धारा 498ए आईपीसी के तहत मामले में कैसे आगे बढ़ें
सवाल
उत्तर (3)
नमस्कार 1. पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की तारीख से 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य नहीं है। चूंकि आरोपी या एफआईआर में नामित कोई भी न्यायिक रिमांड में नहीं है, वे प्रक्रिया को खींचेंगे और एफआईआर दर्ज होने के 2 साल बाद भी आरोप पत्र दाखिल करने में समय ले सकते हैं। कृपया ध्यान दें कि चार्जशीट अदालत में पुलिस द्वारा तब प्रस्तुत की जाती है जब जांच पूरी तरह से समाप्त हो जाती है। जैसा कि आप महसूस कर रहे हैं कि पुलिस समय में देरी कर रही है और समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर रही है, उसी मजिस्ट्रेट अदालत से संपर्क करें जहां पुलिस ने 498ए की केस फ़ाइल जमा की थी और पुलिस को जांच पूरी करने के निर्देश के लिए एक याचिका दायर करें बिना किसी और देरी के और जल्द से जल्द चार्जशीट पेश करें। 2. आपको 498A की शिकायत उसी जगह से और उसी थाने के अधिकार क्षेत्र में दर्ज करनी होगी जहां हिंसा हुई थी। यदि आप अलग-अलग थाने में शिकायत दर्ज कराती हैं, तो आपके पति और ससुराल वाले पहले की शिकायत थाने को भेजेंगे और पुलिस आपकी शिकायत को खारिज कर देगी। 3. यदि आप अपने पति को 498 ए मामले में शामिल करना चाहती हैं, तो आरोप पत्र दाखिल करने के बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 319 Cr.PC के तहत एक आवेदन दायर करें ताकि आपके पति का नाम आरोपी व्यक्ति के रूप में शामिल हो सके। हालाँकि, इस तरह के आवेदन पर गुण-दोष और आपके अधिवक्ता के मजबूत प्रतिनिधित्व पर निर्णय लिया जाएगा। अगर आपको कोई मदद चाहिए तो बेझिझक मुझसे संपर्क करें।
नमस्ते विशेष रूप से 498a मामले में पति को प्राथमिकी में शामिल करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है। इसलिए पूरी संभावना है कि पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल न करने का कारण यह हो सकता है कि एफआईआर में पति को छोड़ दिया गया है। इसलिए आपको सीआरपीसी की धारा 161 के तहत जांच अधिकारी को एक और बयान देना चाहिए। जांच करने वाले पुलिस अधिकारी उस मुद्दे की जांच करेंगे और अगर ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, तो जांच के दौरान उनके नाम आरोपी व्यक्तियों के रूप में दिखाए जाएंगे और वे उनके खिलाफ सबूत की उपलब्धता के आधार पर पुलिस द्वारा चार्जशीट किया जाना चाहिए। आपके ताजा बयान के आधार पर, पुलिस जांच के बाद आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 319 (1) के तहत प्राथमिकी और आरोप पत्र में आपके पति का नाम जोड़ती है।
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परिवार कानून से संबंधित अन्य प्रश्न
- सर, हमारे दादाजी अलग हैं, गोत्र अलग है और पूरा खानदान अलग है। मेरी दादी और लड़के की दादी सगी बहनें थीं, लेकिन वे अलग-अलग परिवारों में ब्याही गई थीं। क्या हिंदू मैरिज एक्ट (HMA, 1955) के तहत हमारी शादी कानूनी तौर पर वैध (Valid) है?" [HMA, 1955]
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- Ji mera name hiralal hai or mujhe document problem hai main surat Sahar main raheta hu leki main janm Uttar Pradesh main hua hai or vaha par mera name nimar tha lekin surat ke sabhi document main Hiralal hai lekin kheti ke dastavej main nimar hai ise sahi kese karu or abhi sir fom bhi fara ja raha hai or main problem main hu ki kis main aapna name sahi karu sath main papa ka name main bhi problem hai main surat main hi hu or sabhi document main bhi hiralal kada hai liki kheti ka dastavej main nimar hai Please help me