धारा 76 के मामले में मैं केस कैसे वापस ले सकता हूं
सवाल
उत्तर (2)
यह समझना आवश्यक है कि भारतीय कानून में बलात्कार (Rape) एक गैर-समझौतावादी (Non-Compoundable) अपराध है। इसका मतलब है कि आप, जो शिकायतकर्ता हैं, सीधे पुलिस या निचली अदालत (Trial Court) में आवेदन देकर यह केस वापस नहीं ले सकतीं। आपके वकील ने जो कहा है, वह कानूनी तौर पर बिल्कुल सही है।
इस मामले को समाप्त करने का एकमात्र कानूनी रास्ता केवल हाई कोर्ट से होकर जाता है।
केस समाप्त करने का एकमात्र कानूनी मार्ग
आपके मामले को समाप्त करने का एकमात्र तरीका प्राथमिकी (FIR) को रद्द (Quash) करवाना है, जिसके लिए आपको उच्च न्यायालय में याचिका दायर करनी होगी:
1. याचिका का प्रकार: आपको अपने पति (आरोपी) के साथ मिलकर उच्च न्यायालय में एक संयुक्त याचिका (Joint Petition) दायर करनी होगी। यह याचिका Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita - BNSS की धारा 504 के तहत दायर की जाती है।
2. याचिका का आधार: याचिका में आपको यह बताना होगा कि आप और आरोपी के बीच अब समझौता (Compromise) हो गया है और आप स्वेच्छा से (Voluntarily) और बिना किसी दबाव के अभियोजन (Prosecution) को आगे नहीं बढ़ाना चाहती हैं।
3. उच्च न्यायालय का दृष्टिकोण: उच्च न्यायालय (High Court) धारा 376 जैसे गंभीर अपराधों को रद्द करने में बहुत सख्त होते हैं। कोर्ट तभी आपकी याचिका को स्वीकार करेगा जब उसे यह विश्वास हो जाए कि:
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समझौता वास्तविक (Genuine) है, और यह मामला मुख्य रूप से सहमति से बने संबंध (Consensual Relationship) से संबंधित था, जिसे बाद में विवाह का वादा टूटने पर दर्ज कराया गया था।
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मामले को जारी रखने से कोर्ट के समय और प्रक्रिया का दुरुपयोग (Abuse of Process) होगा।
4. प्रक्रिया: याचिका दायर होने के बाद, आपको और आरोपी को हाई कोर्ट के सामने उपस्थित होना होगा और न्यायाधीश के सामने समझौते की पुष्टि करनी होगी। हाई कोर्ट आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति और परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही FIR और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आदेश दे सकता है।
आपको एक ऐसे आपराधिक वकील से संपर्क करना चाहिए जो उच्च न्यायालय में धारा 482 (अब BNSS 504) के तहत प्राथमिकी रद्द (Quashing) करवाने के मामलों को लड़ता हो। निचली अदालत में केस वापस लेने का कोई आवेदन काम नहीं करेगा।
अदालतें आजकल बहुत सख्त हैं और शिकायतकर्ता को बलात्कार आदि के मामले को वापस लेने की इजाजत नहीं है, वापसी का एक वास्तविक कारण देखने के बावजूद अदालत आपको मामले वापस लेने की अनुमति दे सकती है, यदि शिकायतकर्ता और आरोपी सहमत हैं या अदालत के बाहर समझ में आते हैं तो आपराधिक मामले या एफ आई आर को निम्नलिखित में से किसी भी उचित कदम से वापस ले लिया जा सकता है:
1. सीआरपीसी की धारा 257 के तहत आपराधिक शिकायत शिकायत द्वारा वापस ले जाया जा सकता है अदालत को एक याचिका
2. सीआरपीसी आपराधिक शिकायत की धारा 321 के तहत सार्वजनिक अभियोजक द्वारा अदालत को याचिका द्वारा वापस ले लिया जा सकता है
3. सीआरपीसी की धारा 320 के तहत शिकायतकर्ता द्वारा उचित न्यायालय में एक समझौता याचिका दायर की जा सकती है
4. धारा 482 सीआरपीसी के तहत शिकायतकर्ता और आरोपी द्वारा संयुक्त याचिका द्वारा उच्च न्यायालय द्वारा एफ आईआर का क्वेशिंग किया जा सकता है
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