क्या कामकाजी पत्नी बेरोजगार पति को गुजारा भत्ता देने के लिए उत्तरदायी है


सवाल

मेरी माँ एक सरकारी शिक्षिका हैं और उन्होंने 2004 में दूसरी शादी की थी। अब उनका दूसरा पति तलाक चाहता है। वह व्यक्ति बेरोजगार है जबकि मेरी माँ अभी भी नौकरी कर रही हैं। क्या माँ को उसे गुजारा भत्ता देना होगा और क्या इस विवाद के कारण उनकी सरकारी नौकरी पर कोई खतरा आ सकता है?

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हाँ, हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 24 और 25 के तहत एक बेरोजगार पति अपनी कामकाजी पत्नी से गुजारा भत्ता (Maintenance) पाने का दावा कर सकता है। भारतीय कानून में भरण-पोषण के प्रावधान केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि उस जीवनसाथी के लिए भी हैं जो अपनी देखभाल करने में असमर्थ है। हालांकि, कोर्ट कुछ विशेष परिस्थितियों को देखकर ही ऐसा आदेश देता है।

अदालत यह देखती है कि क्या पति वास्तव में शारीरिक या मानसिक रूप से काम करने में अक्षम है। यदि वह व्यक्ति स्वस्थ है, शिक्षित है और जानबूझकर अपनी पत्नी की कमाई पर निर्भर रहने के लिए काम नहीं कर रहा है, तो अदालत उसकी गुजारा भत्ता की मांग को खारिज कर सकती है। कोर्ट अक्सर यह कहता है कि एक सक्षम व्यक्ति को आलस्य के कारण भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता।

जहाँ तक आपकी माँ की सरकारी नौकरी का सवाल है, तो केवल तलाक का केस चलने या पति द्वारा गुजारा भत्ता मांगे जाने से नौकरी पर कोई खतरा नहीं आता है। यह एक व्यक्तिगत पारिवारिक विवाद है जो सेवा नियमों (Service Rules) के उल्लंघन की श्रेणी में नहीं आता। नौकरी पर खतरा केवल तब हो सकता है जब पति कोई ऐसा गंभीर आरोप साबित कर दे जो नैतिक पतन (Moral Turpitude) से जुड़ा हो, लेकिन सामान्य तलाक के मामले में ऐसा नहीं होता।

गुजारा भत्ता के मामले में बचाव के लिए आपकी माँ निम्नलिखित तर्क दे सकती हैं:

1. पति की योग्यता: यदि पति पढ़ा-लिखा है और काम करने के लायक है, तो कोर्ट में उसकी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज पेश करें।
2. आय के अन्य स्रोत: यदि पति के पास कोई पुश्तैनी जमीन, किराया या अन्य गुप्त आय है, तो उसके सबूत जुटाएं।
3. अपनी जिम्मेदारियां: माँ को यह साबित करना होगा कि उनकी आय का बड़ा हिस्सा परिवार की अन्य जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई पर खर्च होता है, जिससे उनके पास पति को देने के लिए अतिरिक्त धन नहीं है।

अदालत दोनों पक्षों की जीवनशैली और आय का संतुलन देखने के बाद ही फैसला लेती है। यदि माँ को गुजारा भत्ता देना भी पड़ता है, तो वह उनकी आय का एक हिस्सा ही होगा, जिससे उनकी नौकरी या आजीविका पर कोई संकट नहीं आएगा।


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