से सक्षम नहीं थे, या किसी ने दबाव डाला। लेकिन ऐसा साबित करना आसान नहीं होता, उसके लिए ठोस सबूत चाहिए।

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आप अपने दादा की वसीयत को चुनौती दे सकते हैं। आपके पास यही एकमात्र विकल्प है। अगर संपत्ति खुद अर्जित की गई है तो वह इसे अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति को वसीयत कर सकते हैं। हालाँकि, आपके चाचा संपत्ति को तब तक हस्तांतरित नहीं कर सकते जब तक कि वह उनके नाम पर न हो, इसलिए अगर आपके दादा अभी भी जीवित हैं, तो अपने चाचा को इसे हस्तांतरित करने से रोकने के लिए मुकदमा दायर करें।

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यदि संबंधित संपत्ति आपके दादाजी ने अपनी कमाई से खरीदी है, तो यह उनकी स्वयं अर्जित संपत्ति है और उन्हें उस संपत्ति को किसी को भी देने का पूरा अधिकार है और ऐसा व्यक्ति उस संपत्ति का पूर्ण स्वामी बन जाएगा और वह बिना किसी बाधा के इसे आगे बेच सकता है। हालाँकि, आप विभिन्न आधारों पर उक्त वसीयत और इसकी वैधता को चुनौती देने का प्रयास कर सकते हैं। इसके लिए आपको जल्द से जल्द एक सिविल मुकदमा दायर करना होगा और अदालत से संपत्ति की बिक्री पर स्थगन आदेश प्राप्त करना होगा क्योंकि यदि संपत्ति एक बार बिक जाती है तो आपको भावी खरीदार को भी पक्ष बनाना होगा और इससे मामला और भी जटिल हो जाएगा।


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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


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