क्या तलाक के केस में फोन कॉल रिकॉर्डिंग को सबूत माना जाता है


सवाल

मेरे पास अपनी पत्नी/पति के साथ हुई बातचीत की कुछ ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग हैं जो मेरे तलाक के केस में बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। मैं जानना चाहता हूं कि क्या भारतीय फैमिली कोर्ट में ऐसी रिकॉर्डिंग को सबूत के तौर पर स्वीकार किया जाता है? अगर दूसरी पार्टी यह कहकर मना कर दे कि यह उनकी आवाज नहीं है या किसी ने मिमिक्री की है, तो कोर्ट इस पर क्या कार्रवाई करेगा?

उत्तर (4)


87 votes

जी हां, तलाक के मामलों में ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग एक बहुत ही महत्वपूर्ण और वैध सबूत है। भारतीय अदालतें इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को पूरी मान्यता देती हैं, बशर्ते उन्हें सही कानूनी प्रक्रिया के तहत पेश किया जाए।

नए कानून 'भारतीय साक्ष्य अधिनियम' (Bharatiya Sakshya Adhiniyam - BSA) की धारा 61 और 63 (जो पुराने कानून में धारा 65B थी) के तहत, मोबाइल रिकॉर्डिंग, कॉल डेटा और चैट को सबूत के रूप में स्वीकार किया जाता है। लेकिन, इसे कोर्ट में पेश करते समय आपको एक शपथ पत्र यानी 'प्रमाण पत्र' (Certificate under Section 63 BSA) देना होगा। इसमें आपको लिखना होता है कि रिकॉर्डिंग जिस डिवाइस (मोबाइल) से की गई है वह आपके पास है और रिकॉर्डिंग के साथ कोई छेड़छाड़ (Editing) नहीं की गई है।

जहां तक आवाज पहचानने से मना करने या मिमिक्री (नकल) का बहाना बनाने की बात है, तो कानून इससे निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम है:

  1. वॉइस स्पेक्ट्रोग्राफी टेस्ट (Voice Spectrography Test): अगर सामने वाली पार्टी कहती है कि यह आवाज उनकी नहीं है, तो आप कोर्ट से निवेदन कर सकते हैं कि उनकी आवाज का नमूना (Sample) लेकर उसे फॉरेंसिक लैब (CFSL) भेजा जाए।

  2. वैज्ञानिक जांच: फॉरेंसिक एक्सपर्ट रिकॉर्डिंग की आवाज और उनके ताजे नमूने का मिलान करते हैं। यह एक वैज्ञानिक टेस्ट है जो आसानी से पकड़ लेता है कि आवाज किसकी है। इसे झुठलाना लगभग नामुमकिन होता है।

हालांकि, आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि हाल ही में कुछ उच्च न्यायालयों ने यह भी कहा है कि जीवनसाथी की जानकारी के बिना उनकी कॉल रिकॉर्ड करना 'निजता के अधिकार' (Right to Privacy) का उल्लंघन हो सकता है। लेकिन अगर वह रिकॉर्डिंग आपके साथ हो रही 'क्रूरता' (Cruelty) को साबित करने का एकमात्र जरिया है, तो फैमिली कोर्ट अक्सर इसे सबूत के तौर पर स्वीकार कर लेते हैं।

255 votes

हां ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत अदालत में सबूत माना जाता है। यहां तक कि अगर आपने भेजा है कि आवाज आपकी नहीं है, तो रिकॉर्डिंग को फोरेंसिक विभाग को भेज दिया जाता है, अगर न्यायाधीश इसे सत्यापित करने का आदेश देता है।

335 votes

हेलो डियर क्लाइंट, मैं आपको सुझाव दूंगा कि ऑडियो रिकॉर्डिंग तलाक लेने का एक सबूत है लेकिन जैसा कि आपने बताया कि इस ऑडियो को नकारने का एक आधार है। आगे की जरूरत के लिए आप इस साइट सेवाओं से मुझसे संपर्क कर सकते हैं।

332 votes

आदरणीय महोदय, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 बी के तहत आपके प्रश्न के संबंध में स्पष्ट रूप से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की स्वीकार्यता निर्धारित की गई है। आपके मामले में आपको अपनी आवाज को अस्वीकार करने का पूरा अधिकार है लेकिन आपके मामले में अगर वॉयस रिकॉर्डिंग की पुष्टि कॉल डेटा रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के साथ की जाती है तो एक संभावना है। लेकिन मामले की जांच करना अदालत का कर्तव्य है और विपरीत पक्ष आरोप को घर लाने के लिए उत्तरदायी होगा। सादर, एड. साकिब गिगनी।


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