पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज न करने पर ससुराल से स्त्रीधन वापस कैसे लें


सवाल

मेरी बहन अपना स्त्रीधन ससुराल वालों से वापस लेना चाहती है लेकिन पुलिस इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में आनाकानी कर रही है तो ऐसी स्थिति में क्या कानूनी विकल्प मौजूद हैं और बिना पुलिस की सहायता के अदालत के माध्यम से अपना सामान वापस पाने की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर (4)


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हाँ, यदि पुलिस आपकी शिकायत पर प्राथमिकी (First Information Report) दर्ज नहीं कर रही है, तो आप अदालत के माध्यम से अपना स्त्रीधन वापस पा सकती हैं। कानून के अनुसार स्त्रीधन (Stridhan) पर पत्नी का पूर्ण अधिकार होता है और उसे वापस न करना एक कानूनी अपराध है। जब पुलिस सहयोग न करे, तो सबसे प्रभावी विकल्प भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करना है, जिसे पहले सीआरपीसी (CrPC) की धारा 156(3) के नाम से जाना जाता था।

इस कानूनी प्रावधान के तहत, मजिस्ट्रेट पुलिस को तुरंत मामला दर्ज करने और जांच शुरू करने का आदेश दे सकते हैं। इसके अलावा, आप घरेलू हिंसा (Domestic Violence) अधिनियम के तहत भी अदालत में एक आवेदन दायर कर सकती हैं। इस अधिनियम के माध्यम से अदालत ससुराल वालों को स्त्रीधन, जिसमें गहने, कीमती सामान और कपड़े शामिल हैं, तुरंत वापस करने का निर्देश (Direction) जारी कर सकती है।

आपकी बहन को अपने स्त्रीधन की एक विस्तृत सूची (Inventory) तैयार करनी चाहिए। यदि शादी के समय की तस्वीरें या सामान की रसीदें उपलब्ध हैं, तो वे सबूत के तौर पर बहुत काम आती हैं। पुलिस में शिकायत करते समय वरिष्ठ अधिकारियों जैसे पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) को लिखित पत्र भेजें। यदि वहां से भी कार्रवाई नहीं होती है, तभी अदालत का रुख करना सबसे सही कदम है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत स्त्रीधन को अपने पास अवैध रूप से रखना आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) माना जा सकता है। आप एक अनुभवी वकील के माध्यम से ससुराल वालों को कानूनी नोटिस (Legal Notice) भी भेज सकती हैं। अक्सर कानूनी नोटिस मिलने के बाद ससुराल पक्ष अदालती कार्यवाही के डर से सामान वापस करने के लिए सहमत हो जाता है।

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प्रिय पहला कदम स्त्रीधन की वसूली के संबंध में एक पुलिस शिकायत करना है, अगर पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, तो आपके पास सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत अदालत में शिकायत दर्ज करने का एक अन्य विकल्प है।

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अच्छी तरह से आपकी स्थिति में यह सलाह दी जाती है कि यदि पुलिस कार्रवाई करने में विफल रहती है तो मजिस्ट्रेट के साथ घरेलू हिंसा, साथ ही लेख के दुरुपयोग और क्रूरता की आपराधिक शिकायत दर्ज करें।

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प्राथमिकी दर्ज कराने के उद्देश्य से आप उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। आपके पास कई अन्य उपाय भी हैं। प्राथमिकी आसान है और तुरंत राहत मिल सकती है। आप जेएमआईसी के समक्ष शिकायत दर्ज कर सकते हैं और आप सिविल सूट भी दायर कर सकते हैं और इसमें आप शादी के खर्च का भी दावा कर सकते हैं।


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