हमारी ३४ एकड् जमीन । सन् १९९६ मेरे पित


सवाल

हमारी एक ३४ एकड् जमीन थी । सन् १९९६ में मेरे पिता जी का अपहरण कर एक विधायक ने २३५ रजिस्‍ट्रयों पर हस्‍ताक्षर करवा लिए थे और उसका रूपया कुछ भी नहीं दिया और कहां जा जो बने उखाड़ लेना। जिसकी शिकायत इन्‍दौर EOW मेरे पिता जी द्वारा की गयी उस शिकायत के आधार पर विधायक के साथ-साथ उनके साथियों के यहां छापे की कार्यवाही की गयी जिसमें समस्‍त दस्‍तावेज उनके घर से जप्‍त किए गए और मेरे पिता जी के पास जो दस्‍तावेज थे वे भी जप्‍त कर EOW ने इस प्रकरण की जांच चालु की चुकिं विधायक के प्रभाव से कुछ समय तक जांच चली लेकिन इस केस का खात्‍मा करवा दिया गया मतलब जांच में कोई अपराध नहीं पाया गया ऐसा निर्णय दिया गया और सभी बरी हो गये और मेरे पिता जी केस हार गये । लेकिन जमीन की ऋण पुस्‍तिका पर नाम होने की वजह से सऩ २००६ में विधायक से दबंग पार्टी ढुंढकर उसी जमीन की समस्‍त जानकारी देकर सौदा कर पेपर में जाहिर सूचना देकर १ करो्ड़ अस्‍सी लाख में बैच दिया और रजिस्‍ट्रार में मौजूद होकर ३४ एकड् की रजिस्‍ट्री करवा दी। उस समय जमीन बैचने पर कोई आपत्ति भी नहीं आयी उसके बाद सब शांती से जीवन चल रहा था।

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शायद आप अपना सवाल मुझे समझा नहीं पाए हैं या मैं आपका सवाल समझ नहीं पाया हूं आपका साथ गलत हुआ है यह तो लाजमी है पर इसका क्या इलाज है यह आपसे फोन पर चर्चा करने के बाद ही मुझे ऐसा लगता है मुझे समझ में आएगा इसलिए अपने केस के तथ्य को अच्छे से मुझे बताने के लिए कृपया मुझे फोन पर संपर्क करें


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