क्या ग्राम पंचायत के सामने हुआ आपसी समझौता तलाक के रूप में मान्य है


सवाल

हमने अपनी बहन के बेटे की शादी के लिए एक लड़के के परिवार से बात की थी। बाद में हमें पता चला कि उस लड़के की पहले भी शादी हो चुकी है, लेकिन ग्राम पंचायत के सामने आपसी सहमति से वह रिश्ता टूट गया था। इस सहमति को स्टाम्प पेपर पर गवाहों के हस्ताक्षर के साथ दर्ज किया गया था। हम यह जानना चाहते हैं कि क्या पंचायत के उस दस्तावेज को कानूनी तलाक माना जा सकता है? क्या इस तरह का अलगाव कानून की नजर में सही है और अगर हम इस लड़के से शादी करते हैं, तो क्या उसकी पहली पत्नी भविष्य में किसी तरह का कानूनी दावा कर सकती है?

उत्तर (4)


408 votes

नहीं, ग्राम पंचायत के सामने हुआ कोई भी समझौता या स्टाम्प पेपर पर लिखा गया आपसी अलगाव कानूनी रूप से वैध तलाक नहीं माना जाता है। भारतीय कानून, विशेष रूप से हिंदू विवाह अधिनियम के तहत, किसी भी शादी को कानूनी रूप से खत्म करने का अधिकार केवल न्यायालय (Court) के पास है। पंचायत के पास तलाक देने की कोई कानूनी शक्ति नहीं है।

जब तक किसी सक्षम अदालत द्वारा तलाक की डिक्री (Decree) जारी नहीं की जाती, तब तक उस लड़के की पहली शादी कानूनी रूप से अस्तित्व में मानी जाएगी। इसका मतलब यह है कि पंचायत के कागजात होने के बावजूद, वह लड़का कानूनी तौर पर अभी भी अपनी पहली पत्नी का पति है। कानून की नजर में ऐसा कोई भी निजी अनुबंध (Contract) या सामाजिक समझौता शादी को समाप्त नहीं कर सकता।

यदि आप इस लड़के के साथ अपनी बहन के बेटे की शादी के लिए आगे बढ़ते हैं, तो यह एक बड़ा कानूनी जोखिम होगा। पहली पत्नी भविष्य में कभी भी भरण-पोषण (Maintenance), संपत्ति में हिस्सेदारी या द्विविवाह (Bigamy) का मामला दर्ज कर सकती है। चूँकि पहली शादी कानूनी रूप से खत्म नहीं हुई है, इसलिए दूसरी शादी को भी अमान्य घोषित किया जा सकता है।

सबसे सुरक्षित और सही तरीका यही है कि वह लड़का और उसकी पहली पत्नी हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13बी के तहत अदालत में आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent Divorce) के लिए अर्जी दें। जब कोर्ट तलाक का अंतिम आदेश दे दे, तभी उस लड़के को कानूनी तौर पर अविवाहित माना जाएगा और वह दूसरी शादी करने के लिए स्वतंत्र होगा।

75 votes

इस समझौते को वैध तलाक नहीं माना जा सकता है। पार्टियों को मान्यता प्राप्त तरीके से तलाक लेना चाहिए जैसा कि क़ानून में उल्लेख किया गया है। एक हिंदू के लिए, पार्टियां हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए आवेदन कर सकती हैं। विवाह को समाप्त करने के लिए कोई अन्य समझौता या अनुबंध कानून के तहत मान्यता प्राप्त नहीं है और पिछली पत्नी को कानूनी रूप से विवाहित पत्नी माना जाएगा जब तक कि अदालत द्वारा तलाक की अनुमति नहीं दी जाती है।

188 votes

यह अलग होने की सही प्रक्रिया नहीं है। उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए और धारा 13(बी) के तहत तलाक की याचिका दायर करनी चाहिए। उपर्युक्त मामले में पिछली पत्नी तलाक के समझौते का दावा कर सकती है या उसे चुनौती दे सकती है।

183 votes

हां आपसी सहमति से तलाक एक वैध तलाक है। एक बार तलाक की कार्यवाही पूरी हो जाने के बाद, तलाक की शर्तें भविष्य की किसी भी गतिविधि का फैसला करती हैं। इसलिए एक बार यह हो जाने के बाद पत्नी या पति उनके बीच हुए समझौते के बाहर कुछ भी दावा नहीं कर सकते। यदि आपको कुछ और जानने की आवश्यकता है, तो आप एक नियुक्ति लेना और व्यक्तिगत रूप से चर्चा करना पसंद कर सकते हैं।


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