तलाक के बाद पिता की संपत्ति पर बच्चों के क्या अधिकार हैं
सवाल
उत्तर (4)
हाँ, माता-पिता के तलाक लेने से बच्चों के संपत्ति अधिकारों पर कोई कानूनी प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति किस प्रकार की है। यदि संपत्ति पिता की स्वयं अर्जित संपत्ति (Self-acquired Property) है, तो पिता के जीवित रहते बच्चों का उस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं होता है। पिता अपनी मर्जी से वह घर किसी को भी बेच सकते हैं या किसी के भी नाम वसीयत (Will) कर सकते हैं।
यदि पिता की मृत्यु बिना किसी वसीयत (Intestate) के हो जाती है, तो उनके बच्चे प्रथम श्रेणी के कानूनी वारिस (Class I Heirs) होने के नाते उस संपत्ति में बराबर हिस्सा पाने के हकदार होंगे। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) के तहत, तलाक होने पर पत्नी का अधिकार खत्म हो जाता है, लेकिन बच्चों का अपने पिता से रक्त का संबंध बना रहता है, इसलिए उनका उत्तराधिकार का अधिकार सुरक्षित रहता है।
दूसरी स्थिति पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) की है। यदि वह घर आपके पति को उनके दादा या परदादा से विरासत में मिला है और वह चार पीढ़ियों से अविभाजित है, तो आपके बच्चों का उस संपत्ति पर जन्म से ही अधिकार होता है। ऐसी संपत्ति में पिता बच्चों को उनके हिस्से से वंचित नहीं कर सकते हैं, चाहे माता-पिता का तलाक हो गया हो या नहीं।
जहाँ तक रहने के अधिकार का सवाल है, यदि बच्चे बालिग (Major) हैं, तो वे कानूनी रूप से पिता के घर में रहने का दावा तब तक नहीं कर सकते जब तक वह पैतृक संपत्ति न हो। भारतीय न्याय संहिता के दौर में भी संपत्ति और उत्तराधिकार के नियम मुख्य रूप से व्यक्तिगत कानूनों द्वारा ही संचालित होते हैं। बच्चों को सलाह दी जाती है कि वे भविष्य में विवाद से बचने के लिए पिता द्वारा की जाने वाली किसी भी वसीयत या संपत्ति हस्तांतरण (Property Transfer) पर नजर रखें।
पिता के जीवनकाल में स्वयं अर्जित संपत्ति में पुत्रों का कोई अधिकार नहीं होता है। वे उसकी संपत्ति में अधिकार तभी प्राप्त कर सकते हैं जब पिता की मृत्यु बिना वसीयत के हो जाए। यदि वह एक वसीयतनामा (वसीयत) करता है, तो उसकी वसीयत के अनुसार संपत्ति का वितरण किया जाएगा। तलाक लेने या विवाह में बने रहने पर यह कानूनी स्थिति नहीं बदलेगी।
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- सर, हमारे दादाजी अलग हैं, गोत्र अलग है और पूरा खानदान अलग है। मेरी दादी और लड़के की दादी सगी बहनें थीं, लेकिन वे अलग-अलग परिवारों में ब्याही गई थीं। क्या हिंदू मैरिज एक्ट (HMA, 1955) के तहत हमारी शादी कानूनी तौर पर वैध (Valid) है?" [HMA, 1955]
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- Ji mera name hiralal hai or mujhe document problem hai main surat Sahar main raheta hu leki main janm Uttar Pradesh main hua hai or vaha par mera name nimar tha lekin surat ke sabhi document main Hiralal hai lekin kheti ke dastavej main nimar hai ise sahi kese karu or abhi sir fom bhi fara ja raha hai or main problem main hu ki kis main aapna name sahi karu sath main papa ka name main bhi problem hai main surat main hi hu or sabhi document main bhi hiralal kada hai liki kheti ka dastavej main nimar hai Please help me