उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 144 किस काम आती है और पैतृक संपत्ति का नाम अकेले कैसे करवाएं


सवाल

सर, मैं जानना चाहता हूँ कि 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006' की धारा 144 किस काम के लिए होती है? और हमारी जो पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) का आपस में बंटवारा हो गया है और खेत हमारे कब्जे में हैं, लेकिन खतौनी में सभी हिस्सेदारों का नाम दर्ज है। उसे हमें अपने निजी नाम पर करवाने के लिए क्या करना होगा?

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उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (up revenue code 2006) की धारा 144 एक विशेष प्रकार के भूमिधरों पर प्रतिबंध लगाती है, जिनके पास अहस्तांतरणीय अधिकार (Non-transferable Rights) होते हैं।

धारा 144 का उद्देश्य: यह धारा मुख्य रूप से यह सुनिश्चित करती है कि कोई भूमिधर अपनी जोत (Holding) के उस हिस्से को हस्तांतरित (बेच या दान) नहीं कर सकता जिसे कानून ने उसे बेचने से मना किया है। यह किसानों और कमजोर वर्गों को उनकी जमीन बेचने से रोककर उनकी सुरक्षा करती है, ताकि वे हमेशा जमीन के मालिक बने रहें।


पैतृक संपत्ति को निजी नाम पर करवाने की प्रक्रिया (दाखिल खारिज)

चूंकि आपकी पैतृक संपत्ति का बंटवारा आपस में सहमति से हो गया है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में सभी के नाम संयुक्त रूप से दर्ज हैं, इसलिए आपको अपने हिस्से को व्यक्तिगत नाम पर करवाने के लिए 'दाखिल खारिज' या 'उत्परिवर्तन' (Mutation) की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

प्रक्रिया इस प्रकार हैं:

  1. पारिवारिक समझौता दस्तावेज (Family Settlement Document): चूंकि आपका बंटवारा मौखिक है, आपको सबसे पहले एक 'पारिवारिक समझौता ज्ञापन' (Memorandum of Family Settlement) तैयार करना चाहिए। इसमें सभी हिस्सेदारों को हस्ताक्षर करने होंगे और स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि किस हिस्सेदार को कौन सा खसरा नंबर मिला है।

    • सुझाव: इस समझौता ज्ञापन को पंजीकृत (Registered) करा लेना कानूनी रूप से सबसे सुरक्षित कदम होता है।

  2. दाखिल खारिज के लिए आवेदन: आपको अपने क्षेत्र के तहसीलदार (Tehsildar) या उप-जिलाधिकारी (SDM) के कार्यालय में एक वकील के माध्यम से 'दाखिल खारिज' के लिए आवेदन देना होगा।

  3. लेखपाल की जांच: आपका आवेदन मिलने के बाद, तहसीलदार उसे हल्का लेखपाल को भेजेंगे। लेखपाल मौके पर जाकर आपके कब्जे का सत्यापन करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी हिस्सेदार बंटवारे से संतुष्ट हैं।

  4. सार्वजनिक आपत्ति (Public Notice): राजस्व विभाग एक सार्वजनिक सूचना जारी करेगा और सभी को एक निश्चित समय-सीमा (आमतौर पर 15 से 30 दिन) देगा। इसका उद्देश्य यह होता है कि यदि किसी तीसरे पक्ष को इस बंटवारे पर कोई आपत्ति है, तो वह दर्ज करा सके।

  5. अंतिम आदेश: आपत्ति न आने या उसका निपटारा होने के बाद, तहसीलदार दाखिल खारिज का अंतिम आदेश जारी कर देंगे। इस आदेश के बाद, खतौनी में संयुक्त नाम हटकर सभी हिस्सेदारों के नाम उनके व्यक्तिगत हिस्से के साथ दर्ज हो जाएंगे।

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उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 144 किसी व्यक्ति विशेष को कोई कार्य नहीं करने हेतु निदेश देने के लिए लगायी जाती है। आपको अपने क्षेत्रीय न्यायालय में जाकर एक अच्छे सिविल वकील से संपर्क करना चाहिए और उनकी सहायता से स्वामित्व का हस्तांतरण करवाना चाहिए जिसके उपरांत जो संपत्ति का बंटवारा हुआ है वह उनके नाम पर ही हो जाएगा जिनके नाम पर अब वह संपत्ति आई है।


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