यदि मामला अदालत में है तो समझौता करने की क्या प्रक्रिया है


सवाल

एक दीवानी मुकदमे (Civil Suit) में समझौता करने की कानूनी प्रक्रिया क्या है, जबकि दोनों पक्ष (Parties) समझौते के लिए तैयार हैं? हम इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द, यानी एक सप्ताह के भीतर कैसे पूरा कर सकते हैं, क्योंकि अदालतें गर्मियों की छुट्टियों (Summer Vacations) के बाद लंबी तारीखें दे रही हैं?

उत्तर (2)


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जब दोनों पक्ष दीवानी मुकदमे (Civil Suit) में समझौता करने को तैयार होते हैं, तो यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत सीधी और तेज़ हो जाती है। इसे कानूनी भाषा में 'समझौता डिक्री' (Compromise Decree) या 'सहमति डिक्री' (Consent Decree) कहा जाता है।

जल्द समझौता करने की प्रक्रिया (आदेश 23, नियम 3 CPC)

समझौता 'दीवानी प्रक्रिया संहिता' (Civil Procedure Code - CPC) के आदेश 23, नियम 3 के तहत दर्ज किया जाता है। जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाएँ:

  1. समझौता ज्ञापन तैयार करना (Drafting the Settlement Memo):

    • दोनों पक्षों के वकीलों को तुरंत एक विस्तृत समझौता ज्ञापन (Compromise Memo) तैयार करना चाहिए।

    • इस ज्ञापन में समझौते की शर्तें (Terms and Conditions) पूरी तरह से स्पष्ट होनी चाहिए और यह स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए कि दोनों पक्ष मुकदमे को वापस लेने या समाप्त करने पर सहमत हैं।

    • ज्ञापन पर दोनों पक्षों और उनके वकीलों के हस्ताक्षर होने चाहिए।

  2. न्यायालय में आवेदन (Filing the Application):

    • इस हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन को CPC के आदेश 23, नियम 3 के तहत न्यायालय में एक संयुक्त आवेदन (Joint Application) के साथ दाखिल किया जाना चाहिए।

  3. शीघ्र सुनवाई के लिए मेंशनिंग (Mentioning for Early Hearing):

    • चूंकि आप जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं, इसलिए आपके वकील को तुरंत न्यायाधीश (Judge) के समक्ष मामले को मौखिक रूप से मेंशन (Mention) करना चाहिए।

    • वकील को न्यायालय को सूचित करना चाहिए कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है, समझौता ज्ञापन दाखिल कर दिया गया है, और इसे तत्काल प्रभाव से रिकॉर्ड (Record) करने की आवश्यकता है ताकि लंबी तारीखों से बचा जा सके।

  4. न्यायालय में बयान दर्ज कराना (Recording of Statements):

    • यदि न्यायाधीश मेंशनिंग स्वीकार करते हैं, तो वे मामले को उसी दिन या अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर सकते हैं।

    • दोनों पक्षों (या उनके वकीलों) को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना होगा और यह बयान देना होगा कि उन्होंने स्वेच्छा से (Voluntarily), बिना किसी दबाव के, समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और वे उसकी शर्तों से सहमत हैं।

  5. समझौता डिक्री जारी करना (Issuance of Consent Decree):

    • न्यायालय पहले जाँच करेगा कि समझौता कानूनी रूप से वैध (Lawful) है या नहीं।

    • संतुष्ट होने पर, न्यायालय समझौता ज्ञापन को रिकॉर्ड पर लेगा और उसी के अनुसार 'सहमति डिक्री' (Consent Decree) जारी कर देगा।

यह डिक्री न्यायालय के अंतिम निर्णय के समान होती है और इस डिक्री के विरुद्ध आमतौर पर कोई अपील (Appeal) दायर नहीं की जा सकती है (CPC आदेश 23, नियम 3A)। इस त्वरित प्रक्रिया के माध्यम से, आप निश्चित रूप से एक सप्ताह के भीतर इसे पूरा करने की कोशिश कर सकते हैं, बशर्ते न्यायाधीश मेंशनिंग स्वीकार कर लें।

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समझौता डिक्री की अवधारणा को समझना। सीपीसी का आदेश 23 आर 3 सूट के समझौते के बारे में बात करता है। मान लीजिए कि ए और बी के बीच एक सूट में ए और बी दोनों एक वैध समझौते (भारतीय अनुबंध अधिनियम के साथ पढ़ें) में प्रवेश कर सकते हैं और दोनों ने लिखित रूप में घोषित किया है कि वे सूट छोड़ रहे हैं। इस मामले में अदालत सहमति डिक्री तैयार करेगी। कोर्ट आगे यह जांच करेगा कि पार्टी ने स्वेच्छा से प्रवेश किया है, आमतौर पर प्रतिवादी समझौता के लिए आवेदन करता है इसलिए अदालत वादी और परिस्थितियों की जांच करेगी कि क्या समझौता स्वेच्छा से किया गया था। आदेश 23 आर 3 ए कहता है कि कोई भी अपील डिक्री के संबंध में नहीं होगी और एस्ट्रोपेल का नियम लागू होगा।


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अनुवादित किया गया मूल उत्तर यहां पढ़ा जा सकता है।


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