अगर पति बिना खर्च दिए अलग रह रहा हो तो क्या कानूनी कदम उठाएं
सवाल
उत्तर (4)
आपके पति का इस तरह आपको और बच्चे को बिना किसी आर्थिक सहारे के छोड़ देना और केवल अपनी मर्जी से कभी-कभी आना, कानूनन गलत है। भले ही आप कामकाजी हैं और अपना खर्च खुद उठा रही हैं, फिर भी आपके पति कानूनी तौर पर आपकी और घर की जरूरतों में हिस्सा देने के लिए बाध्य हैं। आप उनके खिलाफ निम्नलिखित कानूनी कदम उठा सकती हैं:
सबसे पहले आप घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (Domestic Violence Act) के तहत कोर्ट में मामला दर्ज कर सकती हैं। इस कानून के जरिए आप न केवल अपने लिए सुरक्षा की मांग कर सकती हैं, बल्कि कोर्ट से पति को घर का किराया देने या आपको रहने के लिए उचित जगह दिलाने का आदेश (Residence Order) भी मांग सकती हैं।
चूंकि आपके पति ने आपके साथ हाथापाई की है और आपको मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है, इसलिए आप भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 और 86 के तहत क्रूरता (Cruelty) की शिकायत दर्ज करा सकती हैं। यह कानून पुराने आईपीसी की धारा 498ए की जगह आया है।
आप BNSS की धारा 144 के तहत मासिक गुजारा भत्ता (Maintenance) के लिए अर्जी दे सकती हैं। कोर्ट आपकी और आपके पति की आय को देखते हुए यह तय करेगा कि उन्हें हर महीने आपको कितनी राशि देनी चाहिए। आपकी अपनी कमाई होना उन्हें इस जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं करता है।
यदि आप अब इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाना चाहती हैं, तो आप 'क्रूरता' और 'परित्याग' (Desertion) के आधार पर तलाक के लिए कोर्ट में केस फाइल कर सकती हैं। पिछले 2 साल से उनका अलग रहना तलाक के लिए एक मजबूत आधार बनता है।
मेरी सलाह है कि आप सबसे पहले उन्हें एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजें, जिसमें उनसे घर के किराए का अपना हिस्सा देने और अपनी जिम्मेदारियां निभाने को कहें। यदि वे फिर भी नहीं सुधरते, तो आप ऊपर दिए गए कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकती हैं।
सबसे पहले इसका उत्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि आप और आपके पति किस धर्म से संबंध रखते हैं और जिसके तहत आपका विवाह किया गया था। आप अपने धर्म की परवाह किए बिना भरण-पोषण के लिए धारा 125 सीआरपीसी के तहत मामला दर्ज कर सकती हैं और पति द्वारा आपको भुगतान की जाने वाली एक निश्चित राशि की मांग कर सकती हैं। न्यायालय आपके पति की कमाई क्षमता, आपके स्वयं के जीवन स्तर आदि सहित कई कारकों के आधार पर इसे प्रदान कर सकता है। आप वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए मामला दर्ज कर सकते हैं। हिंदू कानून के तहत यह हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत दायर किया जाता है। इस कानून के संबंध में मुस्लिम कानून और अन्य कानूनों की अपनी ख़ासियतें हैं। इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि आप किस धर्म के हैं, ताकि आप उस कानून को समझ सकें जिसके द्वारा आप शासित होंगे,
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
परिवार कानून से संबंधित अन्य प्रश्न
- सर, हमारे दादाजी अलग हैं, गोत्र अलग है और पूरा खानदान अलग है। मेरी दादी और लड़के की दादी सगी बहनें थीं, लेकिन वे अलग-अलग परिवारों में ब्याही गई थीं। क्या हिंदू मैरिज एक्ट (HMA, 1955) के तहत हमारी शादी कानूनी तौर पर वैध (Valid) है?" [HMA, 1955]
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- Ji mera name hiralal hai or mujhe document problem hai main surat Sahar main raheta hu leki main janm Uttar Pradesh main hua hai or vaha par mera name nimar tha lekin surat ke sabhi document main Hiralal hai lekin kheti ke dastavej main nimar hai ise sahi kese karu or abhi sir fom bhi fara ja raha hai or main problem main hu ki kis main aapna name sahi karu sath main papa ka name main bhi problem hai main surat main hi hu or sabhi document main bhi hiralal kada hai liki kheti ka dastavej main nimar hai Please help me