सुप्रीम कोर्ट ने धारा 12 और 151 सीपीसी के तहत मेडिकल जांच का आदेश किस केस में दिया था


सवाल

सभी अधिवक्ताओं को सादर प्रणाम सर्वोच्च न्यायालय ने हिंदू विवाह अधिनियम धारा 12 विवाह शून्नीयकरण के किस वाद में 151 सी पी सी का उपयोग क्या है । कृपया वादी एवं प्रतिवादी के नाम के साथ ही अपील संख्या भी बताने का कष्ट करें । महोदय मैं भी विगत 15 वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहा हूं । परंतु निचली अदालत में 151 सीपीसी का उपयोग अनिवार्य मेडिकल करने के लिए नहीं किया है

उत्तर (2)


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जिस मामले की आप तलाश कर रहे हैं, वह भारत के सर्वोच्च न्यायालय का एक बहुत ही ऐतिहासिक फैसला है। इस केस का नाम 'शारदा बनाम धर्मपाल' है। इसकी सिविल अपील संख्या 4646/1998 है और इसका फैसला साल 2003 में आया था।

मेडिकल जांच और 151 सीपीसी का उपयोग : इस जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम और धारा 151 सीपीसी के तहत फैमिली कोर्ट के पास अपनी अंतर्निहित शक्तियों (Inherent Powers) का उपयोग करते हुए किसी भी पक्षकार को अनिवार्य मेडिकल जांच से गुजरने का आदेश देने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा आदेश संविधान के निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है।

निचली अदालत में आगे की कार्यवाही : अगर आपकी निचली अदालत धारा 151 सीपीसी के तहत मेडिकल जांच का आदेश नहीं दे रही है, तो आप अपने वकील के माध्यम से इस 'शारदा बनाम धर्मपाल' जजमेंट की कॉपी कोर्ट में पेश कर सकते हैं। कानून के अनुसार, अगर कोर्ट के आदेश के बाद भी सामने वाला पक्ष मेडिकल जांच करवाने से मना करता है, तो कोर्ट उसके खिलाफ विपरीत अनुमान निकाल सकती है, जिससे आपके विवाह शून्यीकरण  के केस को मजबूती मिलेगी।

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इश्क के अनुसार आपके मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कर दी थी यह भारतीय जन संहिता के तहत चोरी का अपराध है जहां तक सीसीटीवी फुटेज को दोस्तों सोशल मीडिया पर शेयर करने की बात है आपको सावधानी बरतनी चाहिए बिना पुलिस की अनुमति के किसी व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक करना कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता है खासकर अगर पहचान स्पष्ट ना हो और किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुंचे बेहतर यही होगा कि आप पूरा सीसीटीवी फुटेज पुलिस को ही दिन और उनसे जांच तेज करने का अनुरोध अनुरोध करें आप लिखित आवेदन देखकर यह भी कर सकते हैं की फुटेज की तकनीकी रूप से साफ एनहांस कराया जाए ताकि आरोपी को पहचान हो सके यदि पुलिस कार्रवाई में देरी कर तो आप उच्च अधिकारियों जैसे एसपी हो गया है डायरेक्ट कोर्ट में भी एप्लीकेशन लगा सकते हैं वकीलों के द्वारा धन्यवाद


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