क्या तलाक के मामले में फोटो और वीडियो को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है


सवाल

क्या तलाक के मुकदमे में फोटो और वीडियो को कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है? क्या अदालत इन्हें मान्य मानती है या इनके आधार पर फैसला सुनाया जा सकता है?

उत्तर (4)


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तलाक के मामलों में फोटो और वीडियो को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) के स्थान पर अब लागू हुए भारतीय साक्ष्य संहिता (BSS) के तहत डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को प्राथमिक सबूत के रूप में स्वीकार किया जाता है।

अदालत में इन साक्ष्यों को स्वीकार्य सबूत (Admissible Evidence) माना जाता है, लेकिन इन्हें निर्णायक सबूत (Conclusive Proof) नहीं माना जाता। इसका मतलब यह है कि केवल फोटो या वीडियो दिखा देने भर से फैसला नहीं हो जाता; आपको यह साबित करना होगा कि ये असली हैं और इनके साथ कोई छेड़छाड़ या एडिटिंग नहीं की गई है। अक्सर इनका उपयोग सहायक सबूत (Corroborative Evidence) के रूप में किया जाता है, जो आपकी मुख्य दलीलों या आरोपों को मजबूती प्रदान करते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश करते समय आपको भारतीय साक्ष्य संहिता की धारा 63 (पहले धारा 65B) के तहत एक प्रमाण पत्र (Certificate) भी देना होता है। यह सर्टिफिकेट इस बात की पुष्टि करता है कि जिस डिवाइस से यह सबूत लिया गया है, वह सही स्थिति में था और डेटा के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। उदाहरण के लिए, यदि आप क्रूरता (Cruelty) या व्यभिचार (Adultery) साबित करना चाहते हैं, तो फोटो और वीडियो आपके पक्ष को बहुत मजबूत बना सकते हैं।

287 votes

हाँ, यह हो सकता है। हालांकि इसे निर्णायक साक्ष्य के रूप में नहीं बल्कि स्वीकार्य साक्ष्य के रूप में माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि इसे साबित करना होगा। इसका उपयोग कोरोबेटिव सबूत के रूप में भी किया जाता है, जिसका अर्थ है कि इसका उपयोग आरोप को साबित करने के लिए किया जा सकता है

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डियर सर/मैम, हां एविडेंस एक्ट के मुताबिक, आप तलाक के मामले में सबूत के तौर पर फोटो और वीडियो का इस्तेमाल कर सकते हैं। धारा 65 ए (साक्ष्य अधिनियम) इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से संबंधित साक्ष्य के रूप में विशेष प्रावधान प्रदान करता है और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की सामग्री को साक्ष्य अधिनियम के 65 बी के प्रावधान के अनुसार साबित किया जा सकता है। आप व्यभिचार के लिए भी आगे बढ़ सकते हैं।

107 votes

क्यों नहीं? अब हम एक डिजिटल दुनिया में रह रहे हैं। इसलिए, कानून की नजर में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य स्वीकार्य है। हालाँकि, अदालत इन सबूतों की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए इन सबूतों को सत्यापित दिखाने के लिए कह सकती है। अत: इस प्रकार के साक्ष्यों में स्रोत बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


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