BNS 355 in Hindi - शराब पीकर उत्पात करने की बीएनएस धारा में सजा और जमानत


BNS Section 355 in Hindi

हम सभी एक शांतिपूर्ण समाज में रहना चाहते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कभी जानबूझकर तो कभी अनजाने में दूसरों की शांति भंग करते हैं। आपने अक्सर देखा होगा कि कई बार लोग नशे में धुत होकर सड़कों पर हंगामा करते हैं, या फिर पार्कों में शराब पीकर लोगों को परेशान करते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस क्या कार्रवाई करती है? क्या आपको पता है कि इन मामलों में कौन सा कानून लागू होता है? इसलिए इन्हीं बातों को आज हम भारतीय न्याय संहिता की धारा 355 के द्वारा जानेंगे कि, बीएनएस की धारा 355 क्या है? (BNS Section 355 in Hindi) और यह कब लागू होती है? शराब पीकर उत्पात करने की सजा क्या है और इस सेक्शन के लगने पर आरोपी को जमानत कैसे मिलती है?

नशे में धुत होकर सार्वजनिक जगहों पर गलत आचरण करने के अपराधों पर पहले भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 510 के तहत कार्रवाई होती थी। लेकिन अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के लागू होने के बाद इस तरह के अपराधों के लिए BNS की धारा 355 का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इस अपराध से जुड़ी जानकारी बहुत ही आसान भाषा में जानने के लिए इस आर्टिकल को अंत तक जरुर पढ़े।


बीएनएस की धारा 355 का अपराध क्या है - BNS Section 355 in Hindi

भारतीय न्याय संहिता की धारा 355 सार्वजनिक स्थान (Public Places) पर नशे में धुत होकर उत्पात मचाने वाले व्यक्ति के लिए दंड का प्रावधान (Provision) करती है। इस धारा के अनुसार जो कोई व्यक्ति शराब पीकर नशे की हालत में किसी सार्वजनिक स्थान या किसी ऐसे स्थान पर जहां उसका जाना मना हो। वहाँ जाकर किसी भी प्रकार का गलत व्यवहार करता है जिससे वहाँ मौजूद लोगों किसी भी प्रकार की समस्या होती है तो ऐसे व्यक्ति पर BNS की धारा 355 लागू की जा सकती है।


धारा 355 के अपराध में जानने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:-

  • आरोपी व्यक्ति नशे में (Drunk) होना चाहिए।
  • आरोपी (Accused) व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर होना चाहिए, जैसे कि सड़क, पार्क, बाजार आदि।
  • नशे की हालत में कोई भी ऐसा कार्य किया गया होगा, जिससे अन्य लोगों को परेशानी हुई होगी।

इस धारा के तहत किन-किन कार्यों को अपराध माना जा सकता है?

  • सड़क पर शराब के नशे में चिल्लाना।
  • पार्क में नशे की हालत में जोर-जोर से हंसना या गाना।
  • बाजार में नशे में धुत होकर लोगों से उलझना।
  • नशे में किसी सार्वजनिक स्थल पर गाली-गलौज करना।
  • बस स्टॉप पर नशे में अशोभनीय हरकतें (Indecent Act) करना।
  • रेलवे स्टेशन पर नशे में धक्का-मुक्की करना।
  • सार्वजनिक स्थान पर नशे में सो जाना और रास्ते को बाधित करना।
  • नशे में सार्वजनिक शौचालय में उत्पात मचाना।
  • सार्वजनिक स्थल पर नशे में लोगों को परेशान करना।

बीएनएस की सेक्शन 355 के अपराध का सरल उदाहरण

रमेश और सुरेश दोनों अच्छे दोस्त थे और एक ही कॉलोनी में रहते थे। एक दिन रमेश ने अपने दोस्तों के साथ शाम को पार्टी करने का फैसला किया। पार्टी में रमेश ने बहुत ज्यादा शराब पी ली। जब पार्टी खत्म हुई, तो वह नशे में धुत होकर सड़क पर निकल आया।रात का समय था और कॉलोनी के लोग आराम से सो रहे थे। लेकिन रमेश को अपनी शराब की नशे में कुछ समझ नहीं आ रहा था।

वह सड़क पर जोर-जोर से चिल्लाने लगा और गाना गाने लगा। उसकी तेज आवाज से आस-पास के लोग जाग गए और परेशान होने लगे। कुछ लोगों ने रमेश को शांत करने की कोशिश की, लेकिन वह उल्टा उनसे ही उलझने लगा। उसकी हरकतें असभ्य और गैर-जिम्मेदाराना थीं जिससे लोगों को परेशानी हो रही थी। इसके बाद पुलिस वहाँ आ जाती है, और रमेश के खिलाफ BNS Section 355 के तहत कार्यवाही करती है।


बीएनएस धारा 355 के अपराध की सजा - Punishment Under BNS Section 355 in Hindi

बीएनएस सेक्शन 355 अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति नशे की हालत में उत्पात मचाने का दोषी (Guilty) पाया जाता है, तो उसे साधारण कारावास (Simple Imprisonment) की सजा दी जा सकती है जो 24 घंटे तक हो सकती है। या उस पर 10 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, या दोनों सजा दी जा सकती है।

इसके साथ ही उस व्यक्ति को समाज सेवा (Social Service) की सजा दी जाती है, तो इसका मतलब यह होता है कि दोषी को समाज के लिए किसी प्रकार की सेवा करनी पड़ती है, जैसे सार्वजनिक स्थानों की सफाई, वृद्धाश्रम में सेवा आदि।


भारतीय न्याय संहिता की धारा 355 में जमानत का प्रावधान

बीएनएस की धारा 355 के अनुसार नशे की हालत में लोगों को परेशान करने का यह अपराध जमानती (Bailable) है, जिसका अर्थ है कि आरोपी को पुलिस स्टेशन से ही जमानत (Bail) मिल सकती है। इसके साथ ही सबसे जरुरी बात यह कि यह एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) नहीं है, इसलिए पुलिस इस अपराध में आरोपी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तारी नहीं कर सकती है।

BNS की धारा 355 समाज में शांति और अनुशासन बनाए रखने के लिए लागू की जाती है, और इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर शराब पी कर किए जाने वाले गलत व्यवहार को रोकना है।




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बीएनएस धारा 355 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल


नशे में धुत होकर हंगामा करने पर कौन सी धारा लगती है?

BNS की धारा 355 शराब के नशे में धुत होकर हंगामा करने के अपराध से संबंधित है। इसके प्रावधान अनुसार जो भी व्यक्ति नशे की हालत सार्वजनिक जगहों पर कोई भी ऐसा कार्य करेगा जिससे वहां मौजूद लोगों को परेशानी होगी, तो यह धारा उस व्यक्ति पर लागू होगी। 



क्या BNS Section 355 के तहत जमानत मिल सकती है?

जी हाँ, भारतीय न्याय संहिता की धारा 355 एक जमानती धारा है जिसमें आरोपी व्यक्ति को थाने से ही जमानत मिल जाती है। 



क्या सिर्फ शराब पीने से यह अपराध माना जाएगा?

नहीं, सिर्फ शराब पीना इस अपराध के लिए पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति को नशे की ऐसी अवस्था में होना चाहिए जिससे उसका आचरण सामान्य लोगों से अलग हो और दूसरों के लिए परेशानी का कारण बने।



भारतीय न्याय संहिता की धारा 355 के तहत नशे में धुत होकर हंगामा करने की सजा क्या है?

यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक जगहों पर नशे की हालत में कोई भी हंगामा करता है तो उस व्यक्ति पर बीएनएस की धारा 355 के अपराध का उल्लंघन करने के लिए 24 घंट की जेल व 1000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।



क्या इस धारा के तहत किसी महिला के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जा सकता है?

हाँ, यह धारा किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लागू हो सकती है, चाहे वह पुरुष हो या महिला।



अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर शराब पी रहा है तो क्या उस पर यह धारा लागू होगी?

अगर व्यक्ति सिर्फ सार्वजनिक स्थान पर शराब पी रहा है और उसके आचरण से किसी को असुविधा नहीं हो रही है, तो इस धारा के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। लेकिन अगर उसके आचरण से किसी को असुविधा हो रही है, तो यह धारा लागू हो सकती है।