पॉक्सो fm10 bns केस 7 माह पुलिस चार्जेशीट द


सवाल

पॉक्सो 9f/9m/10 और bns केस में 7 माह हो गये आज तक पुलिस ने चार्जेशीट दाखिल नहीं की और अब 3 साल की विक्टिम को cwc ऑफिस बुला रही है पुलिस काउंसलिंग के लिए जबकी F.I.R. वाले दिन ही बच्ची के न्यायालय में बयान दर्ज हो गए थे। हमें गुमराह किया जा रहा है ।

उत्तर (10)


288 votes

चूंकि पीड़िता केवल 3 वर्ष की है और पहले ही न्यायालय में (संभावित रूप से धारा 164 सीआरपीसी के अंतर्गत) बयान दे चुकी है, इसलिए बिना किसी ठोस कारण और न्यायालय की अनुमति के उसे बार-बार बुलाना उचित नहीं है।

बाल कल्याण समिति कभी-कभी काउंसलिंग या बच्चे की भलाई की जांच के लिए बुला सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया संवेदनशील ढंग से की जानी चाहिए और बार-बार नहीं होनी चाहिए, खासकर जब इससे बच्चे को मानसिक आघात (पहुंचने की आशंका हो।

यदि आपको लगता है कि बच्चे को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है या उसे फिर से उस मानसिक आघात से गुजरना पड़ रहा है, तो आपको इसे अस्वीकार करने का अधिकार है। आप अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज करवा सकते हैं।उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (मैंडेमस) दायर करें, जिसमें निम्नलिखित के लिए निर्देश मांगे जाएं:

आरोप पत्र (चार्जशीट) शीघ्र दाखिल करने का निर्देश

पीड़िता को दोबारा मानसिक आघात से बचाने की सुरक्षा

पुलिस की कार्यवाही की निगरानी

111 votes

चूंकि पीड़िता केवल 3 वर्ष की है और पहले ही न्यायालय में (संभावित रूप से धारा 164 सीआरपीसी के अंतर्गत) बयान दे चुकी है, इसलिए बिना किसी ठोस कारण और न्यायालय की अनुमति के उसे बार-बार बुलाना उचित नहीं है।

बाल कल्याण समिति कभी-कभी काउंसलिंग या बच्चे की भलाई की जांच के लिए बुला सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया संवेदनशील ढंग से की जानी चाहिए और बार-बार नहीं होनी चाहिए, खासकर जब इससे बच्चे को मानसिक आघात (पहुंचने की आशंका हो।

यदि आपको लगता है कि बच्चे को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है या उसे फिर से उस मानसिक आघात से गुजरना पड़ रहा है, तो आपको इसे अस्वीकार करने का अधिकार है। आप अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज करवा सकते हैं।उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (मैंडेमस) दायर करें, जिसमें निम्नलिखित के लिए निर्देश मांगे जाएं:

आरोप पत्र (चार्जशीट) शीघ्र दाखिल करने का निर्देश

पीड़िता को दोबारा मानसिक आघात से बचाने की सुरक्षा

पुलिस की कार्यवाही की निगरानी

266 votes

चूंकि पीड़िता केवल 3 वर्ष की है और पहले ही न्यायालय में (संभावित रूप से धारा 164 सीआरपीसी के अंतर्गत) बयान दे चुकी है, इसलिए बिना किसी ठोस कारण और न्यायालय की अनुमति के उसे बार-बार बुलाना उचित नहीं है।

बाल कल्याण समिति कभी-कभी काउंसलिंग या बच्चे की भलाई की जांच के लिए बुला सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया संवेदनशील ढंग से की जानी चाहिए और बार-बार नहीं होनी चाहिए, खासकर जब इससे बच्चे को मानसिक आघात (पहुंचने की आशंका हो।

यदि आपको लगता है कि बच्चे को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है या उसे फिर से उस मानसिक आघात से गुजरना पड़ रहा है, तो आपको इसे अस्वीकार करने का अधिकार है। आप अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज करवा सकते हैं।उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (मैंडेमस) दायर करें, जिसमें निम्नलिखित के लिए निर्देश मांगे जाएं:

आरोप पत्र (चार्जशीट) शीघ्र दाखिल करने का निर्देश

पीड़िता को दोबारा मानसिक आघात से बचाने की सुरक्षा

पुलिस की कार्यवाही की निगरानी

147 votes

चूंकि पीड़िता केवल 3 वर्ष की है और पहले ही न्यायालय में (संभावित रूप से धारा 164 सीआरपीसी के अंतर्गत) बयान दे चुकी है, इसलिए बिना किसी ठोस कारण और न्यायालय की अनुमति के उसे बार-बार बुलाना उचित नहीं है।

बाल कल्याण समिति कभी-कभी काउंसलिंग या बच्चे की भलाई की जांच के लिए बुला सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया संवेदनशील ढंग से की जानी चाहिए और बार-बार नहीं होनी चाहिए, खासकर जब इससे बच्चे को मानसिक आघात (पहुंचने की आशंका हो।

यदि आपको लगता है कि बच्चे को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है या उसे फिर से उस मानसिक आघात से गुजरना पड़ रहा है, तो आपको इसे अस्वीकार करने का अधिकार है। आप अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज करवा सकते हैं।उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (मैंडेमस) दायर करें, जिसमें निम्नलिखित के लिए निर्देश मांगे जाएं:

आरोप पत्र (चार्जशीट) शीघ्र दाखिल करने का निर्देश

पीड़िता को दोबारा मानसिक आघात से बचाने की सुरक्षा

पुलिस की कार्यवाही की निगरानी

174 votes

चूंकि पीड़िता केवल 3 वर्ष की है और पहले ही न्यायालय में (संभावित रूप से धारा 164 सीआरपीसी के अंतर्गत) बयान दे चुकी है, इसलिए बिना किसी ठोस कारण और न्यायालय की अनुमति के उसे बार-बार बुलाना उचित नहीं है।

बाल कल्याण समिति कभी-कभी काउंसलिंग या बच्चे की भलाई की जांच के लिए बुला सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया संवेदनशील ढंग से की जानी चाहिए और बार-बार नहीं होनी चाहिए, खासकर जब इससे बच्चे को मानसिक आघात (पहुंचने की आशंका हो।

यदि आपको लगता है कि बच्चे को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है या उसे फिर से उस मानसिक आघात से गुजरना पड़ रहा है, तो आपको इसे अस्वीकार करने का अधिकार है। आप अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज करवा सकते हैं।उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (मैंडेमस) दायर करें, जिसमें निम्नलिखित के लिए निर्देश मांगे जाएं:

आरोप पत्र (चार्जशीट) शीघ्र दाखिल करने का निर्देश

पीड़िता को दोबारा मानसिक आघात से बचाने की सुरक्षा

पुलिस की कार्यवाही की निगरानी

69 votes

चूंकि पीड़िता केवल 3 वर्ष की है और पहले ही न्यायालय में (संभावित रूप से धारा 164 सीआरपीसी के अंतर्गत) बयान दे चुकी है, इसलिए बिना किसी ठोस कारण और न्यायालय की अनुमति के उसे बार-बार बुलाना उचित नहीं है।

बाल कल्याण समिति कभी-कभी काउंसलिंग या बच्चे की भलाई की जांच के लिए बुला सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया संवेदनशील ढंग से की जानी चाहिए और बार-बार नहीं होनी चाहिए, खासकर जब इससे बच्चे को मानसिक आघात (पहुंचने की आशंका हो।

यदि आपको लगता है कि बच्चे को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है या उसे फिर से उस मानसिक आघात से गुजरना पड़ रहा है, तो आपको इसे अस्वीकार करने का अधिकार है। आप अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज करवा सकते हैं।उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (मैंडेमस) दायर करें, जिसमें निम्नलिखित के लिए निर्देश मांगे जाएं:

आरोप पत्र (चार्जशीट) शीघ्र दाखिल करने का निर्देश

पीड़िता को दोबारा मानसिक आघात से बचाने की सुरक्षा

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136 votes

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बाल कल्याण समिति कभी-कभी काउंसलिंग या बच्चे की भलाई की जांच के लिए बुला सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया संवेदनशील ढंग से की जानी चाहिए और बार-बार नहीं होनी चाहिए, खासकर जब इससे बच्चे को मानसिक आघात (पहुंचने की आशंका हो।

यदि आपको लगता है कि बच्चे को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है या उसे फिर से उस मानसिक आघात से गुजरना पड़ रहा है, तो आपको इसे अस्वीकार करने का अधिकार है। आप अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज करवा सकते हैं।उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (मैंडेमस) दायर करें, जिसमें निम्नलिखित के लिए निर्देश मांगे जाएं:

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बाल कल्याण समिति कभी-कभी काउंसलिंग या बच्चे की भलाई की जांच के लिए बुला सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया संवेदनशील ढंग से की जानी चाहिए और बार-बार नहीं होनी चाहिए, खासकर जब इससे बच्चे को मानसिक आघात (पहुंचने की आशंका हो।

यदि आपको लगता है कि बच्चे को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है या उसे फिर से उस मानसिक आघात से गुजरना पड़ रहा है, तो आपको इसे अस्वीकार करने का अधिकार है। आप अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज करवा सकते हैं।उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (मैंडेमस) दायर करें, जिसमें निम्नलिखित के लिए निर्देश मांगे जाएं:

आरोप पत्र (चार्जशीट) शीघ्र दाखिल करने का निर्देश

पीड़िता को दोबारा मानसिक आघात से बचाने की सुरक्षा

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294 votes

चूंकि पीड़िता केवल 3 वर्ष की है और पहले ही न्यायालय में (संभावित रूप से धारा 164 सीआरपीसी के अंतर्गत) बयान दे चुकी है, इसलिए बिना किसी ठोस कारण और न्यायालय की अनुमति के उसे बार-बार बुलाना उचित नहीं है।

बाल कल्याण समिति कभी-कभी काउंसलिंग या बच्चे की भलाई की जांच के लिए बुला सकती है, लेकिन यह प्रक्रिया संवेदनशील ढंग से की जानी चाहिए और बार-बार नहीं होनी चाहिए, खासकर जब इससे बच्चे को मानसिक आघात (पहुंचने की आशंका हो।

यदि आपको लगता है कि बच्चे को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है या उसे फिर से उस मानसिक आघात से गुजरना पड़ रहा है, तो आपको इसे अस्वीकार करने का अधिकार है। आप अपनी आपत्ति लिखित रूप में दर्ज करवा सकते हैं।उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (मैंडेमस) दायर करें, जिसमें निम्नलिखित के लिए निर्देश मांगे जाएं:

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