अगर कोई व्यक्ति उधार के पैसे लौटाने से इंकार करें तो कैसे केस फाइल कर सकते हैं
सवाल
मैंने एक मित्र को एग्रीमेंट के साथ 15 हजार रूपए उधार दिए थे और उसने 2 महीने में पैसा लौटाने का वादा किया था। 2 महीने बाद उसने मुझे किसी और पार्टी का चेक भुगतान के रूप में दिया। जब मैंने चेक खाते में लगाया, तो 'जाली हस्ताक्षर' के कारण वह चेक बाउंस हो गया। यह साबित करने के लिए कि वह चेक मेरे मित्र ने ही दिया था, मैंने बातचीत की रिकॉर्डिंग कर ली है। अब वह पैसा देने से आनाकानी कर रहा है, मैं उसके खिलाफ कैसे केस फाइल कर सकता हूँ?
उत्तर (2)
आपके पास इस मामले में दो अलग-अलग प्रकार की कानूनी कार्रवाई करने का मजबूत आधार है: एक आपराधिक (Criminal) मामला धोखाधड़ी के लिए, और दूसरा दीवानी (Civil) मामला पैसे की वसूली के लिए।
1. आपराधिक कार्रवाई (Criminal Action) - धोखाधड़ी के लिए
आप तुरंत अपने मित्र के खिलाफ आपराधिक शिकायत (Criminal Complaint) दर्ज कर सकते हैं, क्योंकि उसने न केवल धोखा दिया, बल्कि आपको जाली हस्ताक्षर वाला चेक भी दिया:
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जाली चेक: चूंकि चेक 'जाली हस्ताक्षर' के कारण बाउंस हुआ है, यह 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' (Negotiable Instruments Act - NI Act) की धारा 138 के तहत चेक बाउंस का सीधा मामला नहीं बनता है।
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धोखाधड़ी और जालसाजी: यह एक स्पष्ट धोखाधड़ी (Cheating) और जालसाजी (Forgery) का मामला है। आप Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS की निम्नलिखित धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कर सकते हैं:
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BNS धारा 318 (धोखाधड़ी - Cheating): यह साबित करता है कि आपका मित्र आपको फर्जी चेक देकर धोखा देना चाहता था।
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BNS धारा 337 (जालसाजी - Forgery): यह दिखाता है कि उसने जाली हस्ताक्षर वाला चेक दिया।
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सबूत: आपकी पास मौजूद उधार का एग्रीमेंट और बातचीत की रिकॉर्डिंग इस आपराधिक मामले में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य (Evidence) हैं कि उसने जानबूझकर आपको धोखा दिया।
2. दीवानी कार्रवाई (Civil Action) - पैसे की वसूली के लिए
पैसे की वसूली के लिए आपको दीवानी न्यायालय (Civil Court) में जाना होगा:
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धन वसूली का मुकदमा (Suit for Recovery of Money): आप अपने मित्र के खिलाफ दीवानी न्यायालय में 'धन वसूली का मुकदमा' दायर कर सकते हैं।
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आधार: इस मुकदमे का आधार वह लिखित एग्रीमेंट होगा जिसके तहत आपने ₹15,000 उधार दिए थे। यह मुकदमा चेक बाउंस के मामले से स्वतंत्र होगा।
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समय सीमा: यह मुकदमा ऋण (Debt) दिए जाने की तारीख से तीन साल के भीतर दायर किया जाना चाहिए।
आपको जल्द से जल्द एक वकील की मदद लेनी चाहिए और आपराधिक शिकायत को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि आपराधिक मामला अक्सर देनदार (Debtor) पर दबाव बनाता है ताकि वह जल्दी से जल्दी समझौता करके पैसे लौटा दे।
आप चेक बाउंस का मुकदमा नहीं फाइल कर कर सकते कि वह चेक आपको थर्ड पार्टी द्वारा दिया गया है इसमें आपने जिससे पैसा लिया है उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती क्योंकि उस चेक में उसके सिग्नेचर नहीं है इसलिए पर चेक बाउंस का मुकदमा नहीं कर सकते मगर आप सूट फॉर रिकवरी का मुकदमा सिविल में फाइल कर सकते हैं और साथ ही 420 का मुकदमा भी फाइल कर सकते हैं क्रिमिनल में
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