निवेदन धारा 6 66 762 506 प्रकरण चल माननीय न्य


सवाल

निवेदन है कि धारा 363, 366, 376(2), 506 का प्रकरण चल रहा था जिसमें माननीय न्यायालय ने पुलिस को दोषी ठहराते हुए निर्णय दिया है कि अनुसंधान निष्पक्षता पूर्ण नहीं किया गया। पुलिस ने अभियुक्त के विरुद्ध जो भी सामग्री मिली किसी भी प्रकार से एक दूसरे से सम्मिलित कर उसकी दोषिता सिद्ध करने हेतु प्रस्तुत की है और पुलिस ने वास्तविकता छिपाने की कोशिश की है। माननीय जज साहब ने आगे निर्णय में लिखा है कि अभियुक्त के विरुद्ध की गई अनुसंधान कार्य वाही पूर्णतः दूषित होना प्रकट हुई है और अभियोजन मामला सिद्ध करने में असफल रहा है जिसका लाभ अभियुक्त को दिया जाता है। मैं यह जानना चाहता हूं कि पीड़ित व्यक्ति जिस का एकमात्र सहारा पुलिस है जिसको पूरी बात बता कर न्याय की मांग की गई और उसे पूर्ण भरोसा रहा उसने अपने साथ घटित घटनाओं के सभी सच्चे प्रमाण भी दिए। वह तो पुलिस के पास रोज जा न सकेगा और उसे पुलिस बताएगी भी नहीं। अब निर्णय होने उपरांत पुलिस की गद्दारी का पता चला और वह अन्याय का शिकार हो गयी। ऐसी स्थिति में पीड़ित को न्याय कैसे मिल सकता है। क्या न्यायालय पुलिस के विरुद्ध कार्रवाई कर सकता है या नहीं।

उत्तर (2)


325 votes

जैसा कि आपने बताया पुलिस के द्वारा केस में सही से अनुसंधान नहीं किया गया है और यह बात कोर्ट ने भी अपने आदेश में कही है इसकी वजह से कोर्ट ने अभियुक्त को छोड़ दिया है अब पीड़ित अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ अपील कर सकता है और अभियुक्त को सजा दिलाने के लिए अपील की कोर्ट में गुहार लगा सकता है


अस्वीकरण: उपर्युक्त सवाल और इसकी प्रतिक्रिया किसी भी तरह से कानूनी राय नहीं है क्योंकि यह LawRato.com पर सवाल पोस्ट करने वाले व्यक्ति द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है और LawRato.com में अपराधिक वकीलों में से एक द्वारा जवाब दिया गया है विशिष्ट तथ्यों और विवरणों को संबोधित करें। आप LawRato.com के वकीलों में से किसी एक से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए अपने तथ्यों और विवरणों के आधार पर अपनी विशिष्ट सवाल पोस्ट कर सकते हैं या अपनी सवाल के विस्तार के लिए अपनी पसंद के वकील के साथ एक विस्तृत परामर्श बुक कर सकते हैं।


भारत के अनुभवी अपराधिक वकीलों से सलाह पाए


अपराधिक कानून से संबंधित अन्य प्रश्न