क्या चेक बाउंस के साथ धोखाधड़ी का केस भी दर्ज हो सकता है
सवाल
उत्तर (1)
जी हां, सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों (जैसे संगीताबेन महेंद्रभाई पटेल बनाम गुजरात राज्य) में यह स्पष्ट किया है कि 'निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट' (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 और धोखाधड़ी का केस एक साथ चल सकते हैं। ये दोनों अलग-अलग अपराध हैं और एक दूसरे को काटते नहीं हैं।
हालांकि, धोखाधड़ी का केस दर्ज करने के लिए केवल चेक बाउंस होना काफी नहीं है। आपको यह साबित करना होगा कि आरोपी की नीयत शुरू से ही 'बेईमानी' (Dishonest Intention) की थी। यानी जब उसने चेक दिया था, तब उसे पता था कि वह पैसा नहीं देगा। नई Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS की धारा 318 (जो पहले आईपीसी 420 थी) के तहत अब आप धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं।
पार्टी पर दबाव बनाने के लिए धारा 138 का केस तो करें ही, साथ में पुलिस में धोखाधड़ी की लिखित शिकायत भी दें। अगर पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो आप कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 175(3) (जो पहले 156(3) थी) के तहत आवेदन देकर एफआईआर का आदेश करवा सकते हैं। पुलिस का डर ही सबसे बड़ा दबाव होता है क्योंकि धोखाधड़ी एक गैर-जमानती अपराध हो सकता है।
जहां तक समय का सवाल है, चेक बाउंस के मामले में आमतौर पर 1 से 2 साल का समय लग जाता है। लेकिन अगर आप धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा भी साथ में चलाते हैं, तो गिरफ्तारी के डर से आरोपी जल्दी समझौता (Settlement) करने और पैसे लौटाने के लिए तैयार हो सकता है।
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