चेक बाउंस के मामले में फरार अपराधी की संपत्ति की कुर्की कैसे करवाएं


सवाल

मैं निचली अदालत और सत्र न्यायालय दोनों में चेक बाउंस का केस जीत चुका हूँ। आरोपी हाई कोर्ट से भी केस हार चुका है और तब से फरार है। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए तीन बार वारंट जारी किए हैं, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। क्या मैं उसकी संपत्ति की कुर्की के लिए अदालत में अर्जी दे सकता हूँ? अदालत को उसे कुर्की से पहले कितनी बार गैर जमानती वारंट भेजना जरूरी है?

उत्तर (2)


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हाँ, आप आरोपी की संपत्ति की कुर्की के लिए अदालत में आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, इसकी एक कानूनी प्रक्रिया होती है जिसे पूरा करना अनिवार्य है। केवल वारंट जारी होने से सीधे कुर्की नहीं की जा सकती।

जब कोई आरोपी अदालत के वारंट के बावजूद पेश नहीं होता और पुलिस उसे ढूंढने में नाकाम रहती है, तो निम्नलिखित कानूनी कदम उठाए जाते हैं:

फरार घोषित करना (Proclamation) सबसे पहले आपको अदालत से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 84 (पुरानी सीआरपीसी की धारा 82) के तहत आरोपी को फरार घोषित करने के लिए अर्जी देनी होगी। अदालत यह देखती है कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपा हुआ है। इसके बाद अदालत एक लिखित उद्घोषणा जारी करती है, जिसमें आरोपी को 30 दिनों के भीतर पेश होने का आदेश दिया जाता है।

संपत्ति की कुर्की (Attachment of Property) यदि वह 30 दिनों की समय सीमा के भीतर भी अदालत में पेश नहीं होता, तो अदालत धारा 85 (पुरानी सीआरपीसी की धारा 83) के तहत उसकी चल और अचल संपत्ति को कुर्क करने का आदेश दे सकती है। इस प्रक्रिया के बाद आरोपी अपनी संपत्ति बेच नहीं पाएगा और वह अदालत के नियंत्रण में आ जाएगी।

संपत्ति की नीलामी कुर्की के 6 महीने बाद भी यदि अपराधी हाजिर नहीं होता है, तो अदालत उसकी संपत्ति को बेचकर या नीलाम करके आपके पैसे की वसूली का आदेश दे सकती है। वारंट कितनी बार भेजना है, इसकी कोई तय गिनती नहीं है, लेकिन यदि पुलिस की रिपोर्ट यह कहती है कि आरोपी फरार है, तो जज साहब सीधे कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

मेरी सलाह है कि आप अपने वकील के माध्यम से तुरंत आरोपी को 'घोषित अपराधी' (Proclaimed Offender) बनवाने की प्रक्रिया शुरू करें। इससे पुलिस पर भी उसे ढूंढने का दबाव बढ़ेगा और आपकी संपत्ति कुर्की की अर्जी पर कार्यवाही तेज होगी।

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आप कुर्की के लिए सीधे नहीं जा सकते वारंट जारी हो चुका है और तामील नहीं हुई है तो सीआरपीसी 82 के तहत उद्घोषणा जारी की जाएगी उसके बाद जब अदालत उसे घोषित अपराधी घोषित कर दे तो संपत्ति कुर्क की जा सकती है और 6 महीने के इंतजार के बाद अगर फिर भी अपराधी नहीं आता है कोर्ट की संपत्ति बेची जा सकती है


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