क्या नोटिस देने के 6 महीने बाद चेक बाउंस का मामला दर्ज किया जा सकता है
सवाल
मेरा एक चेक बाउंस हो गया था जिसके लिए मैंने कानूनी नोटिस भी दे दिया था। लेकिन कुछ निजी कारणों से मैं नोटिस देने के 6 महीने बाद तक शिकायत दर्ज नहीं कर सका। क्या मैं अब भी नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (Negotiable Instruments Act - NI Act) की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज कर सकता हूँ, क्योंकि मुझे अभी तक अपना बकाया कर्ज नहीं मिला है?
उत्तर (6)
नहीं, आप कानूनी नोटिस देने के 6 महीने बाद चेक बाउंस का मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत दर्ज नहीं कर सकते।
धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए कानून में एक सख्त समय-सीमा (Time Limit) निर्धारित है, जिसका पालन करना अनिवार्य है।
धारा 138 के तहत समय-सीमा (Time Limits under Section 138)
धारा 138 के तहत केस दर्ज करने के लिए आपको तीन प्रमुख समय-सीमाओं का पालन करना होता है:
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चेक जमा करने की सीमा: चेक जारी होने की तारीख से 3 महीने के भीतर बैंक में जमा कर देना चाहिए।
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कानूनी नोटिस देने की सीमा: चेक बाउंस होने की सूचना बैंक से मिलने के 30 दिनों के भीतर देनदार (Drawer) को कानूनी नोटिस भेजना अनिवार्य है।
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कोर्ट में शिकायत की सीमा: देनदार को कानूनी नोटिस मिलने के बाद, उसे 15 दिन का समय दिया जाता है ताकि वह भुगतान कर सके।
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अगर वह 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करता है, तो शिकायतकर्ता (आप) को अगले 30 दिनों के भीतर मजिस्ट्रेट कोर्ट (Magistrate Court) में शिकायत दर्ज करनी होती है।
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यदि आप इस अंतिम 30 दिन की समय-सीमा से चूक जाते हैं, तो आपकी शिकायत समय-बाधित (Time-Barred) मानी जाती है और मजिस्ट्रेट कोर्ट उसे स्वीकार नहीं करेगा।
6 महीने बाद आप क्या कर सकते हैं (अन्य कानूनी रास्ते)
चूंकि 6 महीने बीत चुके हैं, इसलिए आप धारा 138 के तहत केस नहीं कर सकते, लेकिन आप अपने कर्ज की वसूली के लिए ये कानूनी कदम उठा सकते हैं:
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दीवानी मुकदमा (Civil Suit for Recovery): आप दीवानी न्यायालय (Civil Court) में 'धन वसूली का मुकदमा' (Suit for Recovery of Money) दायर कर सकते हैं।
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यह मुकदमा चेक बाउंस होने की तारीख से तीन साल के भीतर दायर किया जा सकता है।
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इस मुकदमे में आपको साबित करना होगा कि देनदार ने आपसे कर्ज लिया था, और चेक उसी कर्ज को चुकाने के लिए दिया गया था।
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आपराधिक विश्वासघात का मुकदमा (Criminal Breach of Trust): अगर आपके पास यह साबित करने के सबूत हैं कि देनदार का इरादा शुरू से ही आपको धोखा देने का था और उसने जानबूझकर आपको बाउंस होने वाला चेक दिया था, तो आप धोखाधड़ी या अपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
आपको जल्द से जल्द दीवानी न्यायालय में धन वसूली का मुकदमा दायर करना चाहिए, क्योंकि NI Act के तहत अब आपका रास्ता बंद हो चुका है।
खैर, NI अधिनियम के अनुसार आप 6 महीने की देरी के बाद मामला दर्ज नहीं कर सकते हैं। लेकिन, यदि कुछ विशिष्ट परिस्थितियाँ आपके सर्वोत्तम प्रयासों के नियंत्रण से बाहर थीं, तो आप उक्त मामले को उचित समय पर दर्ज करने में सक्षम नहीं थे, आप देरी को माफ करके अब भी मामला दर्ज कर सकते हैं। कृपया अपने वकील से जल्द से जल्द सलाह लें और प्रत्येक चीज़ की व्याख्या करें। धन्यवाद।
नहीं। निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट में स्पष्ट रूप से प्रावधानों का उल्लेख है और उसके अनुसार चेक बाउंस होने पर आपको अगले 30 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस देना होगा। इसके बाद, यदि नोटिस दिया गया है जिसे डिलीवरी रिपोर्ट द्वारा सत्यापित किया जा सकता है, तो अगले 45 दिनों के भीतर आपको शिकायत का मामला दर्ज करना होगा, हालांकि यह 31 से 45 दिनों के बीच होना चाहिए। डिलीवरी रिपोर्ट नहीं होने की स्थिति में, सामान्य धारा अधिनियम के तहत आपको 45 दिनों तक प्रतीक्षा करनी होगी और उसके बाद और 60 दिनों से पहले शिकायत दर्ज की जा सकती है। विशेष परिस्थितियों में कुछ उचित दिनों की देरी को माफ किया जा सकता है, लेकिन निश्चित रूप से 180 दिनों का नहीं। हालांकि अगर आपके पास कुछ गंभीर कारण हैं तो अनुमति दी जा सकती है लेकिन यह बहुत कठिन होगा। आपके पास मनी सूट दाखिल करने का एक और विकल्प है। लेकिन यह सलाह दी जाती है कि यदि राशि बहुत बड़ी है, अन्यथा आप वापस पाने की तुलना में अधिक खर्च करेंगे।
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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।
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