सिविल और क्रिमिनल केस को एक कोर्ट से दूसरे में ट्रांसफर कैसे करे
केस ट्रांसफर तब होता है जब न्याय की निष्पक्षता, गवाहों या पक्षकारों की सुविधा, सुरक्षा या विशेष परिस्थिति को देखते हुए अदालत को बदला जाता है। इसके लिए हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर याचिका (Transfer Petition) दाखिल की जाती है, जबकि कुछ मामलों में सत्र न्यायालय भी आदेश दे सकता है।
अगर आपका मुकदमा ऐसे कोर्ट में चल रहा है जहाँ आपको निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) को लेकर शक है, या कोर्ट बहुत दूर है और आने-जाने में दिक्कत हो रही है, तो आप केस ट्रांसफर (Transfer of Case) के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारत में कानून यह अनुमति देता है कि सही कारण होने पर सिविल या आपराधिक केस को एक अदालत से दूसरी अदालत में भेजा जा सकता है।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि सिविल और क्रिमिनल केस को एक कोर्ट से दूसरी कोर्ट में कैसे ट्रांसफर किया जाता है, ट्रांसफर के कानूनी आधार (Grounds) क्या हैं, नियम और प्रक्रिया क्या है, और सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट व सत्र न्यायालय किन परिस्थितियों में ट्रांसफर आवेदन पर कार्यवाही करते हैं।
विषयसूची
- सिविल और आपराधिक मुकदमें क्या होते है - Civil & Criminal Cases in Hindi
- आपराधिक केस और अपीलों को ट्रान्सफर करने के लिए आधार
- सिविल मुकदमे को एक कोर्ट से दूसरी कोर्ट में कैसे स्थानांतरित किया जाए?
- आपराधिक मुकदमें को एक अदालत से दूसरी अदालत में ट्रान्सफर कैसे करे?
- क्रिमिनल केस और अपील को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित कैसे करे - नियम व प्रक्रिया
- एक ही राज्य के भीतर आपराधिक मामले को एक कोर्ट से दूसरे में ट्रांसफर कैसे करे
- एक ही जिले या शहर में एक अदालत से दूसरी में केस ट्रांसफर कैसे करे
- सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट व सेशन कोर्ट केस ट्रांसफर आवेदन पर कब कार्यवाही कर सकते है?
- सिविल मामलों के लिए स्थानांतरण आवेदन किस कोर्ट में किया जाना चाहिए?
- सिविल केस को एक राज्य से दूसरे राज्य में कैसे ट्रांसफर करे
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सिविल और आपराधिक मुकदमें क्या होते है - Civil & Criminal Cases in Hindi
हमारी न्याय प्रणाली में दो प्रकार के मामले होते हैं एक सिविल और दूसरा आपराधिक जो इस प्रकार हैं:
- सिविल मुकदमें: यह मामले किसी व्यक्ति के निजी अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित होते है, जैसे की संपत्ति किसी व्यक्ति की जमीन पर गेर-कानूनी कब्जा, जमीन का पट्टा, किराया, भरण-पोषण आदि। इन मामलों में पीड़ित पक्ष के अधिकार को पुनः स्थापित कर न्यायालय द्वारा मुआवजा प्रदान कराया जाता है।
- आपराधिक मुकदमें: ये मामले गंभीर प्रकृति के होते हैं, इन्हें समाज के प्रति गलत माना जाता है, जैसे की गैर-इरादतन हत्या, अपहरण, डकैती, बलात्कार आदि। इन मामलों में आरोपी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा सजा प्रदान कर ने का प्रावधान होता है।
सिविल मामले सिविल प्रक्रिया संहिता द्वारा शासित होते हैं और आपराधिक मामले आपराधिक प्रक्रिया संहिता द्वारा शासित होते हैं। सिविल और क्रिमिनल केस को एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी अलग-अलग होती है, जिसके बारे में हम इस आर्टिकल में आगे चर्चा करेंगे।
आपराधिक केस और अपीलों को ट्रान्सफर करने के लिए आधार
सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और सेशन कोर्ट निम्नलिखित परिस्थितियों में आपराधिक मामलों और अपीलों को एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित (Transfer) कर सकते हैं:
- जब उनके सामने ऐसे तथ्य प्रस्तुत किए जाए की उनके अधीनस्थ किसी न्यायालय में निष्पक्ष और पक्षपात रहित जांच या सुनवाई नहीं हो सकती, या
- किसी मामले में कोई असामान्य कठिनाई वाला कानूनी प्रश्न उठने की संभावना है, या
- ऐसा स्थानांतरण आदेश करना इस संहिता के किसी प्रावधान द्वारा आवश्यक है, या
- ऐसा आदेश पक्षकारों या गवाहों की सामान्य सुविधा के लिए, न्याय हित में आवश्यक है।
आपराधिक मुकदमें को एक अदालत से दूसरी अदालत में ट्रान्सफर कैसे करे?
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 में आपराधिक मामलों को एक अदालत से दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने के प्रावधान निर्धारित किए गए हैं जो इस प्रकार हैं:
क्रिमिनल केस और अपील को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित कैसे करे - नियम व प्रक्रिया
किसी भी अपराधिक मुकदमें और अपील को एक राज्य से दूसरे राज्य में या एक हाई कोर्ट से दूसरे हाई कोर्ट में ट्रान्सफर करने की शक्ति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 406 के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट को प्रदान की गई है जो की इस प्रकार है:
- जब कभी सर्वोच्च न्यायालय के सामने ऐसी परिस्थिति आती है कि इस धारा के तहत आदेश न्याय की दृष्टि से आवश्यक है, तो वह उस मामले या अपील को एक हाई कोर्ट से दूसरे हाई कोर्ट को ट्रान्सफर करने का आदेश दे सकता है; या
- एक हाई कोर्ट के अधीनस्थ (Subordinate) किसी सत्र न्यायालय से दूसरे हाई कोर्ट के अधीनस्थ समान; या अधिक अधिकार-क्षेत्र (Higher Jurisdiction) वाले किसी अन्य सत्र न्यायालय को ट्रान्सफर को भी ट्रान्सफर करने का आदेश दे सकता है।
- सर्वोच्च न्यायालय इस धारा के अंतर्गत केवल भारत के अटार्नी जनरल; या मामले के किसी पक्षकार की अर्जी पर ही कार्यवाही कर सकता है; और
- ऐसा प्रत्येक आवेदन प्रस्ताव द्वारा किया जाएगा;
- जब ऐसा आवेदन भारत के अटॉर्नी जनरल या राज्य के एडवोकेट जनरल के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है तो आवेदन को शपथ-पत्र के द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए;
- अगर इस धारा के अंतर्गत कोई आवेदन खारिज कर दिया जाता है, और सुप्रीम कोर्ट की राय में आवेदन दुसरे दूसरे को तंग करने के उद्देश्य से किया गया है;
- तो सर्वोच्च न्यायालय आवेदक को आदेश दे सकता है कि वह आवेदन का विरोध करने वाले पक्षकार को, मुआवजे के रूप में एक हजार रुपए की राशि दे, जिसे वह मामले की परिस्थितियों में उचित समझे।
एक ही राज्य के भीतर आपराधिक मामले को एक कोर्ट से दूसरे में ट्रांसफर कैसे करे
किसी भी अपराधिक मुकदमें को एक ही राज्य के भीतर एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर करने की शक्ति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 407 के अंतर्गत हाई कोर्ट को प्रदान की गई है जो की इस प्रकार है:
- हाई कोर्ट अपराधिक मामले या अपील को किसी ऐसे न्यायालय में ट्रांसफर कर सकता है जो उसकी जांच या विचारण करने के लिए सक्षम हो; या
- किसी विशेष मामले को सुनवाई के लिए किसी अन्य सेशन न्यायालय को ट्रांसफर कर सकता है; या
- उच्च न्यायालय (High Court) किसी भी मामले या अपील का स्वयं विचारण भी कर सकता है।
- आपराधिक मामले को एक ही राज्य के किसी न्यायालय से दूसरे न्यायालय में ट्रांसफर करने के लिए उच्च न्यायालय में तब तक आवेदन नहीं किया जा सकता है जब तक कि ऐसे ट्रांसफर के लिए आवेदन सत्र न्यायालय में न किया गया हो और उसे सत्र न्यायालय द्वारा अस्वीकार न कर दिया गया हो।
- अगर ऐसा आवेदन राज्य के एडवोकेट जनरल के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है तो आवेदन को शपथ-पत्र के द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए।
- यदि ऐसा आवेदन अभियुक्त व्यक्ति द्वारा किया जाता है, तो उच्च न्यायालय मुआवजे के भुगतान के लिए बॉन्ड निष्पादित (Bond-Execute) करने का निर्देश दे सकता है, जिसे उच्च न्यायालय आवेदन का विरोध करने वाले व्यक्ति को दे सकता है, यदि न्यायालय को ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदन न्यायालय का समय बर्बाद करने के इरादे से किया गया है।
एक ही जिले या शहर में एक अदालत से दूसरी में केस ट्रांसफर कैसे करे
किसी भी आपराधिक मामले और अपील को एक ही जिले या शहर में एक अदालत से दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की शक्ति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 408 के तहत सत्र न्यायालय को प्रदान की गई है जो की इस प्रकार है:
जब कभी किसी सेशन न्यायाधीश को यह प्रतीत हो कि इस उपधारा के अधीन आदेश करना न्यायहित में आवश्यक है, तब वह किसी विशिष्ट अपराधिक मामले को उसके अधीन किसी न्यायालय से उसके अधिकार-क्षेत्र वाले किसी अन्य न्यायालय में ट्रांसफर करने का आदेश कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट व सेशन कोर्ट केस ट्रांसफर आवेदन पर कब कार्यवाही कर सकते है?
सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट व सत्र न्यायालय निम्नलिखित परिस्थितियों में किसी आपराधिक मामले को एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित कर सकते है:
- अधीनस्थ न्यायालय रिपोर्ट पर है; या
- मामले के किसी पक्षकार के आवेदन पर; या
- अपने स्वत: संज्ञान पर।
सिविल मुकदमे को एक कोर्ट से दूसरी कोर्ट में कैसे स्थानांतरित किया जाए?
सिविल प्रक्रिया संहिता 1963 की धारा 22 से 25 में सिविल मामलों को एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित करने के प्रावधान दिए गए हैं जो इस प्रकार हैं:
सीपीसी की धारा 22 विपक्षी/प्रतिवादी को सिविल मुकदमे के ट्रांसफर के लिए आवेदन करने की अनुमति देती है
- जहां एक सिविल वाद एक से अधिक न्यायालय में दायर किया जा सकता है; और
- अगर किसी न्यायालय में सिविल मुकदमा दायर कर दिया गया है तो विपक्षी या प्रतिवादी दूसरे पक्ष को नोटिस देने के बाद;
- मुकदमा किसी दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित करने के लिए आवेदन कर सकता है; और
- वह न्यायालय जिसमें ऐसा आवेदन किया गया है, अन्य पक्षकारों की आपत्ति पर विचार करने के बाद;
- यह निर्धारित करेगा कि अधिकारिता रखने वाले विभिन्न न्यायालयों में से किस न्यायालय में वाद आगे बढ़ाया जाएगा।
सिविल मामलों के लिए स्थानांतरण आवेदन किस कोर्ट में किया जाना चाहिए?
सीपीसी की धारा 23 के अनुसार दिवानी मामलों के लिए ट्रान्सफर आवेदन निम्नलिखित न्यायालय में किया जाना चाहिए:
- जहां सिविल मामलों को दाखिल करने के लिए क्षेत्राधिकार रखने वाले अलग-अलग न्यायालय एक ही अपीलीय न्यायालय (जिला न्यायालय) के अधीनस्थ हैं, वहां धारा 22 के तहत आवेदन अपीलीय न्यायालय में किया जाएगा।
- जहां ऐसे न्यायालय अलग-अलग अपीलीय न्यायालय के अधीनस्थ हों, किन्तु एक ही हाईकोर्ट के अधीन हों, वहां आवेदन हाईकोर्ट में किया जाएगा।
- जहां ऐसे न्यायालय विभिन्न उच्च न्यायालयों के अधीनस्थ हों, वहां आवेदन उस उच्च न्यायालय में किया जाएगा जिसके अधिकार क्षेत्र की स्थानीय सीमाओं के अंदर वह न्यायालय स्थित है जिसमें मुकदमा दाखिल किया गया है।
सिविल केस को एक राज्य से दूसरे राज्य में कैसे ट्रांसफर करे
सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 25 के तहत एक सिविल मामले और अपील को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने की शक्ति सुप्रीम कोर्ट को दी गई है, जो इस प्रकार है:
- सीपीसी की धारा 25 के अनुसार मुकदमें के किसी पक्षकार के आवेदन पर;
- अन्य पक्षकारों को नोटिस देने के बाद और उनका पक्ष सुनने के बाद;
- सर्वोच्च न्यायालय किसी भी स्तर पर, यदि वह संतुष्ट हे कि इस धारा के अधीन आदेश न्यायहित में आवश्यक है;
- तब वह किसी सिविल मुकदमे, अपील या अन्य कार्यवाही को एक राज्य के हाई कोर्ट या अन्य सिविल न्यायालय से किसी अन्य राज्य के हाई कोर्ट या अन्य सिविल न्यायालय में स्थानांतरित करने का निर्देश दे सकता है।
- इस धारा के अंतर्गत प्रत्येक आवेदन शपथ-पत्र द्वारा समर्थित होगा।
- जिस न्यायालय दिवानी मुकदमा, अपील या अन्य कार्यवाही ट्रान्सफर की गई है, ट्रान्सफर आदेश में किसी विशेष निर्देश का पालन करते हुए;
- या तो उस पर पुनः विचार करेगा या उस क्रम से आगे बढ़ेगा जिस पर वह उसे ट्रान्सफर किया गया था।
- सुप्रीम कोर्ट उपरोक्त आवेदन को खारिज करते समय, आवेदक को आवेदन का विरोध करने वाले व्यक्ति को दो हजार रुपए तक का मुआवज़ा देने का आदेश दे सकता।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कोई भी केस दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर हो सकता है?
हाँ, अगर कोर्ट को लगता है कि ट्रांसफर जरूरी है ताकि निष्पक्ष सुनवाई हो सके, तो केस को दूसरी कोर्ट में भेजा जा सकता है।
केस ट्रांसफर करने के लिए कहां अप्लाई करना होता है?
क्रिमिनल मामले में केस ट्रांसफर के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट में आवेदन कर सकते हैं। सिविल मामलों के लिए भी हाई कोर्ट में अपील की जाती है।
सुप्रीम कोर्ट किन मामलों में केस ट्रांसफर करता है?
जब दो अलग-अलग राज्यों के बीच केस हो या पब्लिक इंटरेस्ट का बड़ा मुद्दा हो, तब सुप्रीम कोर्ट केस को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर कर सकता है।
क्या ट्रांसफर एप्लिकेशन रिजेक्ट भी हो सकती है?
अगर कोर्ट को लगता है कि ट्रांसफर की वजहें उचित नहीं हैं या केवल सुनवाई टालने के लिए की गई हैं, तो एप्लिकेशन रिजेक्ट हो सकती है।