क्या करें मेरी बहनों का पति उन्हें परेशान कर रहा है
सवाल
मेरी बहन अपने पति की गाली-गलौज और बदतमीजी से परेशान होकर फिलहाल हमारे साथ रह रही है। उसके पति ने बहन के सारे गहने भी गिरवी रख दिए हैं और मांगने पर मारपीट और गाली-गलौज करता है। मेरे माता-पिता ने सुलह की बहुत कोशिश की और उसकी आर्थिक मदद भी की, लेकिन वह सुधरने को तैयार नहीं है और अब फोन पर भी गाली देता है। ऐसी स्थिति में हमें अपनी बहन की सुरक्षा और उसके हक के लिए क्या करना चाहिए?
उत्तर (5)
आपकी बहन के साथ जो हो रहा है, वह कानूनन घरेलू हिंसा और क्रूरता के दायरे में आता है। चूंकि आपने आपसी बातचीत और समझौते की सारी कोशिशें कर ली हैं और पति का व्यवहार नहीं बदला है, इसलिए अब आपको कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए। सबसे पहले आपको एक अनुभवी वकील के जरिए उसे एक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजना चाहिए, जिसमें उसे अपनी आदतों में सुधार करने और बहन के गहने वापस करने की चेतावनी दी गई हो।
यदि नोटिस के बाद भी वह नहीं सुधरता, तो आप निम्नलिखित कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं:
बहन के पति द्वारा गाली-गलौज करना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना 'क्रूरता' माना जाता है। आप भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 और 86 (पुरानी धारा 498ए) के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसमें पति को जेल की सजा का प्रावधान है।
आप घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (Domestic Violence Act) के तहत कोर्ट में केस कर सकते हैं। इसके जरिए बहन अपने गिरवी रखे हुए गहने (स्त्रीधन) वापस पा सकती है, अपने लिए सुरक्षा का आदेश ले सकती है और रहने के लिए घर या खर्चे की मांग भी कर सकती है।
बहन के जो गहने पति ने गिरवी रखे हैं, वे तकनीकी रूप से 'स्त्रीधन' (Stridhan) कहलाते हैं। उन पर केवल आपकी बहन का अधिकार है। पति द्वारा उन्हें बिना मर्जी के गिरवी रखना अमानत में खयानत (Criminal Breach of Trust) जैसा अपराध है। कोर्ट के जरिए इन गहनों को वापस पाने के लिए दबाव बनाया जा सकता है।
चूंकि बहन आपके साथ रह रही है, वह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 (Section 144) के तहत पति से अपना और अपने बच्चों का खर्च चलाने के लिए मासिक गुजारा भत्ता (Maintenance) मांग सकती है।
मेरी सलाह है कि पति जब भी फोन पर गाली-गलौज करे, तो उसकी रिकॉर्डिंग जरूर कर लें। यह रिकॉर्डिंग पुलिस और कोर्ट में बहुत मजबूत सबूत साबित होगी। इसके अलावा, माता-पिता ने जो आर्थिक मदद की है, उसके सबूत भी इकट्ठा रखें।
उसके माता-पिता से बात करने की कोशिश करें और मामले को सुलझाएं, उन्हें काउंसलिंग के लिए जाने का सुझाव दें, हो सकता है कि काउंसलिंग से समस्या सुलझ जाए। यदि फिर भी समस्या बनी रहती है तो अपने खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करने और धारा 498ए के तहत उत्पीड़न का मामला दर्ज करने के लिए कहें। उसे घटनाओं के विवरण को कालानुक्रमिक रूप से लिखने के लिए कहें और उसके आभूषणों और उपहारों की सूची भी बनाएं जो विवाह के समय प्राप्त हुए थे क्योंकि यह उसका स्त्रीधन है। इसके अलावा पुलिस के संरक्षण में वह वापस अपने ससुराल में रह सकती है। अधिक सहायता के लिए एक वकील से परामर्श करें
ये हमारे समाज में आम मुद्दे हैं, उन मामलों में उपचार एक ही प्रकार के होते हैं लेकिन स्थिति से कैसे निपटना है यह विभिन्न मुद्दों पर निर्भर करता है I. e. क्या आपके जीजा के पास नौकरी है, क्या वह शराब आदि का आदी है, यह तभी समझ में आता है जब आप हमसे मिलते हैं या हमसे बात करते हैं या किसी सलाहकार या वकील से, और फिर निहित टैट आयन के लिए उपयोगी होते हैं।
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
परिवार कानून से संबंधित अन्य प्रश्न
- सर, हमारे दादाजी अलग हैं, गोत्र अलग है और पूरा खानदान अलग है। मेरी दादी और लड़के की दादी सगी बहनें थीं, लेकिन वे अलग-अलग परिवारों में ब्याही गई थीं। क्या हिंदू मैरिज एक्ट (HMA, 1955) के तहत हमारी शादी कानूनी तौर पर वैध (Valid) है?" [HMA, 1955]
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- Ji mera name hiralal hai or mujhe document problem hai main surat Sahar main raheta hu leki main janm Uttar Pradesh main hua hai or vaha par mera name nimar tha lekin surat ke sabhi document main Hiralal hai lekin kheti ke dastavej main nimar hai ise sahi kese karu or abhi sir fom bhi fara ja raha hai or main problem main hu ki kis main aapna name sahi karu sath main papa ka name main bhi problem hai main surat main hi hu or sabhi document main bhi hiralal kada hai liki kheti ka dastavej main nimar hai Please help me