सर सादर अवगत कराना हमारे बाबा जी पिता


सवाल

सर सादर अवगत कराना है कि हमारे बाबा जी के पिता जी ने एक सादे कागज में वसीयत की थी वसीयत में अपने तीनो पुत्रो को अपने चल और अचल संपत्ति में बराबर का अधिकार देने की बात कही है वसीयत सन 1965 में की गई थी और वसीयत कर्ता की सन 1970 में म्रत्यु हो जाती है और मौत के बाद तीनों पुत्रो को बराबर का हक मिल गया है । वसीयत कर्ता और वसियत प्राप्त कर्ता एवं दोनो गवाहों की मौत हो चुकी है और वसीयत रजिस्टर्ड नही है यदि आज हमारे भाई परिवार द्वारा दीवानी मुकदमा दायर कर वसीयत को चैलेंज किया जाय तो क्या हम वसीयत को सही साबित कर सकते है। हमारे बाबा जी के पिता जी को वसीयत लिखने का कारण यह था कि हमारे बाबा जी को उनके चाचा जी ने गोद ले लिया था तो उनके वास्तविक पिता से सारे अधिकार समाप्त हो गए थे तो फिर भी उनकी इच्छा थी कि मैं अपने तीनो पुत्रो को बराबर का हिस्सा देना चाहते थे तो वसीयत लिखा था आज से लगभग 54 वर्ष हो गए है इसलिए दोनों गवाहों की मौत हो गई है और वसीयत रजिस्टर्ड नहीं है तो हम अदालत के सामने कैसे सिद्ध करेगे जवाब दो

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सराफ वसीयत को चैलेंज नहीं कर सकते क्योंकि जो गवाह है वह मर चुके हैं और आपको एक बात बता दूं वसीयत को रजिस्टर्ड होना जरूरी नहीं है रजिस्ट्रेशन एक्ट 1960 की धारा 27 में वसीयत को कभी भी पेश किया जा सकता है तीनों भाइयों के जब बराबर बंटवारा हो गया एक बार आप लीजिए यह डिपेंड ऑन मजिस्ट्रेट होता है कि यदि मानते हैं या नहीं मानता आपको और पूरी राय बताता हूं


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