अगर पत्नी आपसी तलाक के लिए राजी नहीं हो रही है तो क्या करें


सवाल

मेरी शादी को 1० साल हो चुके हैं और हमारे बीच लगातार झगड़े होते रहते हैं, जिससे तंग आकर मैंने खुदकुशी की कोशिश भी की थी। अब मैं अपनी जान देने के बजाय अलग होना चाहता हूँ, लेकिन मेरी पत्नी तलाक के लिए राजी नहीं है। मेरे माता-पिता भी समाज के दबाव में मुझे साथ रहने को कह रहे हैं। ऐसी स्थिति में मैं कानूनी रूप से अलग होने के लिए क्या कर सकता हूँ?

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हाँ, यदि आपकी पत्नी आपसी सहमति (Mutual Consent) से तलाक देने के लिए तैयार नहीं है, तो भी आप कानून की मदद से तलाक ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपको हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1) के तहत एकतरफा तलाक (Contested Divorce) की याचिका दायर करनी होगी। आपके मामले में क्रूरता (Cruelty) तलाक का एक मजबूत आधार बन सकता है।

कानून की नज़र में क्रूरता का मतलब सिर्फ मारपीट नहीं होता। यदि रोज के झगड़ों, मानसिक प्रताड़ना या गलत व्यवहार की वजह से आपका जीवन नर्क बन गया है और आपको अपनी जान का खतरा महसूस होने लगा है, तो इसे मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) माना जाता है। चूंकि आपने तनाव की वजह से खुदकुशी की कोशिश भी की है, तो यह दर्शाता है कि आप गंभीर मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं। कोर्ट में आप इन परिस्थितियों को सबूतों के साथ रखकर तलाक की मांग कर सकते हैं।

इसके अलावा, यदि आपकी पत्नी पिछले २ सालों से बिना किसी ठोस कारण के आपसे अलग रह रही है, तो आप परित्याग (Desertion) के आधार पर भी केस कर सकते हैं। एकतरफा तलाक की प्रक्रिया में सबसे पहले आपको फैमिली कोर्ट (Family Court) में याचिका लगानी होगी। कोर्ट आपकी पत्नी को समन (Summons) भेजेगा और आप दोनों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। कोर्ट अक्सर पहले मध्यस्थता (Mediation) की कोशिश करता है, लेकिन यदि समझौता संभव न हो, तो गवाहों और सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया जाता है।

मेरी सलाह है कि आप अपनी जान जोखिम में डालने जैसा कोई कदम न उठाएं। कानून में हर समस्या का समाधान है। आप एक अच्छे वकील के माध्यम से क्रूरता के आधार पर तलाक का केस शुरू करें। यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है, लेकिन इससे आपको एक नई और शांतिपूर्ण जिंदगी शुरू करने का कानूनी अधिकार मिलेगा।


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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


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