क्या कोई थाना प्रभारी चोरी के आरोपी व्यक्ति को जमानत दे सकता है


सवाल

चोरी के मामलों में अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या पुलिस थाने से ही जमानत मिल सकती है या आरोपी को अदालत में पेश करना जरूरी होता है। भारतीय कानून में चोरी जैसे अपराधों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और अदालत के अधिकारों को अलग-अलग बांटा गया है।

उत्तर (5)


176 votes

नहीं, स्थानीय पुलिस थाना प्रभारी चोरी के आरोपी व्यक्ति को जमानत नहीं दे सकते। भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की संबंधित धाराओं के तहत, जो पहले आईपीसी की धारा 379 थी, चोरी का अपराध एक गैर-जमानती अपराध (Non-Bailable Offence) की श्रेणी में आता है। इसका मतलब है कि पुलिस अधिकारी के पास कानूनन यह अधिकार नहीं है कि वह आरोपी को अपनी मर्जी से थाने से रिहा कर सके।

जब भी पुलिस किसी व्यक्ति को चोरी के आरोप में गिरफ्तार करती है, तो उसे 24 घंटे के भीतर नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य होता है। चूंकि यह एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) है, इसलिए पुलिस बिना वारंट के आरोपी को हिरासत में तो ले सकती है, लेकिन उसकी रिहाई का फैसला केवल अदालत ही कर सकती है। आरोपी को जमानत (Bail) के लिए मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी देनी होती है।

अदालत मामले की परिस्थितियों और सबूतों को देखने के बाद ही यह तय करती है कि आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए या नहीं। यदि चोरी की गई संपत्ति की कीमत कम है या आरोपी का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, तो अदालत जमानत मंजूर कर सकती है। लेकिन थाने के स्तर पर आरोपी को केवल तभी छोड़ा जा सकता है यदि पुलिस को जांच के दौरान यह लगे कि उस व्यक्ति के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।

संक्षेप में, चोरी के मामले में जमानत लेने के लिए आपको कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अदालत का दरवाजा ही खटखटाना होगा। थाना प्रभारी केवल उन अपराधों में जमानत दे सकते हैं जो कानूनन जमानती (Bailable) होते हैं, जैसे मामूली मारपीट या गाली-गलौज। चोरी जैसे मामलों में यह शक्ति केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास सुरक्षित है।

290 votes

नहीं । आईपीसी की धारा 379 से जुड़े मामलों में पुलिस जमानत नहीं दे सकती। आईपीसी की धारा 379 में वर्णित अपराध गैर जमानती और संज्ञेय अपराध है। और ऐसे मामलों में केवल अदालत के पास आरोपी को जमानत देने या खारिज करने की शक्ति होती है।

275 votes

प्रिय मुवक्किल, नहीं, पुलिस प्रभारी, यदि थाने के पास जमानत देने का अधिकार नहीं है। केवल अदालत से याचिका पर जमानत देने की शक्ति है, एफआईआर के अनुसार भी शामिल है। किसी जरूरतमंद के लिए संपर्क कर सकते हैं।

116 votes

भारतीय दंड संहिता की धारा 379 एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। इस प्रकार के मामलों में पुलिस को भारतीय दंड संहिता की धारा 379 के तहत चोरी के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने की कोई शक्ति नहीं है। आप अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

55 votes

थाना प्रभारी के पास आईपीसी की धारा 379 (चोरी) के आरोपी को जमानत देने की कोई शक्ति नहीं है ... क्या वह आरोपी को धारा 41 (ए) के तहत नोटिस दे सकता है और उसे गिरफ्तार किए बिना अदालत में चार्जशीट जमा कर सकता है।


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