पुलिस कोर्ट के आदेश का पालन न करे तो क्या करें


सवाल

एक पीड़ित महिला ने साल 2018 में घरेलू हिंसा कानून के तहत अदालत से सुरक्षा और निवास का आदेश प्राप्त किया था, जिसमें पुलिस को भी सुरक्षा देने के निर्देश थे। इसके बावजूद उसका भाई उसे लगातार प्रताड़ित कर रहा है और स्थानीय पुलिस थाना प्रभारी बार-बार शिकायत करने पर भी कोई सुरक्षा प्रदान नहीं कर रहे हैं। महिला अब यह जानना चाहती है कि क्या वह पुलिस की इस लापरवाही और अदालती आदेश के उल्लंघन के खिलाफ सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।

उत्तर (3)


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हाँ, आप पुलिस की लापरवाही और अदालती आदेश की अनदेखी के खिलाफ हाई कोर्ट जा सकती हैं। कानून के अनुसार, जब कोई निचली अदालत सुरक्षा का आदेश देती है, तो उसका पालन करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है। यदि स्थानीय पुलिस अधिकारी (Station House Officer) जानबूझकर इस आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं, तो आप हाई कोर्ट में एक रिट याचिका (Writ Petition) दायर कर सकती हैं। इसे अक्सर पुलिस सुरक्षा के लिए रिट (Writ for Police Protection) कहा जाता है, जिसमें हाई कोर्ट सीधे पुलिस को आदेश के पालन के लिए मजबूर कर सकता है।

इसके अलावा, आपके पास उसी मजिस्ट्रेट अदालत में वापस जाने का भी विकल्प है जिसने मूल आदेश दिया था। आप घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 18 और 19 के तहत सुरक्षा आदेश के उल्लंघन (Breach of Protection Order) की अर्जी दाखिल कर सकती हैं। अदालत ऐसे मामले में पुलिस को फटकार लगा सकती है और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दे सकती है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) के तहत भी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उनके कर्तव्यों का पालन न करने के लिए शिकायत की जा सकती है।

यदि आपका भाई अभी भी आपको परेशान कर रहा है या आपका बिजली कनेक्शन काट रहा है, तो आप अवमानना याचिका (Contempt Petition) भी दायर कर सकती हैं। अदालती आदेश का पालन न करना अदालत की अवमानना (Contempt of Court) माना जाता है। हाई कोर्ट इस बात का कड़ा संज्ञान लेता है जब कोई सरकारी विभाग या व्यक्ति न्यायिक आदेशों का मजाक बनाता है।

आपको सलाह दी जाती है कि अपनी पिछली सभी शिकायतों की रिसीविंग और डॉक्टर की सलाह या बिजली कटने के सबूतों को इकट्ठा करें। यह दस्तावेज हाई कोर्ट में आपकी बात साबित करने के लिए बहुत जरूरी होंगे। आप अपने जिले के पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) को भी एक अंतिम शिकायत भेजें और उसका प्रमाण अपने पास रखें, जो यह साबित करेगा कि आपने उच्च अधिकारियों को भी सूचित किया था।

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पुलिस के खिलाफ रिट के रूप में कार्रवाई के लिए पुलिस को फाइल करें, आशा है कि आपके पास लिखित दस्तावेज होंगे कि पुलिस सुरक्षा प्रदान नहीं कर रही है। इसके अलावा, अगर बिजली काट दी जाती है, तो रिकॉर्ड को पकड़ लें कि इसे क्यों काटा गया है, इससे आपको उच्च न्यायालय या कानून के किसी भी उच्च मंच पर जाने में मदद मिलेगी।

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हां, आप पुलिस की निष्क्रियता के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक रिट दायर करते हैं। आप उस अधिकारी के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला भी दर्ज कर सकते हैं, जिसे न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गंभीर आदेश के उल्लंघन के लिए निर्देश दिया था।


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