बेटी की प्रताड़ना खिलाफ माता-पिता क्या कानूनी कदम उठा सकते हैं


सवाल

मेरी 18 साल की बेटी हमें और हमारे 21 साल के बेटे को पिछले 3 साल से परेशान कर रही है। वह धूम्रपान करती है, पैसे के लिए मारपीट करती है और मेरे बेटे पर बलात्कार का झूठा केस दर्ज कराने की धमकी देती है। उसने अपनी मां को इतना पीटा कि वह अस्पताल में भर्ती हैं। पुलिस इसे पारिवारिक मामला कहकर मदद नहीं कर रही है, हम क्या करें?

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नहीं, यह केवल एक पारिवारिक मामला नहीं है; किसी पर जानलेवा हमला करना और झूठे केस में फंसाने की धमकी देना गंभीर अपराध है। यदि पुलिस आपकी बात नहीं सुन रही है, तो आपको कानून के कड़े प्रावधानों का सहारा लेना चाहिए। आपकी पत्नी पर हुआ हमला और बेटे को दी जा रही धमकी कानूनी कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार हैं।

आपको तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

सबसे पहले, आप जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) या पुलिस आयुक्त (CP) को एक लिखित शिकायत भेजें। इसमें अपनी पत्नी के अस्पताल के कागजात और बेटी द्वारा की गई मारपीट व धमकियों का पूरा विवरण दें। यदि स्थानीय पुलिस एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं करती है, तो आप अपने वकील के माध्यम से अदालत में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175 (पुरानी धारा 156(3) CrPC) के तहत आवेदन कर सकते हैं, जिससे कोर्ट पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश देगा।

चूंकि वह आपके बेटे को बलात्कार (Rape) के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दे रही है, इसलिए आपको इस धमकी की शिकायत पहले ही लिखित रूप में पुलिस को दे देनी चाहिए। इसे 'अग्रिम सूचना' के तौर पर दर्ज कराएं ताकि भविष्य में यदि वह ऐसा कोई कदम उठाती है, तो आपके पास अपना बचाव करने के लिए पहले से दर्ज शिकायत मौजूद हो।

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act) के तहत, आप अपनी बेटी को अपने घर से बेदखल (Evict) करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास आवेदन कर सकते हैं। भले ही आपकी उम्र ६० साल न हो, लेकिन यदि कोई बालिग बच्चा अपने माता-पिता को प्रताड़ित करता है और उनके घर पर कब्जा करना चाहता है, तो अदालत उसे घर से निकालने का आदेश दे सकती है।

इसके अलावा, आप अपनी पत्नी की सुरक्षा के लिए 'घरेलू हिंसा अधिनियम' (Domestic Violence Act) के तहत अदालत से सुरक्षा आदेश (Protection Order) भी मांग सकते हैं। इससे कोर्ट आपकी बेटी को आपकी पत्नी के पास आने या उनके साथ मारपीट करने से रोक देगा। अपनी सुरक्षा के लिए घर में सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगवाएं ताकि उसके हिंसक व्यवहार और तोड़फोड़ के सबूत आपके पास रहें।

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जब भी वह हिंसक व्यवहार करे तो 103 पर कॉल करें और प्रत्येक घटना के लिए एक एनसी दर्ज करें, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक को एक विस्तृत शिकायत लिखें और आरपीएडी द्वारा एक स्वीकृत प्रति पुलिस आयुक्त को भेजें। क्या आप चाहते हैं कि वह आपके घर में न रहे? आप वरिष्ठ नागरिक संरक्षण अधिनियम के तहत एक आवेदन के साथ अपने क्षेत्र के जिला कलेक्टर से संपर्क कर सकते हैं, भले ही आपकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक न हो क्योंकि आपकी बेटी की उम्र 18 वर्ष से अधिक है। वैकल्पिक रूप से स्त्री मुक्ति संगठन जैसे एनजीओ से संपर्क करें, जो पारिवारिक समाधान के लिए संयुक्त परामर्श सत्र आयोजित करेगा।


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